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केसरिया बालम से लेकर हरियाला बन्ना तक, रेगिस्तान की धड़कन हैं ये लोकगीत; कहते हैं प्रेम और शौर्य की कहानी

Published: Mon, 10 Aug 2026 05:43 PM (GMT+05:30)

राजस्थान के लोकगीत वहां की संस्कृति और जीवनशैली का अहम हिस्सा हैं, जो प्रेम, शौर्य और उत्सवों की कहानियां कहते हैं।

राजस्थान के लोक संगीत की झलक (AI Generated Image)

राजस्थान के लोक संगीत की झलक (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान की संस्कृति की बात करें, तो वहां के लोकगीतों के बारे में बात करना जरूरी है। रेगिस्तान के मुश्किल जीवन में बने ये लोकगीत अपने सुरों और खूबसूरत लिरिक्स के लिए जाने जाते हैं।

ये लोगों का मनोरंजन करने के साथ-साथ शादी-ब्याह और तीज-त्योहारों जैसे खुशी के अवसरों को भी बयां करते हैं। आइए जानें राजस्थान के लोकगीतों के बारे में। 

मारवाड़ और थार का संगीत

राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी खास गायन शैली और गीत हैं, जो वहां की संस्कृति की खूबसूरत तस्वीर पेश करते हैं। मारवाड़ और थार क्षेत्र में मांड गायन मशहूर है। इसमें वीरता से लेकर रोमांस जैसी भावनाओं को गाकर बयां किया जाता है।

हरियाला बनरा ओ थारी बोली प्यारी लागे, मांड शैली में गाया गया गाना है, जिसमें एक स्त्री अपने पति का इंतजार कर रही है और उसके रंग-रूप की तारीफ कर रही है। इसके साथ ही, केसरिया बालम आओ नी भी मांड शैली में गाया गया गीत है, जो आज राजस्थान की पहचान बन चुका है। मांगणियार और लंगा जातियां कमायचा और खड़ताल के साथ ये गीत गाते हैं, जो दिल को छू जाता है। 

शेखावाटी और ढूंढाड़ क्षेत्र 

इस क्षेत्र के गीतों में उत्साह और उत्सव की झलक देखने को मिलतीहै। घूमर, तीज, गणगौर और शादी में गाए जाने वाले बन्ना-बन्नी वाले गीत इस क्षेत्र की जान हैं। चंग और ढोलक की थाप पर सामूहिक रूप से गाए जाने वाले ये गीत काफी मजेदार होते हैं। 

मेवात और बृज क्षेत्र 

उत्तर-पूर्वी राजस्थान का संगीत बृज और भक्ति की भावना से गहराई से जुड़ा है। रसिया और मेवती लोकगीत इस क्षेत्र की पहचान हैं। बड़े-बड़े नगाड़ों की थाप पर गाया जाने वाला बम रसिया, भक्ति और उल्लास का अनोखा मेल पेश करता है। 

मेवाड़ और हाड़ौती क्षेत्र

इस क्षेत्र के गायन में प्रकृति और भक्ति रस सुनने को मिलता है। इन गीतों की लय काफी तेज होती है और ये मुख्य रूप से मेलों और त्योहारों पर सामूहिक रूप से गाए जाते हैं। 

वीरगाथा और धार्मिक लोकगीत

राजस्थान को वीरता की भूमि कहा जाता है। इसलिए इसके हर क्षेत्र में राजस्थानी शैर्य और परंपरा को पेश करने वाले लोकगीत सुनने को मिल जाएंगे। इनमें रावण हत्था, कमायचा, खड़ताल, सांरगी और मंजीरे जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है।