WORLD RADIO DAY 13 Feb

हाल के वर्षों में एफएम चैनल्स ने रेडियो की पॉपुलरिटी काफी बढ़ा दी है। यही कारण है कि आज के युवाओं में इससे जुडऩे का खूब क्रेज देखा जा रहा है। हर साल 13 फरवरी को मनाये जाने वाले वल्र्ड रेडियो डे के मौके पर जानें रेडियो में आकर्षक अवसरों के बारे में...

गाजीपुर से एवरेज माक्र्स के साथ इंटर पास कर विकास चंद्र मिश्र ने दिल्ली के डीएवी डिग्री कॉलेज में बीए प्रोग्राम में एडमिशन लिया। तब तक उनके मन में करियर को लेकर कोई क्लियर कॉन्सेप्ट नहींथा। उन्हें गिटार बजाना, एफएम रेडियो सुनना, एमटीवी के स्पिलिट्ज जैसे प्रोग्राम अच्छे लगते थे। बीए के बाद वह लखनऊ के आइआइएलएम इंस्टीट्यूट से एमबीए करने चले गए। पूल कैैंपस प्लेसमेंट के दौरान जब उनका सलेक्शन रेडियो मिर्ची में हुआ, तो मानो उनके मन की मुराद पूरी हो गई। आज वह रेडियो मिर्ची में काम कर करके अपने पैशन को भी जी रहे हैं और मैनेजमेंट स्किल भी यूज कर रहे हैं। हो सकता है कि आपके अंदर भी एक रेडियो जॉकी, क्रिएटिव राइटर, प्रोड्यूसर,मीडिया मैनेजर छिपा हो, बस पहचानें उसे। आइए जानते हैं रेडियो में करियर ऑप्शंस के बारे में...

रेडियो जॉकी

गुड मॉर्निंग दिल्ली, मैं हूं आपकी हमसफर दोस्त... मैं हूं आपका दोस्त लव गुरु...ये तमाम डायलॉग्स हैं, जिनसे हम एफएम रेडियो पर रोजाना रू-ब-रू होते हैं। यह आवाज आरजे यानी रेडियो जॉकी की होती है। सुबह से लेकर देर रात तक अपनी मीठी, दमदार आवाज और हाजिरजवाबी से आपका एंटरटेनमेंट करने वाले रेडियो जॉकी किसी भी रेडियो चैनल का प्रमुख चेहरा होते हैं।

एलिजिबिलिटी : 12वीं के बाद रेडियो जॉकी में सर्टिफिकेट या डिप्लोमा या मास कम्युनिकेशन में डिग्री-डिप्लोमा।

स्किल्स : अच्छी आवाज के साथ-साथ अपनी बातों से श्रोताओं को बांधे रखने की कला, प्रजेंटेशन स्किल, हिंदी के साथ अंग्रेजी और दूसरी भाषाओं पर अच्छी पकड़।

न्यूज रीडर

न्यूज रीडर रेडियो पर न्यूज बुलेटिन पेश करते हैं। फिलहाल यह वर्क प्रोफाइल ऑल इंडिया रेडियो में ही है।?प्राइवेट एफएम चैनलों में न्यूज बुलेटिन्स रेडियो जॉकी ही प्रजेंट कर देते हैं।

एलिजिबिलिटी : जर्नलिज्म में डिग्री या डिप्लोमा।

स्किल्स : साफ आवाज, करेंट अफेयर्स की समझ।

प्रोड्यूसर या प्रोग्राम डायरेक्टर

प्रोग्रामिंग सेक्टर के दो अंग हैं। पहला प्रोड्यूसर और दूसरा रेडियो जॉकी। एफएम में जो भी आप सुनते हैं, वह इन दोनों का काम होता है। प्रोड्यूसर रेडियो जॉकी की जुबान को शब्द देता है। इसके अलावा, प्रोग्राम्स बनाने की जिम्मेदारी भी इनकी ही होती है।

एलिजिबिलिटी : मास कम्युनिकेशन या रेडियो प्रोडक्शन में डिग्री या डिप्लोमा।

स्किल्स : लैंग्वेज की अच्छी नॉलेज, यूथ ओरिएंटेड वोकैब वाली लैंग्वेज की समझ, लाइफ को ईजी स्टाइल में प्रजेंट करना आता हो।

