नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। आज कोरोना वायरस से हर कोई सुरक्षित रहना चाहता है। मास्क और शारीरिक दूरी के अलावा जो चीज हमें इस वायरस से बचाती है, वह है इम्युनिटी। पर क्या आपको मालूम है कि इम्युनिटी कई तरह की होती है और इनमें से कौन सी इम्युनिटी कितनी प्रभावशाली है। तो आइये जाने-माने विशेषज्ञों से जानते हैं, इम्युनिटी के तीन प्रकार और सबसे शक्तिशाली इम्युनिटी हाइब्रिड इम्युनिटी या सुपर इम्युनिटी या सुपरह्यूमन इम्युनिटी के बारे में।

क्या होती है हाइब्रिड या सुपरह्यूमन इम्युनिटी

एम्स के डा. अमरिंदर सिंह मलाही कहते हैं कि हमारे शरीर में तीन तरह की इम्युनिटी होती है। कोविड इंफेक्शन के बाद बनी नेचुरल इम्युनिटी, वैक्सीन के बाद बनने वाली इम्युनिटी और तीसरी हाइब्रिड इम्युनिटी या सुपर इम्युनिटी या सुपर ह्यूमन इम्युनिटी। सुपर ह्यूमन इम्युनिटी वह इम्युनिटी होती है जिस व्यक्ति को कोविड इंफेक्शन हो जाता है और उसे कोरोना की वैक्सीन भी लगा दी जाए। फिर वैक्सीन की इम्युनिटी और बीमारी से निजात के बाद मिली प्राकृतिक इम्युनिटी मिलकर सुपर इम्युनिटी बना देती है।

एक अध्ययन कहता है कि कुछ लोगों में एक साल तक नेचुरल इंफेक्शन रह सकता है। ऐसे लोगों का वैक्सीनेशन होने पर सुपर ह्यूमन इम्युनिटी बन जाती है। न्यूयॉर्क शहर में इस पर एक अध्ययन किया गया। तीन तरह के लोगों पर की गई स्टडी में एक जिनमें सिर्फ नेचुरल इंफेक्शन बना। एक ऐसे लोग थे जिनमें नेचुरल इंफेक्शन था और फिर उनका वैक्सीनेशन कर दिया गया। इससे दोबारा इंफेक्शन होने की दर दोगुनी से कम हो गई। इसलिए वैक्सीन लगवाना जरूरी है। डा. अमरिंदर सिंह कहते हैं कि जब हमें नेचुरल इंफेक्शन होता है और उसके बाद वैक्सीनेशन कराने पर मिलनी वाली इम्युनिटी लाभदायक होती है। पी-सेल, बी सेल और सीडी-4 सेल यह हमारे शरीर में इम्युनिटी प्रदान करते हैं।

सुपर इम्युनिटी कितनी कारगर

डा. समीर भाटी कहते हैं कि इस हाइब्रिड इम्युनिटी के लोग जब वैक्सीन लगवाते हैं कि उनके दोबारा कोरोना से संक्रमित होने का खतरा कम हो जाता है। वैसे एक स्टडी इस बात की पुष्टि करती है कि नेचुरल इंफेक्शन के द्वारा बनने वाली इम्युनिटी 90 दिन तक प्रभावी रहती है लेकिन कई बार यह इम्युनिटी छह माह या एक साल तक बनी रहती है। नेचुरल इंफेक्शन से एंटीबॉडी बन जाती है पर उसके बाद जब हम वैक्सीन लगवाते हैं तो शरीर की मेमोरी बी-सेल्स (जो एंटीबॉडी बनाती है) को दोबारा ट्रिगर कर दिया जाता है। इससे शरीर में एक्स्ट्रा इम्युनिटी बन जाती है।

हाइब्रिड इम्युनिटी अलग-अलग वैरियंट में कितनी प्रभावी

डा. समीर भाटी कहते हैं कि हालांकि हाइब्रिड इम्युनिटी अलग-अलग वैरियंट पर कितनी कारगर है इस पर लगातार अध्ययन हो रहा है। अभी इस बारे में पुष्ट तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। वैज्ञानिक अभी इस बात पर भी काम कर रहे हैं कि नेचुरल इंफेक्शन से प्राप्त इम्युनिटी कितने समय तक प्रभावी रहती है। रॉकफेलर यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए शोध में सामने आया कि जिन लोगों को कोविड हुआ था उनमें यह छह माह से एक साल तक प्रभावकारी रही। इसके अतिरिक्त अध्ययन में यह भी कहा गया कि वैक्सीन लगवाने से इम्युनिटी और बेहतर हो गई।

वैक्सीन जरूर लगवाएं

डा. अमरिंदर कहते हैं कि कैसी भी स्थिति हो वैक्सीन जरूर लगाएं। आईसीएमआर कहता है कि जिन लोगों को कोरोना हुआ है वह ठीक होने के तीन माह बाद वैक्सीन अवश्य लगवा लें। अध्ययन इस बात की भी पुष्टि करते हैं कि नेचुरल तरीके से प्राप्त इम्युनिटी और वैक्सीन द्वारा उत्पादित एंटीबॉडी दोबारा होने वाले इंफेक्शन से बचाव करने में अधिक सहायक होती है।

वहीं भारत में वैक्सीनेशन प्रक्रिया तेजी से चल रही है। 16 सितंबर तक 77,24,60,912 (कोविन के अनुसार) लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। इसमें से 58,34,96,776 लोगों को पहली डोज और 18,89,64,136 लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगी है। 

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