क्या आप जानते हैं कि जब आप दूध या जूस का कार्टन खरीदते हैं तो आप एक ओर खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं, तो दूसरी ओर पर्यावरण के पक्ष में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हैं? Tetra Pak, एक ऐसी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की सेवा देने वाली कंपनी है, जिस पर Amul, Karnataka Milk Federation, Nestle और Dabur जैसे सभी बड़े ब्रांड्स का भरोसा है। यह सालों से अपनी पैकेजिंग के जरिए लोगों तक सुरक्षित और पौष्टिक फूड पहुंचा रही है, और पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में भी 16 साल से अपना योगदान देती आ रही है। इन मुद्दों पर बात करने के लिए हाल ही में हमारी टीम ने जयदीप गोखले से बात की। जयदीप गोखले Tetra Pak एशिया पैसिफिक के वाइस प्रेसिडेंट सस्टेनेबिलिटी- हैं। जयदीप 1996 से Tetra Pak से जुड़े हुए हैं और इन्होंने कंपनी को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पढ़िये बातचीत के अंश -   

सवाल : फूड सेफ्टी और पर्यावरण को लेकर Tetra Pak का क्या उद्देश्य है? 

जवाब: हमारा मकसद ऐसी फूड चेन स्थापित करना है जो ज्यादा सुरक्षित हो। इसको लेकर हम हर स्तर पर काम कर रहे हैं। हमने प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के लिए Ultra High Temperature (UHT) और एसेप्टिक पैकेजिंग तकनीक अपनाई है, जो फूड प्रोडक्ट को कई दिनों तक सुरक्षित रखती है, वो भी बिना रेफ्रीजिरेशन और प्रिजर्वेटिव्स के। प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के बाद हमारे कस्टमर, यानी सभी ब्रांड्स जिन्हें आप सब पहचानते हैं, इन   पैकेट्स को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाते हैं। इसमें बड़े-छोटे शहर और दूरदराज के इलाके शामिल हैं। इसके अलावा, इन पैकेट्स को देश की उन सीमाओं तक भी पहुंचाया जाता है, जहां हमारी सेना तैनात है। यही नहीं, इसमें इस्तेमाल किया जाने वाला कार्टन 75% तक पेपर का बना होता है और कार्टन के हर भाग को रीसाइकिल किया जा सकता है। जिससे कचरे के निपटान में भी मदद मिलती है। हमारा काम केवल प्रोसेसिंग और पैकेजिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण के हित में इस्तेमाल किए गए पैकेट्स या कार्टन की हम रीसाइक्लिंग में भी मदद करते आये हैं और करते रहेंगे। 

सवाल:  इस महामारी के चलते फूड सेफ्टी की अहमियत पहले से कहीं ज्यादा सामने आई है। इस पर आपका क्या कहना है? 

जवाब: वर्तमान परिस्थिति हमें यह याद दिला रही है कि खाद्य सुरक्षा के मापदंड़ों को बढ़ाने की जरूरत है। प्रोक्योरमेंट से प्रोसेसिंग और पैकेजिंग तक खाद्य सुरक्षा की अहमियत इतने स्पष्ट रूप से शायद ही महसूस की गयी हो। यह समझने की जरूरत है कि खाद्य की बर्बादी न हो और उपभोक्ता तक प्रोडक्ट सुरक्षित पहुंचे। फूड देश के कोने-कोने में...बॉर्डर से लेकर छोटे-छोटे कस्बों तक पहुंच पाये यही हमारा लक्ष्य है। खासकर आज के समय में ऐसे बहुत  उदाहरण है जहां सभी चुनौतियों के बावजूद दूध के कार्टन आर्मी तक पहुंचाएं जा रहे हैं। छोटे शहरों के उपभोक्ता भी इसे खरीद पा रहे हैं। क्योंकि हमारी एसेप्टिक पैकेजिंग और प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी को कोल्ड चेन की जरूरत नहीं होती। फूड सेफ्टी, फूड सिक्योरिटी, फूड वेस्ट और जलवायु प्रभाव के नजरिए से इस टेक्नोलॉजी के महत्व को समझना जरूरी है।

सवाल: वर्तमान परिस्थिति हमें पर्यावरण के बारे में क्या सीख देती है? 

