नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Coronavirus Tests: कोरोना वायरस का इंफेक्शन तेज़ी से पुरी दुनिया के कई देशों में फेल रहा है। भारत अब भी एक संकट के कगार पर है, जहां कोरोना वायरस के अभी तक कुल 62 पुष्ट मामले सामने आए हैं। इसकी वजह से दुनिया भर में पैनिक भी बढ़ता जा रहा है, ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना वायरस के लक्षण सामान सर्दी या फ्लू के लक्षण से मिलते हैं। दुनिया भर में अभी तक इस ख़तरनाक बीमारी से लगभग 4,284 मौतें हो चुकी हैं।  

एक तरफ मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन डॉक्टर्स और विशेषज्ञों का फोकस इस वक्त कोरोना वायरस का जल्द से जल्द निदान करना और लोगों को संगरोध में रखना है, जिससे संक्रमण को फैलने से बचाया जा सके। हालांकि, कोरोना वायरस के लक्षण आम फ्लू से मिलते हैं लेकिन ये एक अनोख वायरस है, इसलिए इसके टेस्ट भी अलग तरह के हैं।

क्या है टेस्ट की प्रकिया

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने का सबसे पहला कदम है इससे संक्रमित लोगों को संगरोध या फिर दूसरों से अलग रखा जाए। चूंकि कोरोना वायरस एक उच्च जोखिम वाला संक्रमण है, इसलिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) COVID-19 प्रभावित देशों या हाल ही में संक्रमित रोगियों के साथ निकट संपर्क में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को स्क्रीनिंग की सलाह दे रहा है।

इन लोगों को होना चाहिए COVID-19 टेस्ट:

1. सिम्पटोमैटिक यानी बुखार, गले में खराश, नाक से पानी आना, सांस लेने में तकलीफ आ रही हो। खासकर वो लोग जो चीन, हांग कांग, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, ईरान, इटली जैसे देशों से हाल ही में लौटे हों। 

2. जो लोग कोरोना वायरस के पुष्ट रोगी के सम्पर्क में आए हों। 

3. सभी लोग जिन्हें वुहान, चीन और जापान के डायमंड प्रिंसेस जहाज से निकाला गया है। 

फिलहाल कोरोना वायरस संक्रमण का पता लगाने के लिए कोई परीक्षण किट उपलब्ध नहीं है, इसलिए डॉक्टर और शोधकर्ता संक्रमण की पुष्टि करने के लिए कई तरह के टेस्ट की की मदद ले रहे हैं। इस टेस्ट में खून या फिर बलगम की मदद से किए जा रहे हैं।

यह देखने के लिए कि क्या कोई व्यक्ति वास्तव में "नोवेल" कोरोना वायरस से संक्रमित है, टेकनीशियन विश्लेषण करते समय तीन विशिष्ट तरह के परीक्षण शामिल करते हैं:

-स्वैब टेस्ट: रुई के एक टुकड़े को गले में डालकर या फिर नाक में डालकर बलगम का सैम्पल लिया जाता है। 

-नेज़ल एस्पीरेट: एक सलाइन सोल्यूशन को नाक में डाला जाता है, और टेस्ट के लिए सैम्पल को निकाला जाता है। 

- ट्रेकिएल एस्पीरेट: कई बार सैम्पल के लिए ब्रॉन्कोस्कोप को फेफड़ों में डाला जाता है। कई बार इंफेक्शन के पैटर्न को जानने के लिए स्पुटम टेस्ट भी किया जाता है।  

टेस्ट के रिसल्ट आने में कितना समय लगता है?

क्योंकि वायरस के ऊष्मायन और इसके जीन अनुक्रम का पता लगाने के लिए परीक्षण किए जाते हैं, इसलिए परीक्षण प्रक्रिया में थोड़ा समय लगता है। कई लैब्स रिपोर्ट को 10 घंटों के अंदर भेज देते हैं, तो वहीं कई उससे ज़्यादा समय लेते हैं।

क्या यह टेस्ट भरोसेमंद होते हैं?

भले ही कोरोना वायरस की परीक्षण किट अभी नहीं है, इसलिए इन टेस्ट को पूरी तरह से "विश्वसनीय" नहीं माना जा सकता। कई बार रिपोर्ट ग़लत भी आ सकती है। जो भारत के पहले कोरोना वायरस के मरीज़ के साथ हुआ था, उनकी रिपोर्ट पॉज़ीटिव आई थी।

Posted By: Ruhee Parvez

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