फुटवेयर

लोगों के फुटवेयर्स से उनके फैशन सेंस को समझा जा सकता है। इसके लिए ज़रूरी है कि उन्हें हर अवसर के हिसाब से पहने जाने वाले फुटवेयर्स की उचित जानकारी हो।

कुछ लोगों को फुटवेयर्स खरीदने का शौक होता है। उनके कलेक्शन में हर वरायटी के जूते, चप्पल, सैंडल आदि शामिल होते हैं। दरअसल, यह सिर्फ एक शौक नहीं है, बल्कि वे हर ड्रेस व अवसर के हिसाब से खुद को प्रेज़ेंटेबल दिखाने के लिए इन विविध फुटवेयर्स की खरीदारी करते हैं। आमतौर पर व्यक्ति जिस तरह से कपड़ों के बदलते ट्रेंड के साथ खुद को अपडेट रखता है, उसी तरह से उसे अपने फुटवेयर्स को भी बदलते रहना चाहिए।

शूज की हो समझ

जूतों को आमतौर पर तीन कैटेगरी में बांटा जाता है, फॉर्मल शूज़, कैज़ुअल शूज़ और स्पोट्र्स शूज़। इन तीनों में भी कई वरायटी आती हैं, जिनके बारे में अकसर लोगों को नहीं पता होता है।

फॉर्मल शूज

ऑफिस या औपचारिक मीटिंग्स के लिए इन्हें सबसे उपयुक्त माना जाता है।

ऑक्सफोर्ड : सूट के साथ पहने जाने वाले इन जूतों को फीतों के ज़रिये पंजों पर कसा जाता है।

डर्बी : ये ऑक्सफोर्ड से कुछ कम फॉर्मल होते हैं और इन्हें पैंट-शर्ट के साथ पहना जा सकता है।

ब्रॉग : इनकी नोंक पर छेद वाला डिज़ाइनर पैच लगा होता है, जो इन्हें $खास लुक देता है। इन्हें पार्टी में पहना जा सकता है।

लोफर्स : इनमें फीते नहीं होने के कारण इन्हें स्लिप ऑन भी कहा जाता है। इन्हें सेमी फॉर्मल पैंट के साथ पहना जाता है।

कैजुए शूज

घूमने या अनौपचारिक मीटिंग्स व सेमिनार के लिए ये उपयुक्त होते हैं। इनमें भी 4 वरायटी आती हैं।

स्नीकर : लेदर या दूसरे फैब्रिक से बने इन जूतों की नोंक कुछ छोटी होती है। इन्हें जींस या शॉट्र्स के साथ पहना जाता है।

बोट : दिखने में नाव जैसे इन जूतों को बिना मोज़े के पहना जाता है। ये कैज़ुअल पैंट्स और शॉट्र्स के साथ पहने जाते हैं।

एस्पैड्रिल्स : बिना फीते के इन जूतों को गर्मियों में शॉट्र्स के साथ पहना जाता है।

बूट : रफ-टफ लुक्स और हाइकिंग व ट्रेकिंग जैसी गतिविधियों के लिए ये मु$फीद रहते हैं। इन्हें जींस या ट्रेकिंग पैंट के साथ पहनें।

स्पोट्र्स शूज़

विभिन्न खेलों के हिसाब से जूते भी अलग होते हैं पर अमूमन दो तरह के स्पोट्र्स शूज़ ज़्यादा पहने जाते हैं।

रनिंग शूज़ : इनका सोल लचीला और मुलायम होता है। इन्हें जींस, स्पोट्र्स ट्राउज़र्स और शॉट्र्स के साथ पहना जाता है।

ट्रेनिंग शूज़ : इनका सोल ज़मीन पर पूरी पकड़ देता है। इन्हें पैंट के साथ न पहनें।

स्त्रियों को हैं पसंद

कई रंगों व डिज़ाइन में आने वाले इन फुटवेयर्स का फैशन बहुत जल्दी बदलता है। इनको अमूमन पांच कैटेगरी में बांटा जा सकता है।

हाई हील : इनमें किटेन, स्टिलेटोज़, प्रिज़्म, पपी और वेज जैसी कई हील्स आती हैं। ये ज़्यादातर फॉर्मल मौ$कों पर पहने जाते हैं।

म्यूल्स : ये जूते पीछे से ढके हुए नहीं होते हैं। अकसर स्कट्र्स के साथ पहने जाने वाले इन जूतों को बैकलेस शूज़ भी कहा जाता है।

स्लिंगबैक्स : ये हील्स के ऊपर एक स्ट्रैप के ज़रिये पैरों को पीछे की ओर से बांधे रखते हैं। इन्हें स्कर्ट, जींस और फॉर्मल पैंट्स के साथ पहना जा सकता है।

बैलेरिना या बेली : ये आगे से ढकी हुई होती हैं। इन्हें कैज़ुअल और फॉर्मल, दोनों ही मौकों पर पहना जा सकता है।

