‘Gen-Z तो कामचोर है…’ वाली सोच बदल लीजिए! छुट्टी में भी लैपटॉप नहीं छोड़ रही ये पीढ़ी, नए सर्वे ने चौंकाया
अक्सर यह माना जाता है कि Gen-Z को काम करना ज्यादा पसंद नहीं है और वे थोड़े आलसी होते हैं। ...और पढ़ें

छुट्टियों में भी Gen-Z पर काम का बोझ, सर्वे ने तोड़ी पुरानी सोच (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप भी ऑफिस में काम करने वाले नए लड़के-लड़कियों को देखकर सोचते हैं कि "आजकल के युवाओं में वो बात नहीं, ये तो बस काम से जी चुराते हैं"? अगर हां, तो आपको अपनी यह सोच तुरंत बदलने की जरूरत है।
कुछ ही साल पहले नौकरी की दुनिया में कदम रखने वाली इस Gen-Z पीढ़ी पर हमेशा से कामचोर और आलसी होने का ठप्पा लगता रहा है। ब्रिटेन में हुए एक ताजा सर्वे और दुनिया की दिग्गज कंपनियों के सीईओ ने इस पुरानी धारणा की पूरी तरह से हवा निकाल दी है। जी हां, आराम फरमाने के बजाय, ये युवा अपनी छुट्टियों के दिनों में भी काम के बोझ तले दबे हैं। आइए जानते हैं कि Gen-Z के काम करने के तरीके पर नई रिपोर्ट आखिर क्या गवाही दे रही है।

(Image Source: AI-Generated)
छुट्टी के दिनों में भी काम का बोझ
'एम्प्लॉयमेंट हीरो' नाम की एक रिक्रूटमेंट फर्म ने 40,000 से ज्यादा कर्मचारियों पर एक सर्वे किया है, जिसके नतीजे पुरानी सोच को पूरी तरह बदल देते हैं।
ब्रिटेन के कुल कर्मचारियों में से 27% लोग छुट्टी में काम करते हैं, लेकिन Gen-Z के मामले में यह आंकड़ा 41% है। यानी लगभग हर चार में से एक युवा अपनी सालाना छुट्टी के हर दिन काम कर रहा होता है।
इसके अलावा, 39% युवाओं ने यह भी माना कि जब वे छुट्टी पर होते हैं, तब भी उनके लिए खुद को दफ्तर के काम से पूरी तरह दूर रख पाना बेहद मुश्किल होता है।
मैनेजर का दबाव और दफ्तर लौटने का खौफ
आखिर ये युवा अपने आराम के पलों को इंजॉय क्यों नहीं कर पाते? इसकी सबसे बड़ी वजह दफ्तर का माहौल है।
जी हां, सर्वे में शामिल 23% जेन-जी कर्मचारियों ने बताया कि उनके बॉस या सहकर्मी उनसे यह उम्मीद रखते हैं कि वे छुट्टी के दिन भी काम के लिए मौजूद रहें। काम से दूर होने की चिंता इतनी ज्यादा है कि करीब एक तिहाई, यानी 32% युवाओं ने अपनी छुट्टियां आगे खिसका दीं या उन्हें पूरी तरह रद्द ही कर दिया।
हद तो तब हो जाती है जब 49% कर्मचारियों को सिर्फ यह सोचकर ही घबराहट होने लगती है कि छुट्टी खत्म होने के बाद उन्हें वापस काम पर लौटना होगा। इन सब से बचने और अपने करियर में बेहतर ग्रोथ के लिए 55% जेन-जी ने तय किया है कि वे साल के आखिर तक कोई नई नौकरी तलाशेंगे।
महंगाई ने भी मारा, लंबी ट्रिप से तौबा
युवाओं के लिए सिर्फ काम का दबाव ही इकलौती परेशानी नहीं है। एम्प्लॉयमेंट हीरो की स्टडी बताती है कि बढ़ती महंगाई ने भी इनका बजट बिगाड़ रखा है। घूमने-फिरने पर होने वाले खर्च का सबसे ज्यादा असर इन्हीं युवा कर्मचारियों पर पड़ रहा है। यही कारण है कि 79% जेन-जी कर्मचारी बढ़ते खर्चों के डर से अब साल में कोई भी लंबी छुट्टी लेने से बचते हैं।
बड़ी कंपनियों के अधिकारी भी हुए मुरीद
युवाओं की लगन सिर्फ इस सर्वे में नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट जगत के दिग्गजों की नजरों में भी है। मशहूर टेक कंपनी एचपी के सीनियर वीसी जॉर्ज ब्रॉशर का मानना है कि जेन-जी के अंदर लोगों को ध्यान से सुनने, भरोसा कायम करने, रिश्ते बनाने और ग्राहकों की असली जरूरत को समझने की शानदार खूबी होती है।
एचपी ही नहीं, बल्कि स्ट्राइप, लिंक्डइन और कोलगेट जैसी ग्लोबल कंपनियों के लीडर्स भी यह मानते हैं कि आज की इंडस्ट्री को जिन टेक्निकल स्किल्स की जरूरत है, वे इस नई पीढ़ी के पास भरपूर मात्रा में मौजूद हैं। इन सब बातों से साफ है कि जेन-जी काम से भागने वाले नहीं हैं, बल्कि वे काम और महंगाई के दोहरे दबाव का सामना कर रहे हैं।
