नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। World Brain Day 2021: आज दुनियाभर में विश्व मस्तिष्क दिवस यानी वर्ल्ड ब्रेन डे मनाया जा रहा है। यह हल साल 22 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य मस्तिष्क स्वास्थ्य के बारे में लोगों के बीच जागरूकता को बढ़ावा देना है।

उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल के डायरेक्टर और फाउंडर डॉ. शुचिन बजाज ने कहा, "इस साल 'विश्व मस्तिष्क दिवस' की थीम 'Stop Multiple Sclerosis' यानी 'मल्टीपल स्केलेरोसिस को रोकें' बिलकुल उचित है। मल्टीपल स्केलेरोसिस एक क्रोनिक कंडीशन होती है, लेकिन इसके बारें में जागरूकता बहुत कम है। यह एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो किसी भी व्यक्ति के जीवन में कठिनाइयां पैदा करती है। यह एक व्यक्ति के दिमाग़ से लेकर शरीर को विकलांग बना सकती है।

मल्टीपल स्केलेरोसिस में क्या होता है?

डॉ. शुचिन बजाज का कहना है कि इस बीमारी के लक्षण आमतौर पर धुंधला दिखाई देने और अंगों में सुन्नता और झुनझुनी आने से शुरू हो सकते हैं और फिर अंत में आंखों की रौशनी जाने के साथ व्यक्ति में शारीरिक समस्याएं शुरू हो जाती हैं। भारत में भी यह बीमारी काफी देखी जाती है। न्यूरोलॉजिस्ट की संख्या में आई वृद्धि और एमआरआई सुविधाओं की आसान और सस्ती उपलब्धता की वजह से अब इस बीमारी का पता चलने लगा है।

क्यों होता है एमएस?

एमएस ( मल्टीपल स्केलेरोसिस) किस वजह से होता है, इसका सटीक कारण अभी भी पता नहीं चल पाया है। हालांकि इस पर हुए एक शोध से पता चला है कि पर्यावरण और आनुवंशिक दोनों फैक्टर इस समस्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समय के साथ इस बीमारी के बारे में ज़्यादा जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए। ख़ासतौर से रिहैबिलिटेशन के लिए ज़्यादा बुनियादी सुविधाएं, संस्थानों में विशेष एमएस क्लीनिक, एमएस रजिस्ट्री, सरकारी सहायता, इंश्योरेन्स कवरेज की उपलब्धता को बढ़ाने की ज़रूरत है।

मल्टीपल स्केलेरोसिस के लक्षण

पारस हॉस्पिटल, गुड़गांव के न्यूरोलॉजी यूनिट हेड और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रजनीश कुमार ने बताया, "यह एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, हर साल विश्व स्तर पर इस समस्या से सभी आयु वर्ग के लोग पीड़ित होते हैं। मल्टीपल स्केलेरोसिस एक ऐसी कंडीशन होती है, जिसमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है। जिससे मस्तिष्क और शरीर के बीच होने वाले संचार में बाधा आती है। इसमें देखने की क्षमता में कमी, हाथ या पैर में सुन्नता, सनसनी या संतुलन से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। ये समस्याएं हल्की भी हो सकती हैं, लेकिन ज़िंदगी भर के लिए होती हैं, जो मरीज़ों में गंभीर विकलांगता पैदा कर देती है।"

"इस बीमारी का लक्षण हर व्यक्ति में अलग होता है। कुछ लोगों में लक्षण नहीं दिखता है, जबकि कुछ में ये लक्षण गंभीर दिखाई देते हैं जैसे कि आंखों की रौशनी से जुड़ी समस्याएं, झुनझुनी और सुन्नता, दर्द और ऐंठन, थकान और कमज़ोरी, संतुलन से जुड़ी समस्याएं, चक्कर आना, मूत्राशय, आंत्र की बीमारी, यौन बीमारी आदि शामिल होती हैं। इस वक्त हमारे पास इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन दवाओं और अन्य इलाजों से लक्षणों का इलाज करना संभव है।"