डा. रमन कुमार। गंभीर शारीरिक व मानसिक विकारों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित कर पाना कठिन है कि किस उम्र में कौन सी बीमारी हो सकती है। बदली जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, असंयमित खानपान व पर्यावरणीय कारक जैसे कई कारण इसके लिए जिम्मेदार हैं। खानपान के ढेरों विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन हमें उन्हीं का चयन करना चाहिए जो हमारे स्वस्थ्य के लिए बेहतर हों। निरोगी रहने के लिए सबसे आवश्यक है घर पर बने पोषक और सुपाच्य भोजन का सेवन करना। भोजन ऐसा हो जिसमें फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज संतुलित मात्रा में शामिल हों।

रिफाइंड व आटे के बजाय चोकर युक्त आटा खाएं। इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। गेहूं के आटे में जौ, बाजरा, जई, चना आदि मिला लें। यह मल्टीग्रेन आटा पचने में आसान होता है और रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखता है। अधिक कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें जैसे चीनी, आलू, चावल, ब्रेड आदि का सेवन सीमित मात्रा में करें। तली-भुनी चीजों, लाल मांस, चाय और काफी का अधिक सेवन भी सेहत खराब करता है। तंबाकू व अल्कोहल के सेवन से कई स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। जंक फूड व फास्ट का सेवन वजन अनियंत्रित करता है और कई रोगों का कारण भी बनता है।

नियंत्रित रहे कैलोरी

आपको प्रतिदिन कितनी कैलोरी की आवश्यकता है, यह उम्र, लिंग, लंबाई, भार और शारीरिक सक्रियता पर निर्भर करता है। स्वस्थ पुरुष को प्रतिदिन 2000-2500 और महिलाओं को 1800-2200 कैलोरी की आवश्कता होती है। यदि आप ओवर ईटिंग करेंगे तो अतिरिक्त कैलोरी वसा में बदलने के बाद शरीर के विभिन्न भागों में जमा होकर वजन अनियंत्रित करेगी और मोटापा कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका को बढा देता है।

शारीरिक सक्रियता को बनाएं रखें

स्वास्थ्य बिगडने का कारण बढती उम्र नहीं, शारीरिक निष्क्रियता है। इसलिए सप्ताह में कम से कम पांच दिन तीस मिनट व्यायाम, वाक, स्विमिंग या साइकलिंग के लिए जरूर निकालें, जिससे पसीना निकले और शरीर के विषाक्त तत्व बाहर हो जाएं। जब आप शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं तो न केवल शरीर में रक्त का संचार बढ़ता है, बल्कि एंडोरफिन का स्रावण भी होता है, जो तनाव को कम करने में मदद करता है। नियमित व्यायाम मोटापे से भी बचाता है।

अधिक देर तक बैठने से बचें

30 मिनट से अधिक बैठने से मेटाबालिज्म 90 फीसद धीमा हो जाता है। शोधों के अनुसार, दो घंटे तक लगातार बैठे रहने से अच्छे कोलेट्राल का स्तर 20 फीसद तक कम हो जाता है। इसके साथ ही लगातार बैठने से टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग व कैंसर की आशंका बढती है। अगर आप हर आधे घंटे में केवल पांच मिनट का ब्रेक लें और खड़े हो जाएं तो शरीर की आंतरिक सक्रियता फिर से सामान्य होने लगती हैं। घर हों या आफिस, नियमित अंतराल पर काम को कुछ मिनट का ब्रेक जरूर दें।

शारीरिक संकेतों को नजरअंदाज न करें

हमें जब कोई शारीरिक समस्या होती है तो शरीर कुछ संकेत अवश्य देता है, लेकिन हममें से अधिकतर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। यदि कुछ ऐसा हो रहा हो रहा है, जो पहले कभी न हुआ हो या कोई असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हों तो तत्काल चिकित्सक को दिखाएं। यह असामान्य लक्षण मामूली समस्याओं के कारण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन कई बार ये गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकते हैं।

समय पर जांच व उपचार है महत्वपूर्ण

किसी भी बीमारी की शुरुआत तो मामूली होती है, लेकिन लोग अक्सर अपनी लापरवाही से उसे गंभीर बना लेते हैं। कैंसर व हृदय रोग जैसी घातक बीमारियां जो विश्वभर में मृत्यु के तीन सबसे कारणों में से हैं, इनकी भी यदि समय पर जांच व उपचार हो जाए तो गंभीर स्थिति बनने से रोका जा सकता है। कैंसर की शुरुआत शरीर के एक भाग या अंग से होती है, लेकिन यदि समय रहते उपचार नहीं मिलता तो यह शरीर के अन्य भागों व अंगों में फैल जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कैंसर के कुल मामलों और उससे होने वाली मौतों का अनुपात विश्व में भारत में सबसे अधिक है, क्योंकि हमारे देश में कैंसर के अधिकतर मामले एडवांस स्टेज में पता चलते हैं, जो असमय मौत का कारण है। युवाओं हदय रोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसका कारण खानपान की गलत आदतें व निष्क्रिय जीवनशैली है। इसलिए यदि संयमित खानपान व अनुशासित जीवनशैली के साथ जीवन बिताया जाए, रूटीन बाडी टेस्ट कराए जाएं और शारीरिक संकेतों को नजरअंदाज न किया जाए तो निश्चित ही सेहतमंद जीवन जिया जा सकता है।

pic credit: freepik

Edited By: Sanjay Pokhriyal

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