नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। COVID-19 Negative: भारत को कोरोना वायरस महामारी से लड़ते हुए दो महीनों से ज़्यादा का समय हो गया है। इससे लड़ने के लिए करीब तीन महीने सख्ती से लॉकडाउन रहा, लेकिन इसके बावजूद मामले लगातार बढ़ते दिखे। भारत में कोरोना वायरस की मरीज़ों का आंकड़ा दो लाख के करीब पहुंच गया है।  

इससे जुड़ी सबसे चिंताजनक बात जो सामने आई है, वो है एक व्यक्ति का लक्षणों और सीटी स्कैन में कोरोना वायरस साफ तौर पर पाए जानें के बावजूद टेस्ट में नेगेटिव आना। आंकड़ो के हिसाब से ऐसे 30 प्रतिशत मामले हैं, जिनमें मरीज़ों में साफ तौर पर कोरोना वायरस के लक्षण तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन स्वैब टेस्ट के नतीजे पॉज़ीटिव की जगह नेगेटिव आ रहे हैं।

डॉक्टर्स भी इस तरह की नतीजों से परेशान हैं। उनका कहना है कि जिन मरीज़ों का लक्षण के बावजूद टेस्ट नेगेटिव आता है, उन्हें कोरोना वायरस के अस्पतालों में भर्ती नहीं किया जा सकता। यहां तक कि प्राइवेट अस्पताल भी कोरोना वायरस जैसे लक्षण और स्कैन को देख उन्हें भर्ती नहीं करते।  

लगातार ऐसे कई मामले देखने के बाद डॉक्टरों ने भी राज्य और केंद्र सरकारों से इस तरह के मरीज़ों के लिए कुछ करने की गुहार लगाई है। सरकार को इस तरह के लोगों के लिए भी इंतज़ाम करने चाहिए। चाहे वो दिशानिर्देश ही क्यों न हों। ताकि उन्हें पता हो, कि ऐसी स्थिति में क्या करना है।

लक्षणों के बावजूद टेस्ट नेगेटिव आए तो क्या करें

जब तक सरकार कुछ ख़ास कदम नहीं उठाती है, तब तक ऐसे मरीज़ों को खुद से सावधानियां बरतने की ज़रूरत है। अगर किसी को सांस लेने में तकलीफ या कोविड-19 के अन्य लक्षण नज़र आ रहे हैं, और सीटी स्कैन में भी कोरोना वायरस की मौजूदगी दिखती है, तो सबसे अच्छा है कि ऐसे लोग डॉक्टरों की निगरानी में अस्पताल में रहें। 

वहीं, अगर टेस्ट में कोरोना नहीं दिखता है, लेकिन आप में हल्के लक्षण दिख रहे हैं, तो सबसे अच्छा है कि खुद को घर पर बंद कर लें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें। साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें कि आप अनजाने में इस ख़तरनाक वायरस से दूसरों को संक्रमित न करें। 

Posted By: Ruhee Parvez

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