नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस के तीसरे लहर से गुजर रही है। इसके चलते PPE (personal protective equipment) यानी व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों दस्ताने, मास्क, फेसशील्ड, चश्मा और रबर के जूते की कमी महसूस हो रही है। इस वायरस से रोजाना मरीजों की संख्या में भी बड़ी तेजी से इजाफा हो रहा है। इसके लिए चिकित्सा जगत में चिंता की लकीर उभर आई है। इस समस्या से निपटने के लिए शोधकर्ता और वैज्ञानिक PPE किट को रियूज यानी पुनः इस्तेमाल करने पर गहन अधययन कर रहे हैं। कई शोध हो चुके हैं और कई शोध जारी है। इनमें सर्जिकल मास्क के पुनः इस्तेमाल करने के तरीके बताए गए हैं। आइए जानते हैं कि शोध क्या कहती है-

जैसा कि हम सब जानते हैं कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने और प्रसार को फैलने से रोकने के लिए मास्क पहनना, सामाजिक दूरी का पालन करना और साफ़-सफाई जरूरी है। वहीं, सर्जिकल मास्क का इस्तेमाल उपचार के दौरन डॉक्टर और नर्स करते हैं। हालांकि, सर्जिकल मास्क का केवल एक बार इस्तेमाल किया जाता है। इस वजह से भारी मात्रा में सर्जिकल मास्क को नष्ट किया जाता है। साथ ही सर्जिकल मास्क की कमी भी महसूस हो रही है। इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है, क्योंकि सर्जिकल मास्क प्लास्टिक का बना होता है।

इसके लिए US Food and Drug Administration (FDA) ने आपातकालीन परिस्थितियों में N95 मास्क के पुनः इस्तेमाल के लिए 'हाइड्रोजन परॉक्साइड वाष्पीकरण करने की अनुमति दी है। जबकि The Lancet में छपी एक शोध के अनुसार, लगातार सात दिनों तक सर्जिकल मास्क को किसी पेपर में रखने के बाद कोरोना वायरस का खतरा महज 0.1 प्रतिशत रहता है। इस शोध को कई वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है। इस शोध में सर्जिकल मास्क को पुनः इस्तेमाल करने के उपाय को बताया गया है। इस शोध के अनुसार, किसी पेपर के लिफाफे में सर्जिकल मास्क को सात दिनों के लिए बंद करके रख दें। उसके बाद इस मास्क का यूज़ करें।

डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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