विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

3 पीढ़ियां पहनें, फिर भी पुरानी नहीं होती ये साड़ी! लाखों में बिकती है 300 साल तक नई रहने वाली 'पाटन पटोला'

Published: Fri, 18 Sep 2026 11:39 AM (IST)

पाटन पटोला साड़ी अपनी खास डबल इकत बुनाई और 300 साल तक नई रहने की क्षमता के कारण लाखों में बिकती है।

क्यों इतना खास है पाटन का पटोला? (AI Generated Image)

क्यों इतना खास है पाटन का पटोला? (AI Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में साड़ी की हमेशा खास जगह रही है। इनमें भी कई साड़ियां ऐसी हैं, जिनका नाम पूरी दुनिया में मशहूर है। इसी में गुजरात के पाटन का पटोला भी शामिल है। आमतौर पर बहुत अच्छी साड़ियों की कीमत भी कुछ हजार रुपए तक होती है, लेकिन एक असली पाटन पटोला साड़ी की कीमत एक लाख से 10 लाख या उससे भी ज्यादा हो सकती है। 

सुनकर काफी हैरान करने वाला लगता है कि एक साड़ी की कीमत लाखों में क्यों है? इस साड़ी में ऐसा क्या है, जो इसे इतना खास बनाता है? आइए जानें क्यों पटोला दुनिया की सबसे महंगी साड़ियों में से एक है।   

डबल इकत की बुनाई

पाटन के पटोला की सबसे बड़ी खासियत उसकी बुनाई प्रक्रिया है। इस साड़ी को डबल इकत तकनीक में बुना जाता है। आमतौर पर साड़ियों को बुनने के बाद रंगा जाता है या सीधे धागे से डिजाइन बनाया जाता है, लेकिन पटोला ऐसे नहीं बनता। 

पटोला बुनने के लिए ताना और बाना दोनों तरह के धागों को बुनाई से पहले ही रंगा जाता है। इस साड़ी के बुनकर इतने काबिल और मंझे हुए होते हैं कि उन्हें पहले से ही पता होता है कि कौन-सा धागा किस जगह पर कैसा डिजाइन बनाएगा। एक भी धागा अगर इधर से उधर हुआ, तो साड़ी का पूरा डिजाइन खराब हो सकता है। 

दोनों तरफ से एक जैसी साड़ी

आमतौर पर किसी भी साड़ी को देखकर पता चल जाता है कि इसकी सीधी तरफ कौन-सी है और उल्टी कौन सी, लेकिन पटोला में आप ये पता नहीं लगा सकते। ये साड़ी दोनों तरफ से बिल्कुल एक जैसी लगती है। इसे देखकर पता ही नहीं चलेगा कि इसकी इतनी जटिल बुनाई की गई है। यही इसे इतना खास बनाता है। इस साड़ी का रंग, चमक और डिजाइन, दोनों तरफ से बिल्कुल एक जैसा दिखाई देता है।

महीनों की लगती है मेहनत

असली पाटन पटोला साड़ी को बुनकर हाथ से बुना जाता हैं। इसमें मशीन का इस्तेमाल नहीं होता। इसलिए अगर एक साधारण पटोला भी बनाया जाए, तो इसमें कम से कम 6 महीने से एक साल तक का समय लग जाता है। अगर डिजाइन ज्यादा मुश्किल है, तो और समय भी लग सकता है। बुनकरों की महीनों की मेहनत ही, इस साड़ी को इतना कीमती बनाती है। 

सदियों तक रहती है नई

कोई भी साड़ी, चाहे कितनी ही महंगी क्यों न हो, कुछ सालों में उसकी चमक कम होने लगती है, लेकिन पाटन का पटोला सदियों तक नई जैसी रहती है। इसमें केमिकल डाई का इस्तेमाल नहीं होता, सिर्फ प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। असली पटोला साड़ी लगभग 300 साल तक बिल्कुल नई जैसी रहती है, यानी एक साड़ी को तीन पीढ़ियां पहन सकती हैं।