जवाब: वर्तमान में जिस संकट का सामना पूरी दुनिया कर रही है, दरअसल यह हम सबके लिए एक सीख है। यह दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि हम पर्यावरण को लेकर सतर्क हो जाएं। लॉकडाउन में हमने पर्यावरण पर सकारात्मक असर होते हुए देखा। देश की लगभग सभी नदियों की शुद्धता और गुणवत्ता में काफी सुधार आया, गाड़ियां और कारखाने के न चलने से शहरों में प्रदूषण कम हुआ है। ये सभी चीजें हमें बता रही है कि हमें पर्यावरण को लेकर जागरूक होना होगा और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना होगा। बात चाहे उपभोक्ता की हो या फिर इंडस्ट्री की। हम सभी को पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करना होगा। Tetra Pak भी एक इंडस्ट्री का हिस्सा है और इसने भी पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कई पहल किए हैं और अपने कार्टन की रीसाइक्लिंग बढ़ाने के लिए 16 साल से मेहनत कर रही है, तब से जब न तो कोई नियम था न ही इतनी जागरुकता। यह एक सामूहिक ज़िम्मेदारी है| हम आशा करते हैं कि बाकी इंडस्ट्री प्लेयर और अन्य हितधारक भी एकजुट होकर इस दिशा में काम करेंगे।   

सवाल: क्या रीसाइक्लिंग काफी है? कई कंपनियां आज रीसाइक्लिंग से आगे बढ़कर चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) की बात कर रही हैं। आपका इस विषय पर क्या कहना है? 

जवाब: बिल्कुल सही कहा आपने। सिर्फ रीसाइक्लिंग पर्यावरण की समस्या का हल नहीं है। हमें यह भी सोचना होगा कि जो प्रोडक्ट हम इस्तेमाल करते हैं, उसे बनाने के लिए कच्चा माल कहां से आता है?  क्या यह जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) से बने होते हैं, जोकि गैर-नवीकरणीय संसाधन (Non-Renewable Resource) हैं या ऐसे सामग्री से जो नवीकरणीय (renewable) है। इंडस्ट्री सभी इकाइयों से मिलकर बनती है और खुशी की बात यह है कि कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए सभी ने खास तौर पर ब्रांड मालिकों और निर्माताओं ने अपने लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य को सेट किया हुआ है। हम भी इसी दिशा में काम कर रहे हैं।   

हम कानून के साथ ही नहीं, बल्कि उससे आगे बढ़कर काम कर रहे हैं। हम सिर्फ चक्रीय ही नहीं ‘कम कार्बन वाली’ चक्रीय अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, हमारे कार्टन पहले से ही लगभग 75% नवीकरणीय स्रोत (Renewable Sources) से बने हैं यानी पेपर से। हमारा लक्ष्य है कि जो बाकी 25% है, वो भी नवीकरणीय संसाधन से आएं और हमारा पैकेज 100% नवीकरणीय के नजदीक पहुंच जाए। इससे हम जीवाश्म ईंधन बचा पाएंगे और पैकेज भी ज्यादा रीसाइकिल हो पाएगा। इसके अलावा रीसाइक्लिंग के इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना होगा। कार्ट्न्स रीसाइकिल हो सकते हैं और हमारा उद्देश्य है कि कोई कार्टन बेकार न हो। यह एक लंबी यात्रा है और हम लगातार इस पर काम कर रहे हैं।  

सवाल : सरकार इसमें क्या मदद कर सकती है? 

