न शर्मीले, न बकबक करने वाले! जानिए Introvert-Extrovert से कितने अलग होते हैं 'ओट्रोवर्ट' पर्सनैलिटी के लोग
क्या आप कभी किसी पार्टी में गए हैं, जहां आप सबसे हंसकर बात कर रहे हैं, महफिल का पूरा मजा ...और पढ़ें

Introvert-Extrovert तो सुना होगा, अब जानिए ‘Otrovert’ क्या होता है (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इंसानी स्वभाव को समझने के लिए हम अक्सर लोगों को दो ही खानों में बांट देते हैं- 'इंट्रोवर्ट' और 'एक्सट्रोवर्ट', लेकिन जरा सोचिए क्या इंसानी दिमाग इतना सीधा है? बिल्कुल नहीं! इसी बीच एक दिलचस्प शब्द चर्चा में आता है- ओट्रोवर्ट (Otrovert)।
यह कोई बहुत पुरानी थ्योरी नहीं है, बल्कि हमारी पर्सनैलिटी को देखने का एक बिल्कुल नया चश्मा है और बहुत से लोग इस शब्द के बारे में जानकर कह रहे हैं, "अरे, यह तो बिल्कुल मेरे जैसा है।" आइए, इस आर्टिकल में समझते हैं कि आखिर यह 'ओट्रोवर्ट' इंसान होता कैसा है।
ओट्रोवर्ट कौन है?
कल्पना कीजिए एक ऐसे इंसान की जो किसी भी पार्टी या महफिल में जाए, तो सबसे बहुत अच्छे से बात करे। लोग उसे पसंद भी करें, लेकिन... उसे इस बात की रत्ती भर भी परवाह न हो कि लोग उसे अपने 'ग्रुप' में शामिल करते हैं या नहीं।
इस कॉन्सेप्ट को सबसे पहले साल मनोचिकित्सक डॉ. रामी कामिंस्की ने दुनिया के सामने रखा था। उनकी किताब 'द गिफ्ट ऑफ नॉट बिलॉन्गिंग' में इसका जिक्र किया गया है। आसान शब्दों में कहें तो, ओट्रोवर्ट वह है जो समाज में घुलना-मिलना जानता है, लेकिन अपनी आजादी और शर्तों की कीमत पर नहीं।
एक ओट्रोवर्ट की 3 सबसे बड़ी खूबियां
चूंकि यह विषय नया है, इसलिए इसके कोई कड़े नियम नहीं हैं। फिर भी, अगर आपमें ये बातें हैं, तो शायद आप भी एक ओट्रोवर्ट हैं:
- खुद की मर्जी के मालिक: ये लोग अपने नियम खुद बनाते हैं। समाज क्या सोचेगा या ग्रुप का नियम क्या है, इससे इन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ता। ये अपनी अलग पहचान बनाए रखने में यकीन रखते हैं।
- भीड़ में भी अकेले खुश: ऐसा नहीं है कि इन्हें लोगों से नफरत होती है। ये सामाजिक होते हैं, इनमें इमोशनल समझ भी काफी होती है, लेकिन ये अपनी खुशी या पहचान के लिए दूसरों की वाहवाही पर निर्भर नहीं होते। 10 लोगों के ग्रुप में गप्पे मारने से ज्यादा इन्हें किसी एक इंसान के साथ गहरी और सच्ची बातचीत करना पसंद होता है।
- 'फिट इन' होने की कोई चाहत नहीं: अगर ये किसी ग्रुप में फिट बैठ गए, तो ठीक है। और अगर लोग इन्हें 'अलग' समझते हैं, तो भी इन्हें कोई दिक्कत नहीं होती। ये अपनी अलग दुनिया में बिल्कुल संतुष्ट रहते हैं।
डॉ. कामिंस्की अपनी किताब में मशहूर चित्रकार फ्रीडा काहलो का उदाहरण देते हैं। फ्रीडा समाज में काफी सक्रिय थीं, लोग उनका सम्मान करते थे, लेकिन फिर भी उन्होंने कभी खुद को दूसरों के हिसाब से नहीं ढाला। वह अपनी एक बिल्कुल अलग और स्वतंत्र पहचान के साथ जीती रहीं।
क्या ओट्रोवर्ट होना आसान है?
बिल्कुल नहीं। अपनी शर्तों पर जीने के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं:
- गलत समझे जाने का डर: कई बार लोग इनकी इस आजादी और बेपरवाही को घमंड समझ लेते हैं। लोगों को लगता है कि ये रूखे हैं या इन्हें दोस्ती करने में कोई दिलचस्पी नहीं है।
- 'टीम वर्क' वाली दुनिया में घुटन: आज के समय में स्कूल से लेकर ऑफिस तक, हर जगह 'टीम' और 'ग्रुप' में काम करने को महान बताया जाता है। ऐसे माहौल में एक ओट्रोवर्ट को खुद को साबित करने में या वहां टिके रहने में घुटन महसूस हो सकती है।
- खुद से सवाल करना: कभी-कभी समाज का दबाव इतना होता है कि ये लोग खुद सोचने लगते हैं, "क्या मुझमें कोई कमी है जो मुझे दूसरों की तरह ग्रुप में रहना पसंद नहीं?" इस वजह से वे कभी-कभी दूसरों को खुश करने के लिए अपनी असली पर्सनैलिटी को छिपाने की कोशिश भी करते हैं।
पुरानी पर्सनैलिटी से यह कितना अलग है?
अगर आप सोच रहे हैं कि ओट्रोवर्ट, इंट्रोवर्ट या एक्सट्रोवर्ट की जगह ले लेगा, तो ऐसा नहीं है। यह 'बिग 5' जैसे पुराने पैमानों को खत्म नहीं करता, बल्कि उनमें एक नया रंग जोड़ता है:
- एक इंट्रोवर्ट इंसान लोगों की भीड़ में थक जाता है, जबकि ओट्रोवर्ट को ऐसा नहीं होता; वे बस भीड़ के पीछे भागते नहीं हैं।
- एक एक्सट्रोवर्ट को लोगों से एनर्जी मिलती है, लेकिन ओट्रोवर्ट को खुश रहने के लिए लोगों की भीड़ जरूरी नहीं लगती।
- एक एंबीवर्ट इन दोनों के ठीक बीच का इंसान होता है, लेकिन ओट्रोवर्ट का पैमाना ही बिल्कुल अलग है।
हो सकता है कि आप मूल रूप से एक इंट्रोवर्ट या एक्सट्रोवर्ट हों, और साथ ही आपके अंदर ओट्रोवर्ट वाली खूबी भी मौजूद हो। जैसे-जैसे इस पर और रिसर्च होगी, वैज्ञानिक इसे और बेहतर तरीके से समझा पाएंगे।