कोर्ट शूज़ : इनका लुक बेली जैसा होता है मगर इनकी हील्स इन्हें अलग बनाती हैं। ज़्यादातर फॉर्मल कपड़ों के साथ पहने जाने वाले इन जूतों को पंप शूज़ भी कहा जाता है।

जब पहनें लेदर के जूते

लेदर के जूतों का रखरखाव थोड़ा कठिन होता है पर ध्यान दिया जाए तो इन्हें सहेज कर रखा जा सकता है।

चुनें सही पॉलिश : इन जूतों पर कभी भी लिक्विड बेस पॉलिश का इस्तेमाल न करें। इन्हें साफ करने के लिए वैक्स बेस पॉलिश उपयुक्त रहती है।

रैक में रखें : इनको हमेशा बंद शू रैक में रखें। इससे उनकी चमक लंबे समय तक बर$करार रहती है।

इनसे बचाएं : इनको बारिश के दिनों में पहनने से बचें। अगर पहनना ही पड़े तो अलसी के तेल से कोटिंग कर सकते हैं। इन्हें हमेशा पानी, धूल और नमी से बचाकर रखें।

बनाए रखें इनका आकार : इन्हें पहनने के बाद हमेशा डिब्बे में रखें। इनके लिए शू-ट्री का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, जो पैर के पंजे की तरह होते हैं और इनसे जूते का आकार बना रहता है।

दीपाली पोरवाल

फुटवेयर डिज़ाइनर स्वाति मोदो से बातचीत पर आधारित

छ लोगों को फुटवेयर्स खरीदने का शौक होता है। उनके कलेक्शन में हर वरायटी के जूते, चप्पल, सैंडल आदि शामिल होते हैं। दरअसल, यह सिर्फ एक शौक नहीं है, बल्कि वे हर ड्रेस व अवसर के हिसाब से खुद को प्रेज़ेंटेबल दिखाने के लिए इन विविध फुटवेयर्स की खरीदारी करते हैं। आमतौर पर व्यक्ति जिस तरह से कपड़ों के बदलते ट्रेंड के साथ खुद को अपडेट रखता है, उसी तरह से उसे अपने फुटवेयर्स को भी बदलते रहना चाहिए।

शूज़ की हो समझ

जूतों को आमतौर पर तीन कैटेगरी में बांटा जाता है, फॉर्मल शूज़, कैज़ुअल शूज़ और स्पोट्र्स शूज़। इन तीनों में भी कई वरायटी आती हैं, जिनके बारे में अकसर लोगों को नहीं पता होता है।

फॉर्मल शूज़

ऑफिस या औपचारिक मीटिंग्स के लिए इन्हें सबसे उपयुक्त माना जाता है।

ऑक्सफोर्ड : सूट के साथ पहने जाने वाले इन जूतों को फीतों के ज़रिये पंजों पर कसा जाता है।

डर्बी : ये ऑक्सफोर्ड से कुछ कम फॉर्मल होते हैं और इन्हें पैंट-शर्ट के साथ पहना जा सकता है।

ब्रॉग : इनकी नोंक पर छेद वाला डिज़ाइनर पैच लगा होता है, जो इन्हें $खास लुक देता है। इन्हें पार्टी में पहना जा सकता है।

लोफर्स : इनमें फीते नहीं होने के कारण इन्हें स्लिप ऑन भी कहा जाता है। इन्हें सेमी फॉर्मल पैंट के साथ पहना जाता है।

कैज़ुअल शूज़

घूमने या अनौपचारिक मीटिंग्स व सेमिनार के लिए ये उपयुक्त होते हैं। इनमें भी 4 वरायटी आती हैं।

स्नीकर : लेदर या दूसरे फैब्रिक से बने इन जूतों की नोंक कुछ छोटी होती है। इन्हें जींस या शॉट्र्स के साथ पहना जाता है।

बोट : दिखने में नाव जैसे इन जूतों को बिना मोज़े के पहना जाता है। ये कैज़ुअल पैंट्स और शॉट्र्स के साथ पहने जाते हैं।

एस्पैड्रिल्स : बिना फीते के इन जूतों को गर्मियों में शॉट्र्स के साथ पहना जाता है।

बूट : रफ-टफ लुक्स और हाइकिंग व ट्रेकिंग जैसी गतिविधियों के लिए ये मुफीद रहते हैं। इन्हें जींस या ट्रेकिंग पैंट के साथ पहनें।

स्पोट्र्स शूज़

विभिन्न खेलों के हिसाब से जूते भी अलग होते हैं पर अमूमन दो तरह के स्पोट्र्स शूज़ ज़्यादा पहने जाते हैं।

रनिंग शूज़ : इनका सोल लचीला और मुलायम होता है। इन्हें जींस, स्पोट्र्स ट्राउज़र्स और शॉट्र्स के साथ पहना जाता है।

ट्रेनिंग शूज़ : इनका सोल ज़मीन पर पूरी पकड़ देता है। इन्हें पैंट के साथ न पहनें।

स्त्रियों को हैं पसंद

कई रंगों व डिज़ाइन में आने वाले इन फुटवेयर्स का फैशन बहुत जल्दी बदलता है। इनको अमूमन पांच कैटेगरी में बांटा जा सकता है।

