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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 19, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

महिला थानों में दी जा सकती घरेलू हिंसा से जुड़ी शिकायतें

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Published: Thu, 19 May 2016 07:04 PM (IST)

जागरण संवाददाता, कैथल : हरियाणा सरकार द्वारा विशेष पहल करते हुए प्रत्येक जिला में स्थित महिला थान

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जागरण संवाददाता, कैथल :

हरियाणा सरकार द्वारा विशेष पहल करते हुए प्रत्येक जिला में स्थित महिला थानों में महिलाओं व बाल विवाह से संबंधित कार्यालय स्थापित हैं। इन कार्यालयों में घरेलू ¨हसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत शिकायतों का निपटारा किया जाता है। इन अधिनियमों के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को एक वर्ष से दो वर्ष तक कारावास तथा 20 हजार रुपए से एक लाख रुपए तक जुर्माना या दोनों भी हो सकते हैं।

जिला उपायुक्त रवि प्रकाश गुप्ता ने बताया कि यदि किसी महिला पर शारीरिक ¨हसा, भावानात्मक ¨हसा, यौन ¨हसा तथा आर्थिक ¨हसा की जाती है तो वह घरेलू ¨हसा महिला संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत संरक्षण अधिकारी के माध्यम से या सीधे तौर पर न्यायालय से अपने एवं अपने बच्चों के संरक्षण का आदेश प्राप्त कर सकती हैं।

इसके अतिरिक्त आवश्यकता पड़ने पर महिला मुफ्त कानूनी सहायता, ¨हसा होने पर मुफ्त डाक्टरी जांच की सुविधा भी ले सकती हैं। इस अधिनियम के तहत आदेशों की अवमानना होने पर प्रतिपक्ष के खिलाफ केस दर्ज होगा, जिसमें एक साल जेल या 20 हजार रुपए जुर्माना अथवा दोनों भी हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत विवाह के लिए लड़की की आयु 18 वर्ष तथा लड़के की आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। विवाह के लिए निर्धारित की गई आयु से कम आयु के बच्चों का विवाह करना इस अधिनियम के विरूद्ध है।

बाल विवाह तथा घरेलू ¨हसा से पीड़ित महिला के संबंध में उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक या स्थानीय पेहवा चौक स्थित महिला पुलिस थाना में कार्यरत घरेलू ¨हसा संरक्षण अधिकारी एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी सुनीता को भी शिकायत दी जा सकती है।