नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। World Hepatitis Day: हेपेटाइटिस एक डिसऑर्डर है जिसके कारण लिवर (यकृत) में सूजन हो जाती है। हेपेटाइटिस का संक्रमण एक्‍यूट या क्रॉनिक हो सकता है। इससे स्वास्थ्य की गंभीर जटिलतायें हो जाती हैं, जिनमें लिवर का क्षरण, लिवर की निष्क्रियता, या लिवर का कैंसर शामिल हैं जो मामले की गंभीरता पर निर्भर है। 

हेपेटाइटिस मां से बच्चे को हो सकता है। इसके अलावा यह यौन सम्बन्ध, संक्रमित रक्त के संपर्क, सुइयों से संक्रमण, निजी देखभाल की वस्तुओं को शेयर करने, गंदी परिस्थिति में टैटू बनवाने या पियर्सिंग करवाने के माध्यम से भी फैलता है। इसके पांच प्रकारों में से हेपेटाइटिस बी और सी वायरस का सम्बन्ध पुरुषों और महिलाओं के बांझपन की समस्या (इनफर्टिलिटी) से है।

हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी

हेपेटाइटिस बी को लिवर में वायरस के संक्रमण के रूप में समझा जा सकता है। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी के कुछ लक्षणों में जॉन्डिस, बुखार, थकान, पेट की खराबी और दर्द, जोड़ों में दर्द और मटमैले रंग का मल शामिल हैं। हेपेटाइटिस बी के लक्षणों को प्रकट होने में 6 महीने का वक्त लग सकता है जबकि हेपेटाइटिस सी के लक्षण 2 सप्ताह से लेकर 6 महीनों में उभरते हैं। एक-तिहाई से अधिक संक्रमित लोगों को कुछ भी महसूस नहीं होता है। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी के निदान के लिए अक्सर खून की जांच की जाती है।

हेपेटाइटिस और फर्टिलिटी

डॉ. गुंजन सभरवाल, फर्टिलिटी एक्सपर्ट, नोवा साउथएंड आइवीएफ़ ऐंड फर्टिलिटी, गुड़गांव का कहना है कि, 'हेपेटाइटिस के संक्रमण शुक्राणु की खराब गुणवत्ता और पुरुषों एवं महिलाओं दोनों में फर्टिलिटी की कमी से सम्बंधित होते हैं। हेपेटाइटिस बी के ‘एस’ प्रोटीन शुक्राणु की गतिशीलता और फर्टिलिटी में 50% से अधिक तक की कमी के लिए जिम्मेदार होता है। अध्ययनों के अनुसार, एचबीवी (हेपेटाइटिस बी वायरस) से संक्रमित लोगों को इनफर्टिलिटी होने की आशंका अन्य लोगों की अपेक्षा 1.9 गुणा अधिक होती है। हाल के अनुसंधान के अनुसार हेपेटाइटिस बी से संक्रमित इनफर्टाइल (बाँझ) पुरुषों में हेपेटाइटिस के संक्रमण से मुक्त इन्फर्टाइल पुरुषों की तुलना में शुक्राणु का परिमाण, शुक्राणु की सांद्रता, शुक्राणु की उत्तरजीविता दर, और सामने शुक्राणु की संरचना की दर काफी कमतर होती है। हेपेटाइटिस बी के शिकार लोगों में शुक्राणु के डीएनए के विखंडन की संभावना भी ज्यादा होती है।'

अध्ययनों से संकेत मिलते हैं कि एचसीवी (हेपेटाइटिस सी वायरस) के कारण शुक्राणुओं की असामान्य संरचना में काफी वृद्धि और शुक्राणुओं की गतिशीलता में कमी हो जाती है। एचसीवी में वृद्धि के साथ शुक्राणुओं की संख्या में काफी कमी देखी गई है।

उपचार

हेपेटाइटिस के लिए उपचार योजना हेपेटाइटिस के प्रकार के आधार पर अलग-अलग होगी। वायरस-रहित हेपेटाइटिस, जैसे कि अल्कोहल या हानिकारक पदार्थों से उत्पन्न हेपेटाइटिस के मामले में ठीक होने के लिए रसायनों से संपर्क और हानिकारक पदार्थो का सेवन कम करना महत्वपूर्ण है। अल्कोहल जनित हेपेटाइटिस के गंभीर मामलों में लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है।

वायरस के संक्रमण से होने वाले हेपेटाइटिस में सुई या मुँह के माध्यम से वायरस-रोधक दवाएँ दी जाती हैं। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी से संक्रमित लोगों को दवाओं से उपचार करने पर लाभ हो सकता है। असल में हेपेटाइटिस बी के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कुछ वायरस-रोधक दवाओं से प्रजनन क्रिया में वृद्धि देखी गई है।

हेपेटाइटिस से संक्रमित लोगों को गर्भधारण के लिए वैकल्पिक साधन, जैसे कि एआरटी और आइवीएफ़ उपचारों की सलाह दी जाती है। ऐसा पाया गया है कि पुरुषों में हेपेटाइटिस उनके शुक्राणुओं की संख्या को प्रभावित करता है लेकिन इस प्रकार की उपचार प्रक्रिया के परिमाण पर उनका कोई असर नहीं होता है।

सावधानियां

हेपेटाइटिस बी से सुरक्षित रहने के लिए टीकाकरण बेहद प्रभावकारी और सुरक्षित विधि है। टीकाकरण सभी नवजात शिशुओं और 18 वर्ष से नीचे के सभी बच्चों के लिए अनुशंसित है। डायबिटीज से पीड़ित या अपनी जीवनशैली, जन्मभूमि, जीवन की परिस्थिति या नौकरियों के कारण हेपेटाइटिस के उच्च जोखिम के लिए संवेदनशील लोगों के लिए भी हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाना बेहतर होगा। 

Pic credit- freepik

Edited By: Priyanka Singh