नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Covid-19 Herd Immunity: देश और दुनिया में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसके साथ वैक्सीन और इसके इलाज को लेकर की तरह की चीज़ें सामने आ रही हैं। अभी तक कोरोना वायरस का कोई इलाज नहीं है, न ही इससे बचाव का कोई ज़रिया। ऐसिम्प्टोमैटिक मामले लगातार बढ़ रहे हैं, यानी ऐसे लोगों की संख्या ज़्यादा है जो संक्रमित हैं लेकिन उनमें किसी तरह के लक्षण नज़र नहीं आते।

इस ख़तरनाक महामारी की शुरुआत में ऐसी उम्मीद थी कि कोरोना वायरस को हराने का सिर्फ एक ही तरीका है और वह है हर्ड इम्यूनिटी। जिसके तहत, पूरी दुनिया की आबादी के कम से कम 70 प्रतिशत लोगों का इस बीमारी से संक्रमित होना ज़रूरी था। ये आंकड़ा न सिर्फ काफी जोखिम भर लग रहा था, बल्कि बहुत सारे कारक ऐसे भी थे जिन्होंने इस अवधारणा के काम को नकार दिया। 

70% नहीं, 43% लोगों में इन्फेक्शन ज़रूरी

हालांकि, नई रिसर्च के मुताबिक, हर्ड इम्यूनिटी के लिए अब 70 प्रतिशत नहीं बल्कि 43 प्रतिशत लोगों में कोरोना वायरस इंफेक्शन ही ज़रूरी है। यह स्टडी साइंस जर्नल में छपी है जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम और यूनिवर्सिटी ऑफ स्टॉकहोम के गणितज्ञों ने किया। शोध में अनुमान लगाया गया है कि ट्रांसमिशन को रोकने के लिए आबादी के जितने प्रतिशत को इन्फेक्ट होने की ज़रूरत है, वह सिर्फ 43% है जबकि पहले अनुमान लगाया गया था कि कम से कम 70% आबादी के इन्फेक्ट होने से हर्ड इम्यूनिटी पैदा हो सकती है।

क्या होती है हर्ड इम्यूनिटी

इस थ्योरी के मुताबिक लॉकडाउन तभी तक कारगर था जब तक लोग घरों में कैद थे। जैसे ही लोग घरों से निकने लगे ये संक्रमण तेज़ी से उन्हें जकड़ता गया। इसलिए इस संक्रमण से छिपने की नहीं बल्कि इसका सामना करने की ज़रूरत है। जितने ज़्यादा लोग इससे संक्रमित होंगे, इंसानी शरीर में इससे लड़ने की उतनी ज़्यादा ताकत पैदा होगी। इसे ही हर्ड इम्यूनिटी कहते हैं।

कैसे काम करती है हर्ड इम्यूनिटी

दुनिया को कोरोना वायरस से बचने के लिए कई वैज्ञानिक हर्ड इम्यूनिटी अपनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि इसे फैलने से रोका जा सके। 

बड़ी अजीब सी बात है। मगर मेडिकल साइंस की सबसे पुरानी पद्धति के हिसाब से ये बिल्कुल सत्य है। हर्ड इम्यूनिटी यानी सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता। इसका मतलब ये है कि भविष्य में लोगों को बचाने के लिए फिलहाल आबादी के एक तय हिस्से को वायरस से संक्रमित होने दिया जाए। इससे उनके जिस्म के अंदर संक्रमण के खिलाफ सामूहिक इम्यूनिटी यानी प्रतिरोधक क्षमता पैदा होगी। 

इससे शरीर में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज़ बनेंगी। जिसे उनके जिस्म से निकालकर वैक्सीन तैयार करने की कोशिश की जा सकती है। ताकि इससे फिर दोबारा कभी ये वायरस न तो उन्हें संक्रमित करे और न ही दूसरों को। कोरोना की वैक्सीन बनाने का वैज्ञानिकों को यही सबसे तेज़ तरीका समझ आ रहा है। वरना वैक्सीन बनते बनते इतनी देर न हो जाए कि दुनिया की आधी आबादी काल के गर्त में समा जाए।

Posted By: Ruhee Parvez

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