नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। How To Naturally Clean Your Lungs: दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से हवा में प्रदूषण एक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। खासकर दिवाली के बाद से राजधानी में आसमान धुएं और धुंध से भर गया है। शहर में प्रदूषण का स्तर पिछले तीन सालों में सबसे ज़्यादा है और ऐसा लग रहा है कि इस समस्या से राहत पाने का कोई तरीका नहीं है। ज़्यादातर लोग आंखों में जलन, गले में खराश और घुटन महसूस कर रहे हैं। सिर्फ यही नहीं बल्कि इस हवा में सांस लेना हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है। इस प्रदूषित हवा में सांस लेना दिन में सिगरेट का एक डब्बा पीने के बराबर है।

हवा में यह धुंआ आपके फेफड़ों को काला बना रहा है, इस धुंए में मौजूद तार आपके फेफड़ों में जम रहा है। यहां तक कि, लंबे समय से इस प्रदूषण में रहने से आपको फेंफड़ों की जानलेवा बीमारी भी हो सकती है। हालांकि, यह भी सच है कि दूषित हवा से बचना लगऊग नामुमकिन है क्योंकि आपका बाहर जाना भी ज़रूरी है। इसके बावजूद आप कुछ ऐसे चीज़ें कर सकते हैं जिनसे आपके फेफड़े कुछ हद तक साफ रहें। 

भांप

अपने फेफड़ों को साफ करने के लिए सबसे अच्छा उपाय है भांप लेना। भांप को सासं के ज़रिए अंदर खींचने से सांस की नली खुल जाती है और साथ ही ये बलग़म को बाहर निकालने में फेफड़ों की मदद करता है। सर्दियों में जैसे-जैसे हवा का बहाव कम होता है वैसे ही प्रदूषण भी बढ़ने लगता है। धुआं और कोहरा ज़मीन के पास स्थिर हो जाते हैं जिससे स्मॉग बनता है और प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगता है। इसलिए भांप लेना आपके फेफड़ों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

शहद

शहद में एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीमाइक्रोबियल, एंटी-इंफ्लामेट्री जैसे गुण होते हैं जो फेफड़ों के कंजेशन को साफ करने में मदद करता है। इस सुनहरे रंग के प्राकृतिक स्वीटनर का उपयोग प्राचीन काल से फेफड़ों की जलन को शांत करने, अस्थमा, ट्यूबरक्लॉसिस और गले के संक्रमण सहित सांस की अन्य तकलीफों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता रहा है। सिर्फ एक चम्मच शहद ही आपके फेफड़ों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

ग्रीन-टी

ग्रीन-टी के सेहत से जुड़े कितने फायदे हैं ये आप सब जानते ही होंगे। ग्रीन-टी फेफड़ों की सफाई के लिए भी काफी फायदेमंद होती है।  ग्रीन-टी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है और फेफड़ों में इंफ्लामेशन को कम करने का काम भी करती है। साथ ही ग्रीन-टी में मौजूद कई तरह की चीज़ें आपके फेफड़ों को धुएं से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। 

खांसी को न रोंके

पर्यावरण की ऐसी स्थिति में सूखी खांसी होना आम है। खांसने से हमारे शरीर में मौजूद धूल और बलग़म बाहर आ जाता है। इसलिए खांसी आए तो उसे रोंके नहीं।   

एंटी-इंफ्लामेट्री खाद्य पदार्थ

हल्दी, ब्रोकोली, गोभी, चैरी, ओलिव्ज़, अखरोट और बीन्स जैसी एंटी-इंफ्लामेट्री सब्ज़ियां आपकी सांस की नली को साफ रखने और सांस की तकलीफ को दूर करती हैं। 

Posted By: Ruhee Parvez

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