नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। आजकल युवाओं की जिंदगी इतनी मसरूफियत की हो चुकी है कि वे अपनी जिंदगी में सिर्फ शिक्षा, कैरियर, घर, गाड़ी और अच्छे वेतन वाली नौकरी को ही तरजीह देते हैं। जिंदगी की इन जरूरतों को पूरा करने में युवा इतने मसरूफ हो जाते हैं कि जिंदगी का सबसे कीमती समय निकल जाता है और उम्र 40 को पार कर जाती है। वित्तीय स्थिरता इन दिनों हर कपल के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता है। इन सब के बीज उम्र गुजरती रहती है और आप जब पैरेंट्स बनने की ख्वाहिश पैदा करते हैं तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

मर्द और औरत में औलाद पैदा करने के लिए सबसे माकूल समय होता है 30 साल। कई बार महिला हो या पुरुष शारीरिक रूप से हेल्दी होने के बावजूद उनकी फर्टिलिटी कंसीव करने के लिए सपोर्ट नहीं करती। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर महिलाएं 30 के बाद कंसीव करने के बारे में सोचती हैं। पुरुष भी 33 के बाद बच्चों के बारे में सोचते हैं। लेकिन मानव शरीर की रचना इस प्रकार से हुई है जिसमें 30 से पहले ही बच्चा पैदा करने के लिए अनुकूल समय माना गया है। यहां डॉक्टरों के मुताबिक, हम कुछ ऐसे टिप्स दे रहे हैं जिनसे महिलाओं को कंसीव करने में आसानी होगी-

बच्चे की प्लानिंग 30 से पहले करें

जैसे-जैसे महिलाओं की आयु बढ़ती है, उसमें कुदरती तौर पर अंडा भी कम बनने लगता है। इसके अलावा अंडे की गुणवत्ता भी कम होने लगती। इस कारण मिसकैरेज की आशंका ज्यादा हो जाती है। रिसर्च के मुताबिक, महिलाओं में 40 के बाद प्रेग्नेंसी की संभावना 25 प्रतिशत कम हो जाती है। 44 की उम्र तक अंडा बनने की क्षमता में 1.6 प्रतिशत की कमी आ जाती है। इसके बाद मिसकैरिज की आशंका 25 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

अंडा के अलावा ट्यूब में डैमेज, इंडोमेटरियोसिस, अंडोत्सर्ग में कमी आने लगती है। इसलिए यह कोई गारंटी नहीं ले सकता कि 40 के बाद बच्चा पैदा होगा ही। इसलिए बेहतर है कि बच्चे की प्लानिंग 30 से पहले करें, ताकि किसी तरह के डॉक्टरी झमेले में न पड़ना पड़े।

पुरुष की क्षमता भी जरूरी

बच्चा पैदा करने के लिए पुरुष की प्रजनन क्षमता अच्छी होनी चाहिए, लेकिन ज्यादा उम्र होने के बाद पुरुषों के स्पर्म की क्वालिटी में भारी गिरावट आने लगती है। रिसर्च के मुताबिक 5 में से एक पुरुष में स्पर्म की संख्या कम होने की शिकायत रहती है। इसके अलावा, स्पर्म की कई अन्य तरह की क्षमता भी प्रभावित होती है। जैसे स्पर्म का आकार गलत हो जाता, स्पर्म जल्दी से मूव नहीं करता इत्यादि। इसके साथ ही अगर टेस्टिकल डैमेज हुए तो भी दिक्कत आती है। बीमारी, दवाई की आदत, नशे की लत, हार्मोन और वंशानुगत प्रभाव भी असर करता है।

पांच टेस्ट कराना जरूरी

बच्चे की प्लानिंग करने से पहले सबसे पहले यह जानने की कोशिश करें कि आपकी फर्टिलिटी कैसी है। इसे जितना पहले जानने की कोशिश करेंगे, कंसीव के लिए उतना अच्छा रहेगा। इसके लिए पांच टेस्ट बहुत जरूरी है।

  • एएमएच ब्लड टेस्ट,
  • अल्ट्रासाउंड,
  • एंट्रल फॉलिकल काउंट,
  • सीमेन एनालिसिस
  • और मेडिकल एंड रिप्रोडक्टिव हिस्ट्री।

इन पांचों टेस्ट से पूरी तरह वाकिफ हो जाने के बाद ही आपका डॉक्टर डिसाइड करेगा कि आपको किस तरह से कंसीव के बारे में सोचना चाहिए या अगर दिक्कत है तो उसका किस तरह से इलाज किया जाना चाहिए।

लाइफस्टाइल को आदर्श बनाएं

कंसीव के लिए लाइफस्टाइल को आदर्श बनाना सबसे ज्यादा जरूरी है।

  • महिलाएं स्मोकिंग, अल्कोहल का सेवन न करें।
  • हार्ड फिजिकल एक्टिविटी से भी दूर रहें।
  • जंक फूड ज्यादा शूगर आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
  • ज्यादा या कम वजन महिलाओं के लिए दोनों घातक है।
  • पुरुषों के लिए भी ज्यादा वजन उसके स्पर्म काउंट को कम देता है।
  • अगर 40 के बाद कंसीव के बारे में सोच रहे हैं तो बेहतर यही है कि आप एग को फ्रीज करा लें। अगर ज्यादा उम्र में फ्रीज कराएंगे तो भी दिक्कत होगी। इसलिए 35 के आसपास एग फ्रीज करा लें।
  • अगर आईवीएफ भी कराना चाहती हैं तो वह भी इसी समय करा लें। 

                     Written By Shahina Noor

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