नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। कोरोनावायरस महामारी ने लोगों की सांसों की रफ्तार तक धीमी कर दी है। कोरोनावायरस की दूसरी लहर देश में लोगों को बेहद परेशान कर रही है। इस लहर में कोरोनावायरस से पीड़ित लोगों को ऑक्सीजन कम होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ऑक्सीजन सपोर्ट के अभाव में मरीज़ की जान भी जा सकती है। मरीज़ों का बढ़ता आंकड़ा और ऑक्सीजन की बढ़ती डिमांड से अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर की भारी कमी देखी जा रही है। ऑक्सीजन की भारी कमी की वजह से यह बीमारी लोगों को और भी ज्यादा डरा रही है। कोरोना की दूसरी लहर में मरीज़ों को सबसे ज्यादा दिक्कत सांस लेने में हो रही है। उनका ऑक्सीजन लेवल कम होता जा रहा है जिसकी वजह से अस्पताल में भर्ती होने की नौबत तक आ रही है।

ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल कम होना:

इस मुश्किल दौर में यह समझना जरूरी है कि सांस लेने में कठिनाई और ऑक्सीजन लेवल में कमी एक समस्या जरूर है मगर यह जरूरी नहीं है कि लोगों को जल्दी हॉस्पिटलाइज कर दिया जाए। किसी इंसान को हॉस्पिटलाइज तब किया जाता है जब उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल एकदम कम हो जाता है।

क्या है ऑक्सीजन सैचुरेशन?

ऑक्सीजन सैचुरेशन का मतलब है की लंग्स द्वारा शरीर के दूसरे अंगों में भेजे जा रहे खून में ऑक्सिजनेटेड हीमोग्लोबिन की कमी होना। जिस इंसान की रीडिंग 94 से ऊपर है उसे हेल्दी समझा जाता है। ‌कोविड-19 के वजह से लोगों के सांस लेने में कठिनाई हो रही है इसके साथ लंग्स और चेस्ट कैविटी में इन्फ्लेमेशन की समस्या देखी जा रही है जिसकी वजह से शरीर में ऑक्सिजनेटेड खून की सप्लाई में प्रभाव पड़ रहा है।

ऑक्सीजन लेवल कितना होना चाहिए?

अगर SpO2 लेवल 94 से 100 के बीच में है तो इसका मतलब कि वह‌ इंसान हेल्दी है। अगर रीडिंग 94 से नीचे है तो यह हाइपोक्सेमिया की समस्या का रूप ले सकता है। और अगर रीडिंग 90 से नीचे है तो यह संकेत है कि आपको मेडिकल ट्रीटमेंट की आवश्यकता है।

ऑक्सीजन लेवल कम होने के लक्षण:

सांस लेने में कठिनाई और चेस्ट पेन यह सभी ऑक्सीजन लेवल कम होने के लक्षण हैं। कुछ मरीजों में ऑक्सीजन लेवल में उतार-चढ़ाव और सांस लेने में कठिनाई रेस्पिरेट्री इनफेक्शन, ऑक्सीजन लेवल में कमी, शरीर के अंगों पर प्रभाव और अंदरूनी कार्यप्रणाली को क्षति पहुंचा सकता है। इससे एक्यूट रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम भी हो सकता है जो खतरे की घड़ी की तरफ इशारा करता है।

अगर ऑक्सीजन लेवल 91 हो जाए तब क्या करें?

अगर किसी इंसान का ऑक्सीजन लेवल 91 हो जाए उसे ध्यान देने की आवश्यकता है। घर में ऑक्सीजन थेरेपी और प्रोन ब्रीदिंग से ऑक्सीजन लेवल में सुधार किया जा सकता है। लेकिन अगर ऑक्सीजन लेवल एक-दो घंटे के लिए ऊपर नीचे या फिर एक ही लेवल पर अटका है तो इंसान को तुरंत मेडिकल सपोर्ट लेना चाहिए। ‌ जिन लोगों को पहले से ही रेस्पिरेट्री प्रॉब्लम है या फिर जो लोग बूढ़े हैं और लंग कॉम्प्लिकेशन से गुजर रहे हैं उन्हें देखरेख की आवश्यकता सबसे पहले है।

नीले होंठ और चेहरे की रंगत उड़ जाना:

होंठ नीले तब पड़ जाते हैं जब शरीर में ऑक्सीजन लेवल बहुत कम हो जाता है। अगर शरीर में आवश्यकतानुसार ऑक्सिजनेटेड ब्लड है तो इंसान के होठ लाल और गुलाबी रंग के होते हैं। अगर शरीर में ब्लड ऑक्सीजन का लेवल एकदम नीचे है तो इससे होंठ नीले हो जाएंगे और त्वचा की रंगत उड़ जाएगी। इसके साथ हमारी त्वचा एकदम ठंडी हो जाएगी।

ऑक्सीजन में कमी होना और चेस्ट या लंग्स पेन होना:

पेशंट के ऑक्सीजन लेवल में लगातार कमी होना एक खतरे की घंटी है। इस समस्या को घर पर रहकर भी संभाला जा सकता है लेकिन अगर मरीजों को इसके साथ सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, लगातार सीने में दर्द और प्रैशर, खांसी, बेचैनी और सर दर्द की समस्या है तो उससे अस्पताल अवश्य जाना चाहिए।

उलझन और होश खोना:

जब ऑक्सीजन लेवल में कमी होती है तो हमारे दिमाग में भी ब्लड फ्लो कम हो जाता है जिससे कई न्यूरोलॉजिकल फंक्शनिंग पर प्रभाव पड़ता है। इस वजह से लोगों को अक्सर उलझन, प्रलाप, होश खोना, चक्कर आना, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होना और देखने में परेशानी होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में लोगों को जगने में तथा उठने में भी दिक्कतें हो सकती हैं। यह सभी स्थितियां इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि उन्हें मेडिकल सपोर्ट की जरूरत है।

                                   Written By: Shahina Noor

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