सभी प्राणायाम साल भर नहीं किए जा सकते। शरीर में गर्मी पैदा करने वाले प्राणायाम केवल सर्दियों के मौसम में किए जाने चाहिए। इसी प्रकार शीतलता देने वाले प्राणायाम ग्रीष्मकाल में या फिर बरसात के मौसम में धूप निकलने पर उमस के बढ़ने पर किए जा सकते हैं। ऐसा ही एक प्राणायाम है-चंद्रभेदी प्राणायाम, जो उमस के इस मौसम में बहुत ही लाभदायक है।

जानें विधि

सहज होकर सुखपूर्वक आंखें बंद करके बैठें। अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद कर लें और बायीं नासिका से धीरे-धीरे गहरी और लम्बी सांस भरें। सांस भरना इतने धीरे हो कि स्वयं आपको भी सांस की आवाज सुनाई न दे। अब अंतर्कुम्भक लगाएं यानी सांस भरकर उसे भीतर रोक लें और ठोढी को गर्दन से सट जाने दें। यथाशक्ति रुकने के बाद गर्दन सामान्य स्थिति में ले आएं और इसके बाद बायीं नासिका को अंगूठे से बंद करें और दायीं नासिका से सांस बाहर निकल जाने दें। इस प्रकार, बायीं नासिका से सांस लेने और कुंभक के बाद सांस दायीं नासिका से छोड़ने का अभ्यास कम से कम 10 बार करें। पूरी प्रक्रिया के दौरान ध्यान सांसों पर केंद्रित रहे। सुबह खाली पेट करें तो ज्यादा अच्छा है।

लाभ

1. शरीर में शीतलता का अनुभव होता है।

2. मानसिक शांति मिलती है। मन प्रसन्न रहता है।

3. तनाव,चिड़चिड़ापन और अनिद्रा की समस्याएं कम होती हैं।

4. हाई ब्लड प्रेशर वालों के लिए विशेष उपयोगी है।

5. एकाग्रता और स्मरण-शक्ति बढ़ती है।

6. एसिडिटी और खट्टी डकार से राहत मिलती है।

सावधानियां

- चंद्रभेदी और सूर्यभेदी प्राणायाम परस्पर विपरीत प्रभाव वाले हैं। इसलिए एक दिन में किसी एक का ही अभ्यास करें।

- सर्दियों के मौसम में इसका अभ्यास वर्जित है।

- लो ब्लड प्रेशर, दमा और कफ रोगी इस प्राणायाम को न करें।

अनुपमा (योगाचार्य, दिल्ली)
Pic Credit- Pinterest.com

Posted By: Priyanka Singh

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