हाई हील : इनमें किटेन, स्टिलेटोज़, प्रिज़्म, पपी और वेज जैसी कई हील्स आती हैं। ये ज़्यादातर फॉर्मल मौ$कों पर पहने जाते हैं।

म्यूल्स : ये जूते पीछे से ढके हुए नहीं होते हैं। अकसर स्कट्र्स के साथ पहने जाने वाले इन जूतों को बैकलेस शूज़ भी कहा जाता है।

स्लिंगबैक्स : ये हील्स के ऊपर एक स्ट्रैप के ज़रिये पैरों को पीछे की ओर से बांधे रखते हैं। इन्हें स्कर्ट, जींस और फॉर्मल पैंट्स के साथ पहना जा सकता है।

बैलेरिना या बेली : ये आगे से ढकी हुई होती हैं। इन्हें कैज़ुअल और फॉर्मल, दोनों ही मौकों पर पहना जा सकता है।

कोर्ट शूज़ : इनका लुक बेली जैसा होता है मगर इनकी हील्स इन्हें अलग बनाती हैं। ज़्यादातर फॉर्मल कपड़ों के साथ पहने जाने वाले इन जूतों को पंप शूज़ भी कहा जाता है।

जब पहनें लेदर के जूते

लेदर के जूतों का रखरखाव थोड़ा कठिन होता है पर ध्यान दिया जाए तो इन्हें सहेज कर रखा जा सकता है।

चुनें सही पॉलिश : इन जूतों पर कभी भी लिक्विड बेस पॉलिश का इस्तेमाल न करें। इन्हें साफ करने के लिए वैक्स बेस पॉलिश उपयुक्त रहती है।

रैक में रखें : इनको हमेशा बंद शू रैक में रखें। इससे उनकी चमक लंबे समय तक बरकरार रहती है।

इनसे बचाएं : इनको बारिश के दिनों में पहनने से बचें। अगर पहनना ही पड़े तो अलसी के तेल से कोटिंग कर सकते हैं। इन्हें हमेशा पानी, धूल और नमी से बचाकर रखें।

बनाए रखें इनका आकार : इन्हें पहनने के बाद हमेशा डिब्बे में रखें। इनके लिए शू-ट्री का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, जो पैर के पंजे की तरह होते हैं और इनसे जूते का आकार बना रहता है।

दीपाली पोरवाल

फुटवेयर डिज़ाइनर स्वाति मोदो से बातचीत पर आधारित

ट्रेंडी फुटवेयर्स

एक शोध के अनुसार, स्वास्थ्य के लिए लाभदायक फुटवेयर्स को ज़्यादा प्राथमिकता दी जाती है। इसी से प्रेरित होकर लिबर्टी ने लॉन्च की है फुटवेयर्स की हीलर्स रेंज।

लि बर्टी में फैशन के साथ ही व्यक्ति के आराम का भी $खयाल रखा जाता है। शरीर और दिमा$ग को दुरुस्त रखने की शुरुआत पैरों से की जा सकती है। हीलर्स को लॉन्च करने का उद्देश्य यही था कि लोगों को उनके हर कदम के साथ फुट मसाज मिल सके।

स्वस्थ रहने के लिए ज़रूरी है कि सुविधाजनक फुटवेयर्स पहने जाएं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हीलर्स लाया है अलग तरह के फुट मसाजर्स, जूते, इनसोल्स और सैंडल्स। ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए विशेष फुटवेयर तकनीक व एडवांस्ड फुट बायोमेकैनिक्स का इस्तेमाल किया गया है। फॉर्मल से लेकर कैज़ुअल डिज़ाइंस तक में लॉन्च किए गए ये फुटवेयर्स सुरक्षा व सहजता का प्रतीक हैं, जिनसे लोगों को एडिय़ों, घुटनों व पीठ के दर्द से राहत मिल सके।

हीलर्स में सामान्य तौर पर 6 मॉडल्स निकाले गए हैं : एच तकनीक वाले फुटवेयर का सोल नींद के पैटर्न को सुधारते हुए ब्लड सर्कुलेशन का भी विशेष ध्यान रखता है। एच 8 तकनीक वाले फुटवेयर्स संपूर्ण शरीर में ऊर्जा का संचार करते हुए मसल्स की टेंशन को कम करते हैं। एच 4 तकनीक से बने हीलर्स फुटवेयर तनाव को दूर भगाते हैं। मेमोरी फोम तकनीक वाले फुटवेयर्स पैरों को थकने से बचाते हैं। एचए तकनीक से लैस फुटवेयर्स को एक्यूप्रेशर की तर्ज पर बनाया गया है। एच 1 तकनीक वाले फुटवेयर्स एडिय़ों के दर्द को कम करते हुए पैरों को आराम पहुंचाते हैं।

पैरों से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए ये स्टाइलिश और आरामदायक फुटवेयर्स सर्वश्रेष्ठ विकल्प हैं।

 

Posted By: Sakhi User