गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ और फिट बने रहना बेहद आवश्यक है। फिट बने रहने के लिए योगा करना बहुत फायदेमंद हैं। जिससे मां और बच्चा तो स्वस्थ रहते ही हैं साथ ही डिलीवरी के दौरान भी बहुत ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता।। यह उनकी चिंता को घटाता है और इससे महिला को गर्भावस्था और उनसे बाद भी शांत और चिंतामुक्त रहने में मदद मिलती है। गर्भावस्था के हर चरण में योगा व्यायाम अलग अलग होता है। इसलिए, आपको अपने डाॅक्टर से सलाह लेने के बाद किसी स्वास्थ्य विषेशज्ञ (Fitness Trainer) की निगरानी में योगा करना चाहिए।

योगाभ्यास गर्भावस्था के दौरान होने वाले दर्द और तनाव को दूर करने का बेहतरीन जरिया है। गर्भावस्था के दौरान योगा करने वाली महिलाएं निम्नलिखित समस्याओं में आराम महसूस कर सकती हैंः

• कमर दर्द

• प्रीक्लेम्पसिया जोखिम, या गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेषर

• प्रसव दर्द

गर्भवती महिलाओं के लिए योग मुद्राएं

नीचे ऐसी कुछ योग मुद्राएं बताई गई हैं जिनसे गर्भावस्था संबंधित समस्याओं को कम करने या ताकत बढ़ाने में मदद मिल सकती हैः

कैट टु काउ (Cat to Cow): कमर मोड़ने वाली यह तकनीक कमर दर्द दूर करने के लिए बेहद कारगर है।

गारलैंडः यह डीप स्क्वैट बच्चे को नीचे की ओर उचित स्थिति में लाने में मददगार है।

हैप्पी बेबीः यह योग मुद्रा पीठ की नीचे की मांसपेशियों को आराम दिलाने में मदद करती है। यह उलटी मुद्रा है, इसलिए इसे आजमाने से पहले अपने डाॅक्टर और योगा प्रशिक्षक से सलाह जरूर लें।

लेग आप द वाॅलः इस उलटी मुद्रा से आपके पैरों और एडि़यों में सूजन घटाने में मदद मिल सकती है। इसे करने से पहले अपने डाॅक्टर और योगा प्रशिक्षक से सलाह जरूर लें।

प्लांक्सः इससे पेट के निचले हिस्से को मजबूत बनाने में मदद मिलती है, जो प्रसव और उसके बाद रिकवरी के लिए जरूरी है। प्लांक्स को करना कठिन हो सकता है, क्योंकि गर्भावस्था के बढ़ते चरण में प्रवेश करती हैं, इसलिए अपने आप पर ज्यादा जोर न डालें।

वारियर्सः यह खड़ी मुद्रा संपूर्ण ताकत पैदा करने के लिए की जाने वाली सामान्य प्रक्रियाओं में शामिल है। आप समान समय में कीगल व्यायाम करते पर डबल ड्यूटी भी कर सकती हैं, जिससे प्रसव और बच्चे के जन्म के बाद रिकवरी में मदद मिलती है।

डिलिवरी के बाद योगा, बाद में होने वाले अवसाद को दूर करने में भी मदद करता है, जो कई महिलाओं में गंभीर समस्या होती है। योगा कोर स्ट्रेंग्थ फिर से हासिल करने में मदद कर सकता है, जिससे बच्चे के जन्म से संबंधित पेल्विक फ्लोर की अनियमितताओं का जोखिम कम होता है।

कुछ सावधानियों का ध्यान रखें

• अपने ट्रेनर को गर्भावस्था से जुड़ी हर एक जरूरी जानकारी दे दें जिससे वो आपके लिए फायदेमंद और सुविधाजनक आसन सजेस्ट कर सकें।

• पहले ट्राइमेस्टर के बाद कमर से संबंधित किसी तरह की योग मुद्रा से परहेज किया जाना चाहिए। इससे गर्भाशय की ओर रक्त का प्रवाह कम हो जाता है।

• मांसपेशियों को बहुत ज्यादा खींचने से परहेज करें।

• योग मुद्राएं उतनी ही देर करें जितनी कि आप आराम से कर सकें। अपने आप पर बहुत ज्यादा जोर न डालें। अपने शरीर का भी ध्यान रखें, जिससे कि किसी तरह की असहजता पैदा न हों।

• अपने घुटनों का ध्यान रखें। इन्हें बहुत ज्यादा न फैलाएं।

• गर्भावस्था के दौरान योगा का अभ्यास सिर्फ विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही करें। डीवीडी और वीडियो की नकल करने से बचें, क्योंकि ये आपके द्वारा की जाने वाली गलतियों को पहचानने में सक्षम नहीं होंगे और इससे आपके स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो सकता है।

• स्वयं पर बहुत ज्यादा जोर न डालें और आराम करना न भूलें। यदि आप थकी हुई महसूस कर रही हों तो कुछ समय आराम करें।

डाॅ. अरुणा कालरा (सीके बिड़ला हाॅस्पिटल, गुरुग्राम में स्त्री रोग एवं प्रसूति विषेशज्ञ) से बातचीत पर आधारित

Pic credit- freepik 

Edited By: Priyanka Singh