लंदन, एएनआइ : चिकित्सा जगत में नित नए शोध मानव जीवन को बचाने में मददगार साबित हो रहे हैं। अल्जाइमर एक ऐसा जटिल रोग है, जिसकी समय रहते पहचान होने से मरीज के स्वस्थ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। विज्ञानियों ने इस दिशा में लगातार शोध कर ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे एकल स्कैन से ही अल्जाइमर की सटीक पहचान हो सकेगी।

शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क के भीतर संरचनात्मक विशेषताओं के अध्ययन के लिए मशीन लर्निग तकनीक का उपयोग किया। इस तकनीक का लाभ यह है कि रोग की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान संभव है। यह शोध नेचर पोर्टफोलियो जर्नल कम्यूनिकेशन मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।

अल्जाइमर का नहीं है इलाज : यद्यपि अल्जाइमर का कोई इलाज नहीं है, लेकिन प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान हो जाने से मरीज को काफी मदद मिलती है। इससे शोधकर्ताओं को उन कारणों को समझने में मदद मिलेगी जो रोग को बढ़ाते हैं। साथ ही उपचार और परीक्षणों की तलाश कर पाना संभव होगा।

अमूमन 65 वर्ष की आयु के बाद आती है समस्या : बता दें कि अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम रूप है जो ब्रिटेन के पांच लाख से अधिक लोगों को प्रभावित करता है। यह देखा गया है कि अमूमन 65 वर्ष की आयु के बाद ही अल्जाइमर से लोग ग्रसित होते हैं। कुछ मामलों में इससे कम आयु के लोग भी ग्रसित हो जाते हैं। इस रोग का मूल लक्षण याददाश्त का जाना, सोचने में परेशानी और समस्याओं का निदान नहीं कर पाना और भाषा संबंधी है। यह बीमारी जिंदगी कठिन बना देती है।

वर्तमान में होती हैं कई जांचें : वर्तमान में चिकित्सक अल्जाइमर की पहचान के लिए कई प्रकार के टेस्ट कराते हैं। इसमें मस्तिष्क स्कैन के साथ ही स्मृति और संज्ञानात्मक परीक्षण भी किया जाता है। इसके अलावा मस्तिष्क में जमा प्रोटीन की भी जांच की जाती है। सभी प्रकार के परीक्षण की जांच, प्रबंधन और निष्कर्ष तैयार करने में कई सप्ताह का समय लग जाता है।

यह है नया तरीका : नई व्यवस्था में केवल एक परीक्षण जरूरी होता है। 1.5 टेस्ला मशीन से एमआरआइ किया जा सकता है जो लगभग सभी अस्पताल में उपलब्ध है।

अब तक की सबसे सटीक तकनीक : एरिक अबोग्ये शोध की अगुआई करने वाले इंपीरियल डिपार्टमेंट आफ सर्जरी एंड कैंसर के प्रोफेसर एरिक अबोग्ये ने कहा कि वर्तमान में कोई अन्य तकनीक उपलब्ध नहीं है जो इतनी सटीकता के साथ अल्जाइमर की भविष्यवाणी कर सके। इस लिहाज से हमारी खोज महत्वपूर्ण है। कई मरीजों में अल्जाइमर के साथ ही कई अन्य न्यूरोलाजिकल समस्या होती है। हमारी प्रणाली उन मरीजों की पहचान कर सकती है, जिन्हें वास्तव में अल्जाइमर की समस्या है।

शोधकर्ताओं ने कैंसर ट्यूमर को वर्गीकृत करने के लिए विकसित किए गए एल्गोरिदम को अनुकूलित किया और इसका उपयोग मस्तिष्क पर किया। विज्ञानियों ने मस्तिष्क को 115 क्षेत्रों में विभाजित किया और प्रत्येक क्षेत्र के आकलन के लिए विभिन्न विशिष्टताओं बनावट, संरचना, आकार आदि को आवंटित किया। उन्होंने एल्गोरिदम को यह पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया कि विभिन्न मापदंडों पर जांच कर यह पता चले कि अल्जाइमर की अवस्था क्या है और विभिन्न व्यवस्था में परिवर्तन से अल्जाइमर की भविष्यवाणी की जा सकती है। न्यूरोइमेजिंग इनिशिएटिव के डाटा का उपयोग करते हुए विज्ञानियों ने 400 से अधिक मरीजों की जांच की। रोग के विभिन्न चरणों पर परीक्षण किया गया। 

Edited By: Sanjay Pokhriyal