अपने परिवार में आपने बुजुर्गों को अकसर यह कहते सुना होगा कि हमें नवजात शिशु के साथ तोतली भाषा में बेवजह ढेर सारी बातें करनी चाहिए, इससे वे जल्दी बोलना सीख जाते हैं। अब तो विज्ञान ने भी इस बात को सच साबित कर दिया है।आपने नोटिस किया होगा कि बड़े-बुजुर्ग बच्चों के साथ खेलते वक्त कुछ न कुछ बोलते जरूर रहते हैं। अमेरिका स्थित कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता प्रोफेसर मेघा सुंदरा द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, अगर शिशु के साथ बेबी टॉक की जाए तो इससे उसमें सीखने की क्षमता का विकास तेजी से होता है। अध्ययन में यह पाया गया कि बच्चों से अगर उन्हीं के अंदाज में बातें की जाएं तो वे ध्यान से सुनते हैं। उन्हें लयबद्ध शैली में कही गई बातें ज्यादा पसंद आती हैं। इससे उनमें भाषा संबंधी विकास तेजी से होता है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 384 शिशुओं को शामिल किया था, जिनकी उम्र 6 से 15 महीने तक थी, इसलिए अगर आपके घर में भी नवजात शिशु है तो आप भी उसके साथ उसी के अंदाज में ढेर सारी बातें करें।

यहां ये बताने की जरूरत इसलिए पड़ रही है क्योंकि अब बहुत सारे बच्चे 3 से 4 साल बाद भी बोलना नहीं सीख पा रहे। ऐसा इसलिए क्योंकि बिजी होने के चलते पेरेंट्स बच्चों को मोबाइल या टीवी में इंगेज कर देते हैं तो इससे उनकी समझने की क्षमता तो विकसित होती है लेकिन बोलने की नहीं। इसलिए बहुत जरूरी है बच्चों को टाइम देना और उनसे बातचीत करते रहना।

क्या है इस पर डॉक्टर की राय

मैं इस रिसर्च से पूरी तरह सहमत हूं। दो साल की उम्र तक अगर बच्चों से उन्हीं की शैली में बातचीत की जाए तो वे सहज महसूस करते हुए तेजी से समझते और सीखते हैं।

(डॉ. ज्योति कपूर, सीनियर साइकियाट्रिस्ट, पारस हॉस्पिटल, गुरुग्राम से बातचीत पर आधारित)

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Edited By: Priyanka Singh