भारत नहीं, ब्रिटेन में है भगवान गणेश की 1200 साल पुरानी दुर्लभ मूर्ति; सांप लपेटे नृत्य मुद्रा में आते हैं नजर
ब्रिटिश म्यूजियम में भारत की 1200 साल पुरानी गणेश प्रतिमा सुरक्षित है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश की है और बलुआ पत्थर से बनी है।

ऐसी गणेश प्रतिमा पहले कभी नहीं देखी होगी! (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं भारत की कई दुर्लभ और प्राचीन कलाकृतियां सदियों पहले यूरोप ले जाई गई थीं, जो आज भी वहां के संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रही हैं?
इन्हीं में से एक बेहद खास ऐतिहासिक धरोहर लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी गई है। जी हां, हम भगवान गणेश की लगभग 1200 साल पुरानी एक शानदार मूर्ति की बात कर रहे हैं।
बलुआ पत्थर से तराशी गई उत्तर प्रदेश की कला
ब्रिटिश म्यूजियम के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह प्राचीन प्रतिमा मूल रूप से उत्तर प्रदेश से जुड़ी है। बलुआ पत्थर से बनी यह कलाकृति करीब 750 ईसवी की है। इस मूर्ति में बप्पा को एक बहुत ही आकर्षक नृत्य की मुद्रा में दिखाया गया है, जिसमें उनका धड़ इंसान का और सिर हाथी का है। इसके साथ ही, उनके शरीर के चारों तरफ एक सांप लिपटा हुआ भी उकेरा गया है। कला के नजरिए से यह मूर्ति उस दौर की गवाह है, जब भगवान गणेश से जुड़े अलग-अलग प्रतीक धीरे-धीरे अपना स्पष्ट आकार ले रहे थे।
समय के साथ निखरता गया मूर्तियों का रूप
गणेश मूर्तियों का इतिहास एक बहुत लंबी कलात्मक यात्रा समेटे हुए है। अगर हम पुराने दौर की बात करें, तो शुरुआत में भगवान गणेश की मूर्तियों का स्वरूप बहुत ही सादा और सरल हुआ करता था। हालांकि, जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा, उनके स्वरूप में कई नई चीजें जुड़ती चली गईं। चार हाथ, हाथों में मोदक, कुल्हाड़ी और माला, उनका टूटा हुआ दांत और उनका वाहन मूषक, ये सभी प्रतीक समय के साथ मूर्तिकला का आम हिस्सा बन गए।
12वीं सदी की ओडिशा प्रतिमा में दिखता है पूरा विकास
मूर्तिकला में आए इस बदलाव और विकास को समझने के लिए ब्रिटिश म्यूजियम में ही रखी एक और ऐतिहासिक मूर्ति बेहतरीन उदाहरण है। यह 12वीं सदी की प्रतिमा है, जिसका संबंध ओडिशा से है। इस मूर्ति में गणेश जी के सभी नए और विकसित प्रतीकों का एक बहुत ही सुंदर संगम देखने को मिलता है। इसमें भगवान गणेश कमल के फूल पर खड़े हुए हैं और उनके ठीक नीचे, आधार के पास उनके वाहन मूषक को भी दर्शाया गया है।
शिस्ट पत्थर से बनी 13वीं सदी की भव्य मूरत
इन्हीं अद्भुत ऐतिहासिक धरोहरों के बीच, ब्रिटिश म्यूजियम के संग्रह में ओडिशा की ही एक और पुरानी गणेश मूर्ति भी पूरी हिफाजत से रखी गई है। 13वीं शताब्दी की यह खास प्रतिमा शिस्ट पत्थर से तराशी गई है और इसकी कुल ऊंचाई लगभग 119 सेंटीमीटर है।
