ल्यूकोरिया की प्रॉब्लम वास्तव में कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन इसके बारे में स्त्रियों के बीच कई भ्रामक धारणाएं प्रचलित हैं। इस वजह से वो इसे गंभीर और कई बार लाइलाज समझ लेती हैं। दरअसल स्त्रियों के वजाइना में ल्यूब्रिकेशन बनाए रखने के लिए सफेद रंग के चिपचिपे पदार्थ का हल्का सिक्रीशन होता रहता है। जो नॉर्मल प्रोसेस है। पीरियड्स या सहवास से पहले होने वाला इसका सिक्रीशन दर्द से बचाव में मददगार होता है, लेकिन कई बार बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन की वजह से भी ऐसा डिस्चार्ज होता है तो ऐसी अवस्था को ल्यूकोरिया कहा जाता है। इसे श्वेत प्रदर के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रॉब्लम की वजह से शरीर में कमजोरी का एहसास भी होता रहता है।

ल्यूकोरिया के प्रमुख लक्षण

- ज्यादा मात्रा में और लंबे समय तक डिस्चार्ज

- खुजली

- जलन

- पेट के निचले हिस्से और कमर में दर्द

- बार-बार टॉयलेट जाना

- आमतौर पर यह डिस्चार्ज सफेद और गंधहीन होता है, पर संक्रमण होने पर इसकी रंगत में बदलाव के साथ बदबू भी आने लगती है।

- चक्कर आना

- आंखों के आगे अंधेरा छाना

- जी मिचलाना आदि।

ल्यूकोरिया की वजहें 

1. पर्सनल हाइजीन की कमी

2. कुपोषण और रक्ताल्पता यानी एनीमिया

3. कमजोर इम्यून सिस्टम

4. ओबेसिटी यानी मोटापा

5. डायबिटीज

6. यूटीआई

7. फंगल या यीस्ट इंफेक्शन की वजह से भी यह समस्या हो सकती है।

बचाव एवं उपचार

- ज्यादा डिस्चार्ज होने पर सर्वाइकल कैंसर की आशंका हो सकती है, ऐसी स्थिति में तीन साल के अंतराल पर पेपस्मीयर टेस्ट कराना जरूरी है।

- संक्रमण होने पर कुछ खास तरह के टेबलेट्स दिए जाते हैं, जिन्हें प्रभावित हिस्से के भीतर रखना होता है।

- अगर इससे कोई लाभ न हो तो खाने के लिए एंटीबायोटिक्स भी दी जाती हैं।

- उपचार के बाद यह समस्या शीघ्र ही दूर हो जाती है।

- कुछ घरेलू उपायों की मदद से भी श्वेत प्रदर का इलाज किया जा सकता है।

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Edited By: Priyanka Singh