न्यू हेवन, एएनआइ : ग्लोबल वार्मिग और बढ़ता प्रदूषण अब सीधे तौर पर समूचे विश्व में मानव जीवन पर नकारात्मक असर डालने लगा है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन ऐसा प्रासंगिक विषय है, जिस पर हर व्यक्ति के विचार से प्रकृति के संरक्षण का नया मार्ग मिल सकता है।

एक नए अध्ययन में पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन पर संवाद करके पार्टनर एक-दूसरे को विचारों के जरिए प्रभावित कर सकते हैं। इस शोध के निष्कर्ष को जर्नल आफ एन्वाइरन्मेंटल साइकोलाजी में प्रकाशित किया गया है। येल स्कूल आफ द एन्वाइरन्मेंट में येल प्रोग्राम आन क्लाइमेंट चेंज कम्यूनिकेशन के शोधकर्ताओं ने इस अवधारणा पर मंथन किया। टीम ने पाया कि जलवायु परिवर्तन पर बातचीत के माध्यम से भागीदारों को एक-दूसरे को प्रभावित करने की क्षमता है। इस शोध के प्रमुख लेखक और वाइपीसीसीसी के एसोसिएट रिसर्च साइंटिस्ट मैथ्यू गोल्डबर्ग कहते हैं कि हम देखना चाहते थे कि क्या जलवायु परिवर्तन विषय पर अधिक बातचीत के माध्यम से जोड़ों के लिए जलवायु समर्थक नीतियों के लिए समर्थन बढ़ाने की क्षमता है।

जलवायु संगठनों को कितना दान करते हैं और सोशल मीडिया पर इस विषय पर कितनी बार पोस्ट करते हैं। प्रतिभागियों को यह अनुमान लगाने के लिए भी कहा गया कि जलवायु परिवर्तन विषय पर उनके पार्टनर की क्या राय है।

इस अध्ययन से यह पता चला कि जलवायु परिवर्तन विषय पर कई प्रतिभागियों के विचारों में एकरूपता थी तो कुछ मतभेद भी देखने को मिले। यह भी देखा गया कि जलवायु परिवर्तन पर मंथन करने वाले भागीदारों को दूसरे के विश्वासों की सटीक धारणा थी। ये परिणाम बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन के बारे में अधिक बातचीत के माध्यम से एक-दूसरे को प्रभावित करने और सही दिशा में आगे बढ़ने का मौका मिलता है। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के विचारों को वर्गीकृत करने के लिए वाइपीसीसीसी के ग्लोबल वार्मिग अमेरिकन फ्रेमवर्क का इस्तेमाल किया। यह फ्रेमवर्क छह दृष्टिकोणों की श्रृंखला पर आधारित है। इसमें क्रमवार तरीके से जलवायु परिवर्तन के खतरों को दर्शाया गया है। इस विषय पर विपरित विचार वाले प्रतिभागियों की संख्या बहुत कम थी। एक तिहाई से अधिक जोड़ों में एक शामिल था जिसका विश्वास चिंतित के रूप में वर्गीकृत किया गया।

गोल्डबर्ग ने कहा कि जलवायु परिवर्तन बेहद संवेदनशील विषय है। एक साथी अपने पार्टनर को दूसरे की तुलना में अधिक बेहतर तरीके से समझता है। इससे विषय की गंभीरता के आधार पर एक राय बनाने में मदद मिलेगी। वाइपीसीसीसी के निदेशक और वरिष्ठ विज्ञानी एंथनी लिसेरोविट्ज इस शोध के सह लेखक हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बारे में बात करना कार्रवाई का विकल्प नहीं है, लेकिन इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने में मदद जरूर मिलेगी। इस अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग जलवायु परिवर्तन के बारे में बहुत अधिक चिंतित हैं। वे अपने पार्टनर को इस मुद्दे से जोड़ सकते हैं। जलवायु पर बातचीत से अपने घरों में प्रियजनों को जागरूक बना सकते हैं।

गोल्डबर्ग मानते हैं कि न सिर्फ रोमांटिक पार्टनर, बल्कि सभी प्रकार के रिश्तों में इस विषय पर बातचीत होनी चाहिए। बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित हैं लेकिन वे इस पर बात नहीं करते। इस विषय पर अधिकाधिक बातचीत से लोगों को जागरूक बनाने में मदद मिलेगी और प्रकृति के संरक्षण की दिशा में व्यापक रूपरेखा तैयार हो सकेगी।

Edited By: Sanjay Pokhriyal