नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। तुतलाना और हकलाना फ्लुएंसी डिसऑर्डर है। आसान शब्दों में कहें तो यह एक विकार है। इस स्थिति में व्यक्ति अथवा बच्चा रुक रुक कर बोलता है। इस बीमारी से बच्चे अधिक पीड़ित होते हैं। वहीं, बड़े लोग भी फ्लुएंसी डिसऑर्डर के शिकार होते हैं। ऐसा तब होता है। जब व्यक्ति बचपन से ही तुतलाता है। यह एक आनुवांशिकी रोग भी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि तुतलाना अथवा हकलाना एक मानसिक विकार है। इसमें पीड़ित व्यक्ति अथवा बच्चा बातों को देर से समझता है। साथ ही बोलने में हिचकता है। इसके चलते बच्चों में तुतलाने की समस्या होती है। अगर आपका बच्चा भी तुतलाता है, तो इन आसान टिप्स को अपनाकर तुतलाने की समस्या को दूर कर सकते हैं-

धीरे-धीरे बातचीत करें

अगर आपका बच्चा हकलाता और तुतलाता है, तो बच्चे से प्यार से बात करें। साथ ही घर के सभी सदस्यों को भी धीरे-धीरे से बात करने की सलाह दें।

शांत वातावरण बनाए रखें

अपने बच्चे की तुतलाने की समस्या को दूर करने के लिए घर का माहौल शांत बनाए रखें। इससे बच्चे में घुलने-मिलने की इच्छा जगेगी। साथ ही आपका बच्चा सभी लोगों के साथ फ्रेंडली बर्ताव रखेगा।

दखलंदाजी न करें

जब आपका बच्चा बोलता रहता है, तो रोक-टोक न करें। अगर रोक-टोक करती हैं, तो बच्चे की बोलने की रिदम टूट सकती है। इससे बच्चे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

बच्चे को समय दें

नियमित अंतराल पर बच्चे को समय दें। इसके लिए सप्ताह में दो दिन बच्चे के साथ वक्त गुजारें। इससे बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ेगा और बच्चा बेहतर करने की कोशिश करेगा।

बच्चे पर तंज न कसें

अक्सर ऐसा देखा जाता है कि गुण के आधार पर माता-पिता उन्हें नाम देते हैं। इससे बच्चे के आत्मविश्वास में कमी आती है। इसके अलावा, बच्चे के तुतलाने पर तीखी प्रतिक्रिया बिल्कुल न दें।

धीरज रखें

धीरज ही समस्या का समाधान है। इसके लिए अपने बच्चे को पर्याप्त समय दें। इन टिप्स को अपनाने से बच्चे की तुतलाने और हकलाने की समस्या दूर हो सकती है।

डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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