दोस्तो, यूनेस्को (युनाइटेड नेशनल एजुकेशनल, साइंटिफिक ऐंड कल्अचरल ऑर्गनाइजेशन) ने हाल ही में व‌र्ल्ड हेरिटेज की लिस्ट में भारत की दो साइट्स को शामिल किया है। इनमें कल्चरल साइट्स की कैटेगरी में गुजरात के पाटण स्थित रानी की वाव और नेचुरल साइट्स की कैटेगरी में हिमाचल प्रदेश के कुल्लू स्थित ग्रेट हिमालय न नेशनल पार्क शामिल हैं ..

रानी की वाव

-यह गुजरात के पाटण जिले में एक सीढ़ी वाला कुआं है। इसे रानी उदयामती ने अपने पति राजा भीमदेव की याद में वर्ष 1063 में बनवाया था। राजा भीमदेव गुजरात के सोलंकी राजवंश के संस्थापक थे।

-मेहसाणा जिले से 40 किलोमीटर दूर स्थित पाटण उन दिनों गुजरात की राजधानी हुआ करती थी।

-भूगर्भीय बदलावों के कारण आने वाली बाढ़ और लुप्त हुई सरस्वती नदी के कारण यह बहुमूल्य धरोहर तकरीबन 700 सालों तक गाद की परतों तले दबी रही। बाद में भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे खोजा।

-वाव के खंभे सोलंकी वंश और उसके आर्किटेक्चर के नायाब नमूने हैं। वाव की दीवारों और खंभों पर ज्यादातर नक्काशियां राम, वामन, महिषासुरमर्दिनी, कल्कि जैसे अवतारों के कई रूपों में भगवान विष्णु को समर्पित हैं।

-इस वाव में एक छोटा द्वार भी है, जहां से 30 किलोमीटर लम्बी सुरंग निकलती है।

-रानी की वॉव ऐसी इकलौती बावड़ी है, जो व‌र्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल हुई है।

द ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क

-हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कंजरवेशन एरिया (एचएनपीसीए) को यूनेस्को की व‌र्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में नेचुरल कैटेगरी में जगह मिली। इस लिस्ट में यह भारत की एक ही एंट्री थी।

-हिमाचल में स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कुल 754.4 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।

-यहां दो वन्यजीव सैंक्चुअरीज हैं।

-यहां कुछ वर्जिन कोनीफेरस फारेस्ट्स हैं। एल्पाइन चारागाह और ग्लेशियर इस पार्क का बड़ा हिस्सा है।

-यहां मस्कन डीयर, ब्राउन बीयर, गोराल, थार, चीता, बर्फानी

चीता, भराल, सीरो, मोनल, कलिज, कोकलास, चीयर, ट्रागोपान, बर्फानी कौआ जैसे जंगली पशु-पक्षी पाए जाते हैं।

-जीएचएनपीसीए के अलावा भारत के छह नेचुरल साइट्स यूनेस्को की व‌र्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में पहले से ही शामिल हैं।

2014 में व‌र्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल दुनिया के अन्य स्थल

सिल्क रूट (चीन) : 5000 किलोमीटर लंबा सिल्क रूट (रेशम मार्ग) लगभग 2000 साल पहले एशिया और यूरोप के बीच व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मुख्य मार्ग था।

-द ग्रैंड कैनाल (चीन) : यह नहर चीन के बीजिंग से शुरू होकर झेझियांग तक जाती है। करीब 5वीं शताब्दी से ही अस्तित्व में है।

-नामहैंसेंगसियोंग (कोरिया रिपब्लिक) : सिओल के साउथ-ईस्ट में स्थित यह स्थान चौदहवीं शताब्दी में कोरिया की राजधानी था।

-वोल्गा हिस्टोरिकल ऐंड ऑर्कि योलॉजिकल कॉम्प्लेक्स (रूस) : वोल्गा नदी के किनारे 7वीं और 15वीं शताब्दी के बीच बसी तातारों की राजधानी।

-प्री-कोलंबियन चीफडम सेटलमेंट्स विद स्टोन स्फेयर्स ऑफ द डिक्किस (कोस्टारिका): दक्षिणी कोस्टारिका के डिक्किस डेल्टा में चार ऑर्कियोलॉजिकल साइट्स।

-ट्रैंगन सीनिक लैंडस्केप कॉम्पलेक्स (वियतनाम) : रेड नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थिट करीब 30 हजार साल पुरानी पहाड़ियां।

-माउंट हैमिंगटन रेंज वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी (फिलीपीन्स) : हैमिंग्टन की पहाड़ियों में स्थित आकर्षक सेंक्चुअरी

-स्टीवंसक्लाइंट (डेनमार्क) : 15 किलोमीटर लंबी फॉसिल्स (जीवाश्म) वाली करीब 650 लाख साल पुरानी कोस्टल क्लिफ।

व‌र्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल होने के मुख्य मानक

-इतिहास के किसी खास समय में स्थापत्य, टेक्नोलॉजी या डिजाइन का नायाब नमूना

-पेड़-पौधे, जीव-जंतु, जलीय, इकोसिस्टम या बॉयलॉजिकल प्रक्रिया का बेहतरीन उदाहरण हो।

-वह किसी सभ्यता की सांस्कृतिक परंपरा को प्रदर्शित करता हो।

-भूमि, समुद्र और पर्यावरण से इंसानी तालमेल की बेहतरीन मिसाल हो।

हेरिटेज लिस्ट में शामिल होने का फायदा

-व‌र्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल करने का मतलब है उसके व्यापक महत्व को मान्यता देना।

-इससे दोनों स्थलों को दुनिया के पर्यटन नक्शे पर जगह मिलेगी। इससे यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

-भारत की ऐतिहासिक महत्व की कुल 32 साइट्स व‌र्ल्ड हेरिटेज साइट में दर्ज हैं। इनमें 25 कल्चरल, जबकि 7 नेचुरल कैटेगरी में शामिल हैं।

पढ़ें:क्या टैलेंट को सिर्फ अंकों के आधार पर आंकना चाहिए?

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप