अक्सर कहा जाता है कि हमारी बॉडी में होने वाली ज्यादातर प्रॉब्लम्स की शुरुआत हमारे पेट से होती है, खासकर जब आंतों या डाइजेस्टिव सिस्टम में कोई परेशानी पैदा हो जाती है। इसका ओवरऑल हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ता है। हालांकि, ऐसे कई योगासन मौजूद हैं, जिनके जरिए अपनी आंतों, पेट और डाइजेस्टिव सिस्टम को हेल्दी रखा जा सकता है। आइए जानते हैं उनमें से कुछ के बारे में...

पश्चिमोत्तानासन

इस आसन को करने के दौरान बॉडी आगे की ओर झुकती है, जिससे कब्ज और गैस से बॉडी को राहत मिलती है। इससे बॉडी की चर्बी भी कम होती है और वेट भी कम होता है। इस आसन के दौरान रीढ़ की हड्डी के साथ बॉडी का पिछला हिस्सा तन जाता है, जिसके चलते इसका नाम पश्चिमोत्तानासन पड़ा है।

गहरी सांस के साथ करें ऐसा..

इसको करने के लिए जमीन पर दोनों पैरों को एकदम सीधे फैलाकर बैठ जाएं। दोनों पैरों के बीच में दूरी न हो और पैरों को सीधा रखें। गर्दन, सिर और रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखें। इसके बाद अपनी दोनों हथेलियों को दोनों घुटनों पर रखें। अब सिर और धड़ को धीरे से आगे की ओर झुकाएं और अपने घुटनों को बिना मोड़े हाथ से पैरों की उंगलियों को छूने की कोशिश करें। इसके बाद गहरी सांस लें औऱ धीरे-धीरे छोड़ें। सिर और माथे को दोनों घुटनों से छूने की कोशिश करें। इसे लगभग एक मिनट तक करें।

अर्धमत्स्येंद्रासन

एक्सपर्ट्स की मानें तो, डाइजेस्टिव सिस्टम को अच्छा करने के लिए अर्धमत्स्येंदासन एक बेहतर पोज है। इसको करने से पेट के अंगों और आंतों की मालिश होती है। इस आसन से बॉडी का डाइजेशन मजबूत होता है। यह लिवर और पैंक्रियाज को भी बेहतर रखता है। इसे करने से आंतों की बीमारी नहीं होती है।

ले लें दंडासन की पोजीशन

मैट पर दंडासन की पोजीशन में बैठ जाएं, रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए बाएं पैर को मोड़ लें और दाएं पैर के घुटने को ऊपर कर लें। अब बाएं पैर को जमीन पर रख दें। दाएं हाथ को बाएं पैर के ऊपर लाएं और बाएं पैर के अंगूठे को पकड़ लें। इसके बाद सांस को धीरे-धीरे छोड़े। सांस को छोड़ते वक्त बॉडी को जितना हो सके उतना मोड़ लें। इसे दूसरी ओर से करें, तब इसका एक सर्किल पूरा होगा।

Pic credit- ps_yogasana/Instagram

Edited By: Priyanka Singh