आजकल फिजियोथेरेपी साइंस काफी प्रगति पर है। फिजियोथेरिपी में इस्तेमाल होने वाली कुछ लेटेस्ट मशीनें जैसे क्लास 4 लेजर थेरेपी, शॉक वेव थेरेपी, माइक्रोवेव डायाथर्मी और कुछ मैन्युअल तकनीकों से हम अर्थराइटिस से बचाव कर सकते हैं और इस मर्ज के होने पर राहत पा सकते हैं।

जोड़ों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज़

- इस एक्सरसाइज़ में बिस्तर या जमीन पर सीधा लेटकर एक बड़े तौलिए को 4 से 6 इंच का गोल रोल बनाकर अपने घुटने के नीचे रखें। अब अपने घुटने और जांघ की मांसपेशियों से इसको नीचे की तरफ दबाकर 5 सेकेंड तक रोक कर रखें। ध्यान रहे कि पंजा अपनी तरफ रहे।

एडी के नीचे रखें

- फिर इसी रोल को एड़ी के नीचे रखकर 5 सेकेंड तक हील से दबाएं और पंजा अपनी तरफ रखें। इसे कई बार दोहराएं।

- बेड या कुर्सी पर आगे की तरफ बैठकर अपने घुटने और पैरों को 90 डिग्री पर बनाकर रखें और कोई तकिया लेकर दोनों घुटनों की तरफ दबाकर 10 सेकेंड तक रोककर रखें। इस क्रिया को 15 से 20 बार दोहराएं।

- अब एक साइड करवट लेकर अपनी टांग को ऊपर की दिशा में 45 डिग्री तक उठाएं और 5 सेकेंड तक रोक कर रखें। इस क्रिया को 15 से 20 बार दोहराएं।

- सीधा पैर उठाना

- सीधा लेटकर पूरी टांग को कम से कम 60 डिग्री हवा में उठाकर 5 सेंकेड तक रोक कर रखें।

- पंजा अपनी तरफ रखें। इसे 15 से 20 बार दोहराएं।

- बेड या कुर्सी पर आगे की तरफ बैठकर अपने घुटने और पैरों को 90 डिग्री पर बनाकर रखें और कोई तकिया लेकर दोनों घुटनों से अंदर की तरफ दबाकर 10 सेकेंड तक रोककर रखें। इस क्रिया को 15 ले 20 बार दोहराएं।

- साइकिल चलाएं।

प्राणायाम

सांस की एक्सरसाइज जरूर करें जिससे हमारे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा सही रहे और हम ऊर्जावान महसूस करते रहें।

क्या न करें

* अगर अर्थराइटिस काफी हद तक बढ़ जाए तो कुछ सावधानी बरतनी जरूरी है।

* बहुत देर तक खड़े न हों।

* दर्द ज्यादा हो तो ज्यादा न चलें वरना दर्द बढ़ सकता है।

* जमीन पर पाल्थी मारकर न बैठें।

* इंडियन टॉयलेट सीट का इस्तेमाल न करें।

* समय-समय पर अपने फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क जरूर करें।

सर्वोत्तम चौहान (सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट, मेदांता हॉस्पिटल) 

Posted By: Priyanka Singh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस