नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संकट से गुजर रही है और संक्रमितों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हो रही है। इससे चिकित्सा विज्ञान में हलचल मची हुई है। इसके लिए दुनिया भर में एक साथ कई शोध किए जा रहे हैं, जिनमें कोरोना वायरस के वैक्सीन पर काम किया जा रहा है।इसी क्रम में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक अच्छी खबर दी है। इस रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सितंबर से इस वैक्सीन के आशाजनक परिणाम आने लगेंगे। इस वैक्सीन की मैन्युफैक्चरिंग भी हो रही है।

परिणाम उत्साहजनक रहे हैं

टीम को लीड कर रही वैक्सीनोलॉजी की प्रोफेसर सारा गिलबर्ट ने बताया-" हमने 18 से 55 वर्ष की उम्र के 500 वालंटियरों पर शुरुआती और मध्य चरण के नियंत्रित परीक्षण किए हैं, जिनके परिणाम उत्साहजनक रहे हैं"। जबकि अंतिम चरण में हम इसकी संख्या और उम्र में भी विस्तार करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि हमारी कोशिश है कि सितंबर तक कम से कम कुछ वैक्सीन तैयार हो जाएं। हालांकि, एक साथ सभी जगहों पर वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पाएगा, लेकिन अगर अभी वैक्सिंग की मैन्युफैक्चरिंग अधिक मात्रा में करते हैं तो आने वाले समय में यह सभी के लिए उपलब्ध हो जाएगा।

इस वैक्सीन का नाम ChAdOx1 nCoV-19 है

इस ट्रायल में 500 लोगों को 5 टीमों में बांटा गया है, जिन पर 6 महीने तक बारीकी से निगरानी रखा जाएगा। इस ट्रायल में आने के बाद हर एक ग्रुप को टीका दिया जाएगा, उसके चार सप्ताह बाद दूसरा टीका दिया जाएगा। इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य वैक्सीन का प्रभावशाली होना, वालंटियरों की सुरक्षा और इम्यून सिस्टम को मजबूत करना है। इस वैक्सीन का नाम ChAdOx1 nCoV-19 है।

UK नें ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय को सहायता राशि दी है

आपको बता दें कि वैक्सीनोलॉजी की प्रोफेसर सारा गिलबर्ट 1994 से ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में वैक्सीन रिसर्च पर काम कर रही हैं। वहीं, यूनाइटेड किंगडम ने मार्च में कोरोना वायरस वैक्सीन की खोज के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय को 2.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर्स की सहायता राशि दी है।

Posted By: Umanath Singh

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