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इतने बड़े महलों में क्यो बनाए जाते थे छोटे-छोटे झरोखे? राजा-महाराजाओं का ये सीक्रेट जानकर आप भी कहेंगे वाह!

Published: Tue, 14 Jul 2026 12:19 PM (IST)

भारत के भव्य किलों और महलों में छोटे झरोखे बनाने के पीछे कई दिलचस्प कारण थे।

क्यों बनाए जाते थे छोटे और जालीदार झरोखे? (Picture Courtesy: Freepik)

क्यों बनाए जाते थे छोटे और जालीदार झरोखे? (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के पुराने किलों और महलों की वास्तुकला पूरी दुनिया के लोगों को हैरान कर देती है। उनकी बड़ी-बड़ी दीवारें, सुंदर नक्काशी वाले खंभे, ऊंची छतें और शानदार दरवाजे, इन किलों की भव्यता दिखाते हैं, लेकिन अगर ध्यान से देखें, तो इन ऊंची दीवारों के बीच आपको बहुत छोटे और बारीक जालियों वाले झरोखे नजर आएंगे। 

जब अपना वैभव दिखाने के लिए पुराने जमाने में सबकुछ इतना भव्य बनवाया जाता था, तो महलों की खिड़कियां क्यों छोटी बनवाई जाती थीं? दरअसल, बड़े महलों में छोटे झरोखे बनवाने के पीछे कई दिलचस्प कारण छिपे थे। आइए जानें क्या थीं ये वजहें। 

महल को ठंडा रखना 

पुराने समय में बिजली नहीं हुआ करती थी। इसलिए गर्मी में महल में ठंडक बनाए रखने के लिए छोटे झरोखे बनाए जाते थे। जब हवा हवा बाहर से इन झरोखों की छोटी जगह से होते हुए महल के अंदर आती, तो उसका दबाव बढ़ता और हवा का तापमान ठंडा हो जाता। इससे महल के अंदर ठंडक बनी रहती। राजस्थान और मध्य भारत में बने किलों में खासतौर से छोटे और जालीदार झरोखे महल को ठंडा रखने के लिए बनाए जाते थे।  

पर्दा प्रथा और सामाजिक नियम 

उस दौर में पर्दा प्रथा का चलन था और राजघरानों की महिलाएं खुले तौर पर सबके सामने नहीं आ सकती थीं। इसलिए छोटे और जालीदार झरोखे बनाए जाते थे, ताकि महल के अंदर रहने वाली स्त्रियां बाहर का नजारा आराम से देख सकें और उन्हें कोई न देख पाए। इससे महिलाओं की प्राइवेसी बनी रहती थी। 

महल की सुरक्षा

किलों और महलों में छोटे झरोखे बनाने की सबसे बड़ी वजह सुरक्षा थी। ये झरोखे छोटे और जालीदार होते थे। इसलिए बाहर से महल के अंदर क्या हो रहा है पता लगाना मुश्किल होता था, लेकिन अंदर खड़ा व्यक्ति आसानी से बाहर का सबकुछ देख सकता था। इसलिए अगर कोई दुश्मन हमला करने की कोशिश करें, तो सैनिकों को महल के अंदर से भी सबकुछ साफ-साफ दिखाई दे सकता था और वे दुश्मन पर हमला कर सकते थे।   

धूल और आंधी से बचाव

राजस्थान के इलाकों में तेज धूल भरी आंधी से बचने के लिए छोटे झरोखे बनाए जाते थे, ताकि बाहर की धूल महल के अंदर न आ जाए। इससे महल के अंदर का हिस्से को साफ करना आसान होता था। बड़ी खिड़कियों से धूल आसानी से महल के अंदर आ सकती थी।