अलमारी में रखे पुराने कपड़ों से बनाएं नया Rakhi Look, कृतिका कामरा ने बताए आसान टिप्स
अभिनेत्री कृतिका कामरा ने रक्षाबंधन के लिए अपने फैशन टिप्स साझा किए, जिसमें परंपरा और आधुनिकता का संतुलन व आराम ...और पढ़ें

कृतिका कामरा के रक्षाबंधन फैशन सीक्रेट्स सादगी और स्टाइल का परफेक्ट मेल (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
सादगीपूर्ण, पारंपरिक और आरामदायक एथनिक वियर पसंद करती हैं
पुराने कपड़ों को एक्सेसरीज से नया लुक देने की सलाह
बजट-फ्रेंडली फैशन और परिवार संग समय महत्वपूर्ण बताया
प्रियंका सिंह, नई दिल्ली। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का जश्न मनाने का ही त्योहार नहीं, बल्कि त्योहार के अनुरूप सजना-संवरना भी इस जश्न का हिस्सा है। अभिनेत्री कृतिका कामरा के लिए त्योहार पर किए जाने वाले फैशन का मतलब है, परंपरा के साथ आधुनिकता का संतुलन और आराम। उनके छोटे भाई राहुल कामरा भी फैशन के मामले में उनसे कम नहीं। रक्षाबंधन पर अपने लुक, तैयारियों और इस त्योहार से जुड़ी बचपन की यादों के बारे में कृतिका से बातचीत।
भारी-भरकम लुक नहीं, सादगी है पसंद
रक्षाबंधन के लिए अपने कपड़ों को लेकर कृतिका कहती हैं कि मुझे बहुत भारी-भरकम लुक की बजाय ऐसा कुछ पहनना पसंद है, जिसमें सादगी हो, पारंपरिक हो, लेकिन उसमें आज के दौर की झलक भी हो। एलिगेंट एथनिक आउटफिट के साथ मैं कुछ ज्वेलरी और नेचुरल मेकअप करूंगी।
रक्षाबंधन का त्योहार इतना खास होता है कि कपड़े भी उसी अहसास को दर्शाते हैं। त्योहारों पर फैशन की खूबसूरती इसी में है कि अपने व्यक्तित्व को बरकरार रखते हुए उसमें थोड़ा पारंपरिक अंदाज जोड़ें। बाकी फैशन के साथ आराम जरूरी है। मैं ऐसे कपड़े चुनती हूं, जो खूबसूरत होने के साथ-साथ पहने में सहज और अपने जैसा महसूस कराएं।
आखिरी पल में चुना लुक भी हो सकता है खास
त्योहारों पर बेस्ट दिखने के लिए कई कलाकार बहुत पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं। हालांकि कृतिका इस पर कहती हैं कि मैं बहुत पहले से तैयारी करने वालों में से नहीं हूं। अगर कोई खास मौका हो, तो मैं कुछ दिन पहले अपने विकल्प देख लेती हूं, लेकिन मेरे लिए सबसे जरूरी है कि कपड़े में मुझे आराम महसूस होना चाहिए। कई बार जो लुक आखिरी पल में चुना जाता है, वही सबसे अच्छा निकलता है।
भाई के साथ मैचिंग कपड़ों की यादें
अपने छोटे भाई राहुल के साथ रक्षाबंधन पर मैचिंग कपड़े पहनने को लेकर कृतिका आगे बताती हैं कि बचपन में ऐसे कई मौके रहे होंगे, क्योंकि उस उम्र में ऐसा करना आम बात थी। हालांकि, अब ऐसा कम ही हो पाता है। हां, कई बार दोनों के कपड़ों के रंग एक जैसे जरूर होते हैं, जो दिखने में अच्छा लगता है। मुझे लगता है कि भाई-बहन के कपड़े मैच हों या न हों, साथ में अच्छा समय बिताना ज्यादा जरूरी है। बाकी फैशन को लेकर भाई-बहनों का एक-दूसरे से प्रेरित होना भी आम बात है। अगर राहुल मेरे किसी लुक की नकल कर लें, तो मुझे अच्छा ही लगेगा।
बचपन में बजट फ्रेंडली था त्योहारों पर फैशन करना
बचपन में कृतिका के लिए त्योहारों पर फैशनेबल कपड़े लेना बजट पर निर्भर करता था। वह कहती हैं कि आज की तरह बचपन में हर त्योहार के लिए नए कपड़े खरीदना जरूरी नहीं होता था। घर में पहले से मौजूद अच्छे कपड़ों को अलग तरह से स्टाइल करके नई ज्वेलरी के साथ पहन लेती थी। मुझे आज भी लगता है कि बजट के अनुसार फैशन करना सही होता है।
अलमारी में जो कपड़े रखे हैं, उन्हीं के साथ कुछ क्रिएटिव करना चाहिए। एक अच्छा दुपट्टा या कानों की बाली भी पूरे लुक को बदल सकती है। बचपन में फैशन को लेकर इतनी समझ नहीं थी कि कौन सा कलर ट्रेंड में है या कौन सा नहीं। बस जो कपड़े अच्छे लगते थे, वही पहनकर बहुत खुश हो जाते थे। शायद यही वजह है कि बचपन की उन छोटी-छोटी यादों में फैशन से ज्यादा उस दिन की खुशी और परिवार के साथ बिताया समय याद रहता है।
