अक्सर लोग रोते बच्चों को बहलाने के लिए उनके हाथों में मोबाइल पकड़ा देते हैं, पर यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। इससे थोड़ी देर के लिए बच्चा भले ही चुप हो जाए पर इसके दूरगामी परिणाम बहुत नुकसानदेह होते हैं। हाल ही में अमेरिका स्थित हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक गहन अध्ययन के बाद अभिभावकों को यह चेतावनी दी है कि इससे बच्चों के स्वभाव में स्थायी किस्म का चिड़चिड़ापन आ जाता है।

मेंटल हेल्थ के लिए खराब है बहुत ज्यादा गैजेट्स का इस्तेमाल

शोधकर्ताओं ने 2 से 4 साल तक के 269 बच्चों पर यह अध्ययन किया है। उन्होंने बच्चों के स्मार्टफोन या लैपटॉप से उस कार्टून शो को स्थायी तौर पर हटा दिया, जिसे वे ज्यादा देख रहे थे। उस दौरान माता-पिता से यह सवाल पूछा गया कि वे अपने रोते बच्चे को शांत करने के लिए टीवी, आईपैड, स्मार्टफोन और वीडियो गम आदि पर कितने निर्भर हैं। अधिकतर पेरेंट्स ने यह स्वीकार किया कि वे इसके लिए गैजेट्स की ही मदद लेते हैं। खासतौर पर ज्यादा चिड़चिड़े बच्चों को बहलाने के लिए उन्हें कोई दूसरा तरीका समझ नहीं आता, लेकिन यह बच्चों के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होता है। इसलिए अगर कभी छोटे बच्चों को गुस्सा आए तो उनके हाथों में मोबाइल देने के बजाय प्यार भरी बातचीत से उन्हें समझाने की कोशिश करें।

एक्सपर्ट की राय

यह स्टडी बिल्कुल सही है। स्मार्टफोन की वजह से आजकल बच्चे अनिद्रा और ओबेसिटी जैसी समस्याओं के शिकार हो रहे हैं। जिससे उनमें चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और कमजोर स्मरण शक्ति जैसे लक्षण सख्त नजर आते हैं।

(डॉ. मनीष मनन, एचओडी पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट, पारस हॉस्पिटल, गुरुग्राम से बातचीत पर आधारित) 

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Edited By: Priyanka Singh