यूपी-बिहार की शादियों में दूल्हा क्यों छूता है दुल्हन के पैर? बिना बोले बहुत कुछ कह जाती है ये अनोखी रस्म
यूपी-बिहार की शादियों में 'शिलारोहण' नाम की एक अनोखी रस्म होती है, जिसमें दूल्हा दुल्हन के पैर छूता है।

दुल्हन के पैर छूकर दूल्हा लेता है उम्र भर की जिम्मेदारी (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय शादियां अपनी अनोखी रस्मों और रीति-रिवाजों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं। यहां होने वाली हर रस्म के पीछे एक बहुत गहरा और प्यारा मतलब छिपा होता है।
अगर आप कभी यूपी या बिहार की किसी शादी में गए होंगे, तो आपने फेरों के वक्त एक बहुत ही हैरान करने वाला और खूबसूरत नजारा भी जरूर देखा होगा। जी हां, हम उस वक्त की बात कर रहे हैं जब मंडप में दूल्हा सबके सामने अपनी दुल्हन के पैर छूता है।

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यूपी-बिहार की अनोखी परंपरा 'शिलारोहण'
आमतौर पर हमारे समाज में हमेशा यही सिखाया जाता है कि पत्नी को पति के पैर छूने चाहिए। ऐसे में दूल्हे का सरेआम दुल्हन के पैर छूना किसी को भी थोड़ा अजीब लग सकता है। यूपी और बिहार में होने वाली इस बेहद खास रस्म को 'शिलारोहण' कहा जाता है। फेरों के दौरान जब दुल्हन एक लोढ़े पर अपना पैर रखती है, तब दूल्हा अपने हाथों से उसके पैर को छूता है।
आखिर क्या है इसके पीछे की असली वजह?
असल में, यह रस्म दूल्हे का अपनी दुल्हन के प्रति एक सच्चा समर्पण दिखाती है। जब दूल्हा पूरे समाज, परिवार और रिश्तेदारों के सामने अपनी दुल्हन के पैर छूता है, तो वह बिना कुछ कहे यह संदेश दे देता है कि उसके लिए उसकी पत्नी का सम्मान सबसे ऊपर है। वह समाज को बताता है कि उसका अपनी जीवनसंगिनी के प्रति पूरा समर्पण है।
इसके साथ ही, इस खूबसूरत रस्म का एक और बहुत गहरा मतलब है। जब दूल्हा पत्थर पर रखे दुल्हन के पैर को छूता है, तो वह उससे यह वादा करता है कि "आज से तुम्हारे जीवन के सारे बोझ और सारी जिम्मेदारियां मेरी हैं।" वह उसे यह एहसास दिलाता है कि जीवन का रास्ता चाहे कितना भी पथरीला क्यों न हो, वह हर कदम पर उसका सहारा बनेगा और उसकी हर परेशानी को खुद उठाएगा।
नई जिंदगी को बुरी नजर से बचाने वाली खास रस्म
इस पूरी रस्म में हल्दी में रंगे पीले चावलों का इस्तेमाल इसे और भी पवित्र बना देता है। जब दूल्हा दुल्हन का अंगूठा छूता है, तब रस्म को पूरा करने के लिए हल्दी वाले पीले चावलों को दुल्हन के पैरों के पास रखा जाता है। हिंदू धर्म में हल्दी को बुरी नजर से बचाने वाला और चावल को सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इन पीले चावलों के जरिए दूल्हा यह प्रार्थना और संकल्प करता है कि उनकी नई जिंदगी में कभी खुशियों की कमी न हो और उनके रिश्ते पर किसी की बुरी नजर न लगे।
महिला-पुरुष बराबरी की अद्भुत मिसाल
आज के समय में जब पूरी दुनिया महिला-पुरुष की बराबरी की बात कर रही है, तब यूपी-बिहार की यह सदियों पुरानी रस्म हमें बताती है कि हमारी परंपराओं की सोच कितनी आगे थी। शिलारोहण की यह रस्म इस बात का सबूत है कि शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि उम्र भर एक-दूसरे की इज्जत करने का सबसे खूबसूरत वादा है।