जवाब : बहुत ही अच्छा सवाल है। बात जब पर्यावरण संरक्षण की हो तो, सबको एक साथ एक मंच पर आना चाहिए। सरकार, फूड इंडस्ट्री, पैकजिंग इंडस्ट्री, रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री, NGOs और उपभोक्ता इसमें महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। यहां उपभोक्ताओं की भूमिका बहुत ही अहम है। उन्हें वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर जागरूक होना पड़ेगा। इसकी शुरुआत वो अपने घर से कर सकते हैं। उपभोक्ता गीले कचरे को अलग रखें और सूखे कचरे जैसे कि कार्टन, पेपर वेस्ट आदि को अलग रखें। ऐसा करने से कचरे को बेहतर तरीके से निस्तारण करने में मदद मिलेगी। पैकजिंग इंडस्ट्री को भी चाहिए कि वो ऐसे पैकेट्स या कार्टन्स बनाए, जिसे फेंकने की बजाय उनकी रीसाइक्लिंग की जा सके। प्रोसेसिंग और पैकेजिंग कंपनी होने के नाते Tetra Pak इन बातों का पूरा ध्यान रखती है। आपका सवाल है कि सरकार इसमें कैसे मदद कर सकती है? देखा जाए तो हमारे देश में नियम पहले से ही हैं, लेकिन उसे लागू करने के लिए सुधार की जरूरत है। हमारे देश में सबसे बड़ी चुनौती यही है। हर साल 63 मिलियन टन ठोस अपशिष्ट (म्युनिसिपल सोलिड वेस्ट) इकट्ठा होता है। इसमें से जैविक या रीसाइकिलेबल सामग्री को लैंडफिल साइट तक पहुंचाना ही नहीं चाहिए, बल्कि घर पर ही इसका समाधान वेस्ट सेग्रीगेशन के जरिए हो जाना चाहिए, जिससे यह खाद में बदल जाए या रीसाइकिल हो जाए। इतने बड़े देश में यह करना आसान नहीं है, पर जरूरी है।   

एकरूपता और सामंजस्य दो ऐसी चीजें हैं, जहां पर सरकार हमारी मदद कर सकती है। पर्यावरण संरक्षण के मामले में अगर सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश एक जैसे नियम बनाएंगे तो मतभेद कम होगा और एक दिशा में पर्यावरण सुरक्षा को लेकर काम होगा। साथ में, कई शब्दों या टर्म्स का अर्थ स्पष्ट नहीं होता है। जिससे कई कंपनियों के लिए नियम को समझना और उसका पालन करना बहुत ही कठिन हो जाता है। इसलिए इस व्यवस्था को सरल और स्पष्ट बनाना बहुत जरूरी है। इससे सभी हितधारक अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह से समझ पाएंगे। हर कंपनी नियमों का पालन करके सही तरह से काम करना चाहती है इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन सरकार को भी इसमें हमारी मदद करनी होगी।   

सच पूछिये तो, 2018 में हमने AARC (Action Alliance for Recycling Beverage Cartons) को स्थापिता किया, जिससे कि हम और बाकी ब्रांड्स जैसे कि Parle Agro, Dabur आदि साथ मिलकर काम कर सकें। देश और विदेश दोनों दृष्टिकोण से सभी कंपनियों के पास सामूहिक रूप से पर्याप्त जानकारी है, और AARC ने सरकार के कहने पर एक ड्राफ्ट EPR (Extended Producer Responsibility) फ्रेमवर्क भी बनाया है और अपनी जानकारी उनके साथ साझा की है। इस तरह सरकार और उद्योग मिलकर काम करें तो हम सफल हो पाएंगे।    

सवाल: आखिर में, उपभोक्ताओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?  

जवाब: उपभोक्ताओं को मैं यही कहूंगा कि सही चुनें, सेफ्टी और क्वालिटी को लेकर सतर्क रहें। कचरे को इधर-उधर न फेकें। गीले कचरे को एक जगह रखें ताकि उससे खाद बनाया जा सके। वहीं रीसाइक्लिंग के लिए सूखे कचरे को अलग डस्टबिन में रखें। किसी कानून या किसी के कहने का इंतजार न करें, यह हम सबकी जिम्मेदारी है जिसे हमें समझना होगा।  

 Note - This is Brand Desk content   

Edited By: Rajat Singh