वाशिंगटन, एजेंसी। यूनिवर्सिटी आफ ईस्टर्न फिनलैंड व तुर्कू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के एक हालिया अध्ययन ने उम्रदराज कर्मचारियों की नींद संबंधी परेशानियों के बारे में बेहतर समझ पैदा की है। अध्ययन में फिनलैंड के 2,771 नगर निगम कर्मचारियों को शामिल किया गया, जिनकी सेवानिवृत्ति नजदीक थी। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार शोधकर्ताओं ने इसका परीक्षण किया कि मानसिक व शारीरिक कार्य स्थितियां, जीवन की तनावपूर्ण परिस्थितियां व कार्यस्थल का संतुलन किस प्रकार उम्रदराज लोगों की नींद संबंधी परेशानियों से संबंधित है।

करीब 70 प्रतिशत महिलाओं में अनिद्रा के लक्षण पाए गए

अध्ययन निष्कर्षो के आधार पर शोधकर्ताओं ने बताया कि दफ्तर का कार्य व उससे अलग का तनाव, दोनों उम्रदराज लोगों में अनिद्रा के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। एक अन्य अध्ययन में फिनलैंड के 60-69 वर्ष के आधे पुरुषों व करीब 70 प्रतिशत महिलाओं में अनिद्रा के लक्षण पाए गए।

अलग-अलग घटकों की पहचान की गई, जो मानसिक तनाव से हैं जुड़े

यूनिवर्सिटी आफ ईस्टर्न फिनलैंड में मनोविज्ञान की प्रोफेसर मारियाना वर्टेनन के अनुसार, 'हमने अपने अध्ययन में चार अलग-अलग घटकों की पहचान की जो मानसिक तनाव से जुड़े हैं। इनमें शारीरिक श्रम का भार व शिफ्ट में काम करना, मनोसामाजिक कार्यभार, समाज व पर्यावरण संबंधी प्रतिकूल परिस्थितियां तथा जीवन व स्वास्थ्य से जुड़ी विपरीत स्थितियां शामिल हैं। समाज व पर्यावरण संबंधी प्रतिकूल परिस्थितियां अकेलापन अथवा कम लोगों से मिलने-जुलने से संबंधित हैं। जीवन व स्वास्थ्य से जुड़ी विपरीत स्थितियां किसी के जीवन में तनाव या अनौपचारिक देखभाल से संबधित हैं।'

उन्होंने कहा कि अगर कर्मचारी काम के अलावा अन्य बातों को लेकर तनाव में हो, तो उसे नींद से जुड़ी परेशानियां ज्यादा हो सकती हैं।

सभी को नींद लेना है बेहद जरूरी

गौरतलब है कि आज की भागमभाग जीवन में नींद लेना हम सभी के लिए बेहद लाभदायक है। नींद न पूरी होने की वजह से शरीर के अंदर कई तरह की बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं।

Edited By: Dhyanendra Singh Chauhan