यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 24, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मिलिए बिहारी किसान नागराज नखत से, यू-ट्यूब के माध्यम से हजारों किसानों ने इनसे सीखी ड्रैगन फ्रुट्स की खेती से लेकर मार्केटिंंग के गुर
बिहारी किसान नागराज नखत आज हजारों ड्रैगन फ्रुट की खेती करने वाले किसानों के लिए रोल माडल हैं। यू-ट्यूब के ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, किशनगंज। सूबे में ड्रैगन फ्रुट्स की खेती के रूप में किशनगंज जिले को जाना जाता है। इसकी खेती की शुरूआत भी यहां से हुई थई। अब इसकी खेती की कहानी अब यू-ट्यूब पर भी धूम मचा रही है। ड्रैगन फ्रुट्स की खेती पर आधारित तैयार डाक्यूमेंट्री फिल्म को करीब दस लाख लोगों ने पसंद किया वहीं हाल के दिनों हैदराबाद में आयोजित एग्री फिल्म फेस्टिवल में हिन्दी फिल्म के रूप में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। पहले किशनगंज के ड्रैगन फ्रुट्स की कहानी लोगों की जुबानी ही सुनी जाती थी लेकिन अब यू-ट्यूब के माध्यम से भी लोगों तक पहुंच रही है।
जिला के ठाकुरगंज के किसान नागराज नखत ने सबसे पहले इसकी खेती की थी। कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से धीरे-धीरे इसका विस्तार किया गया। अब अन्य जिलों में भी इसके प्रति किसानों की रूचि बढ़ी है। करीब 10 वर्ष पूर्व जिले में दो एकड़ में इसकी खेती शुरू की गई थी। यह रकबा अब बढ़कर 20-25 एकड़ तक पहुंच चुका है और एक दर्जन से अधिक किसान इसकी खेती में जुड़े हुए हैं।
पुरस्कार प्राप्त करने पर कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानी डा. हेमंत कुमार ने बताया कि यह पुरस्कार किशनगंज ही नहीं, पूरे सूबे के लिए गर्व की बात है। ड्रैगन फ्रुट्स और उसकी खेती के बारे में अक्सर कई जगहों से पूछे जाने के कारण उस पर डाक्यूमेंट्री बनाने का निर्णय लिया गया जो आज किशनगंज के ड्रैगन फ्रुट्स के नाम को और ऊपर लेकर गया है।
बिहार के अलावा बंगाल में हो रहा सप्लाई
जिला में करीब 20-25 एकड़ में हो रहे ड्रैगन फ्रुट्स की खेती से आए उपज को स्थानी किशनगंज के बाजार के अलावा सिलीगुड़ी, कलिंगपांग सहित आसपास के क्षेत्र में किया जाता है। किसान बताते हैं कि 250-450 रुपये किलो तक इसकी बिक्री की जाती है। कोरोना काल में इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में काफी चर्चा में आया था। इसके बाद अब धीरे-धीरे अन्य कोलकाता, पटना सहित अन्य जगहों के व्यापारी भी किसान से फ्रुट्स की खरीद के लिए संपर्क में आए हैं।
कोसी-सीमांचल में हो रहा विस्तार
किशनगंज के ठाकुरगंज इलाके में मुख्य रूप से हो रहे ड्रैग्न फ्रुट्स की खेती का विस्तार अब आसपास के जिलों में हो रहा है। इसके लिए पूर्णिया, कटिहार, अररिया, मधेपुरा के किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र किशनगंज द्वारा प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर खेती का गुर और संबंधित जानकारी दे रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अन्य जिलों के किसान भी अब कम क्षेत्रफल में ही खेती को शुरू किए हैं।
