सफर करते हुए अधिकतर लोग झपकी लेते नजर आ जाते हैं या फिर कभी गौर करें तो बेवजह ही आपकी सांस तेज चलने लगती है। दिनभर में कई बार आपकी हृदयगति बेवजह तेज या कम हो जाती है, लेकिन स्थिर नहीं रह पाती है। सुबह उठने के साथ ही तरोताजा महसूस करने की बजाय थकान होती है। तीस-चालीस की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते सीढिय़ों से एक मंजिल भी चढऩे पर हांफने लगते हैं। ये लक्षण इस बात के हैं कि हम स्वस्थ दिनचर्या का पालन नहीं कर रहे हैं।

अगर संक्रामक और जन्मजात होने वाली बीमारियों को छोड़ दिया जाए, तो ज्यादातर जितने भी रोग होते हैं, उनकी वजह हमारा खानपान, रहने का ढंग, उठने और सोने का समय यहां तक कि हम कैसा सोचते हैं इन सब बातों पर आधारित होता है। इनका ध्यान रखने से तमाम बीमारियों से बचा और खुद के साथ-साथ परिवार के सदस्यों को स्वस्थ रखा जा सकता है।

80 फीसदी लोग बीमार होने की सभी वजहों को जानने के बाद भी सही आदतों को नहीं अपना पाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि 40 की उम्र होते-होते तीन से चार दवाएं अनचाहे लेनी पड़ जाती हैं। कुछ लोग केवल यह सोचकर निश्चिंत रहते हैं कि जब बीमार पड़ेंगे, तो देखा जाएगा। पहले से इतनी चिंता क्यों की जाए, लेकिन दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल और इनके कम होते असर को देखते हुए अब बचाव ही एकमात्र विकल्प रह जाएगा।

विश्र्व स्वास्थ्य संगठन ने बहुत पहले ही इस बात के लिए चेताया था कि अगली पीढ़ी की एंटीबॉयोटिक दवाएं अभी बाजार में उपलब्ध नहीं हैं और वर्तमान एंटीबॉयोटिक दवाएं तेजी से असरहीन हो रही हैं। विशेषज्ञों की मानें तो एलोपैथी दवाओं पर निर्भरता कम करना ही आने वाले समय में आपको बीमार होने से बचा सकेगा।इसके लिए पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर भी विश्र्वास करना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए बीमार होने का इंतजार न करें, बल्कि कुछ आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी और यहां तक कि योग-साधना भी स्वस्थ जीवन के लिए दिनचर्या को सुधारने की बात करता है।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि बेहद छोटी, पर अहम बातों को ध्यान में रखकर अपने स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल की जा सकती है और बीमारियों से खुद को काफी हद तक दूर रखा जा सकता है। देश के कुछ जाने-माने विशेषज्ञ चिकित्सकों का पैनल (जिसमें एलोपैथ, होम्योपैथ व आयुर्वेद के विशेषज्ञ शामिल हैं) खासतौर पर हमारे पाठकों को बता रहा है कि उम्र के विभिन्न पड़ावों पर हम कब और कैसे अपनी आदतों को सुधार कर और कुछ बातों का ध्यान रखकर सेहतमंद बने रह सकते हैं..30 से 39 साल की उम्र में।

वैसे तो आजकल बीमार होने की कोई उम्र नहीं है। बावजूद इसके तीस साल की उम्र होने तक माइग्रेन या फिर आंखों की रोशनी कम होने जैसी कई तकलीफें उत्पन्न हो जाती हैं। इनसे बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

1. साल में एक बार स्वास्थ्य जांच जरूर करा लें। अगर सिगरेट और शराब का सेवन करते हैं तो ईसीजी और एलएफटी या लिवर की जांच जरूरी है।

2. हफ्ते में कम से कम तीन दिन एरोबिक व्यायाम को नियमित दिनचर्या में शामिल करें।

3. आठ से दस घंटे की भरपूर नींद लें।

4. खाने में फाइबर और प्रोटीन को शामिल करें।

5. दिन में दो घंटे से अधिक सोशल नेटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल न करें।

6. हफ्ते में कम से कम एक दिन मोबाइल बंद रखें।

7. साल में एक बार पंचकर्म क्रिया कराएं (यह शरीर के सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल देती है)। गरिष्ठ भोजन से दूर रहें।

8. प्रिजरवेटिव या संरक्षित खाद्य पदार्र्थों को खाने में बिल्कुल शामिल न करें। तीस साल की उम्र तक अधिकतर लोग तनाव के शिकार हो जाते हैं।

9. दवाओं की जगह आयुर्वेद में शिरोधारा से तनाव का शत-प्रतिशत इलाज संभव है। फाइबर और प्रोटीनयुक्त आहार का अधिक सेवन करें।

10. ऑफिस में लंबे समय तक कुर्सी पर न बैठें। एक से दो घंटे के बीच पंजों के ऊपर खड़े होने के व्यायाम को किया जा सकता है। अधिक काम के बीच पॉवर नैप भी कारगर है।

40 से 49 साल की उम्र में..40 से 49 साल की उम्र में अगर हाई ब्लड प्रेशर अनियंत्रित है तो यह स्थिति कालांतर में दिल की बीमारी की वजह बन सकती है। इस उम्र में व्यायाम के साथ ही योग को भी दिनचर्या में शामिल करना बेहद जरूरी हो जाता है। इन सुझावों पर अमल करें। 

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