कंटेंट राइटर

अगर आप अच्छे राइटर हैं, तो यह रेडियो में आपके करियर के लिए प्लस प्वाइंट बन जाता है, क्योंकि प्रोग्राम के तहत राइटिंग सबसे इम्पॉर्र्टेंट काम माना जाता है।

स्किल्स : आपको अपने आस-पास की दुनिया के प्रति जिज्ञासु बनना पड़ेगा। लिटरेचर, मैगजींस और न्यूजपेपर पढऩे की आदत डालनी होगी। रेडियो स्टेशंस पर नजर रखनी होगी। स्टोरी को इंट्रेस्टिंग तरीके से प्रजेंट करना होगा।

ट्रांसलेटर

न्यूज बुलेटिन और प्रोग्राम के लिए तैयार स्क्रिप्ट को ट्रांसलेट करने का काम ट्रांसलेटर करते हैं। ऑल इंडिया रेडियो (एआइआर) के मुख्य केन्द्र दिल्ली के अलावा विभिन्न क्षेत्रीय केन्द्रों में हिंदी, अंग्रेजी के आलावा कई अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के ट्रांसलेटर की नियुक्ति होती है। एलिजिबिलिटी : ट्रांसलेटर के लिए अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी या संबंधित क्षेत्रीय भाषा की अच्छी जानकारी आवश्यक है।

स्किल्स : भाषा पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए।

रिपोर्टर

जिस तरह से टीवी चैनल्स और न्यूजपेपर्स के लिए रिपोर्टर होते हैं, उसी तरह रेडियो न्यूज बुलेटिन के लिए भी रिपोर्टर नियुक्त किए जाते हैं।

एलिजिबिलिटी : पत्रकारिता में डिग्री या डिप्लोमा करने के बाद इस फील्ड में आसानी से एंट्री मिल जाती है। स्किल्स : न्यूज की समझ होने के साथ-साथ स्पष्ट आवाज बेहद जरूरी है।

ब्रॉडकास्ट इंजीनियर

रेडियो प्रोग्राम को ऑनएयर करने और उसके टेक्निकल इक्विपमेंट्स के रख-रखाव की जिम्मेदारी टेक्निकल टीम और ब्रॉडकॉस्ट इंजीनियर की होती है।

एलिजिबिलिटी : इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल और कम्युनिकेशनमें डिग्री या डिप्लोमा होल्डर्स।

एचआर

एफएम रेडियो चैनल्स में होने वाले रिक्रूटमेंट प्रॉसेस का सारा काम एचआर डिपार्टमेंट करता है।

एलिजिबिलिटी : रेडियो के एचआर फील्ड में जाने के लिए एचआर ब्रांच में एमबीए या पीजीडीबीएम होना जरूरी है।

मार्केटिंग

प्राइवेट एफएम के बढ़ते दायरे और बढ़ते कॉम्पिटिशन ने रेडियो सेक्टर में मार्केटिंग सेक्शन को अहम बना दिया है। मार्केट में अपने चैनल की बेहतर पहचान के साथ-साथ श्रोताओं का फेवरेट बनने के लिए मार्केटिंग डिपार्टमेंट हमेशा बेहतर प्रयास करता है।

एलिजिबिलिटी : मार्केटिंग में एमबीए या पीजी डिप्लोमा कर चुके युवा रेडियो के सेल्स और मार्केटिंग सेक्शन से जुड़ सकते हैं।

एकाउंट

रेडियो में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी से लेकर कंपनी के आय-व्यय का सारा काम देखने के लिए एकाउंट सेक्शन भी होता है।

एलिजिबिलिटी : कॉमर्स और एकाउंट बैकग्राउंड के लोगों को इस सेक्शन में एंट्री मिलती है।

प्राइवेट एफएम में एंट्री

प्राइवेट एफएम चैनल्स कैंपस प्लेसमेंट के अलावा रेगुलर बेसिस पर आरजे हंटिंग प्रोग्राम्स आयोजित करते रहते हैं। वेबसाइट्स के करियर सेक्शंस में वैकेेंसीज की डिटेल रहती है। शुरुआत में स्क्रीनिंग टेस्ट नॉक-आउट राउंड होता है, जिसमें सिचुएशन बेस्ड क्वैश्चंस पूछे जाते हैं। इसके बाद डिपार्टमेंट हेड और लास्ट में एचआर हेड इंटरव्यू लेते हैं। पूरे इंटरव्यू के दौरान नॉलेज से ज्यादा आपकी पर्सनैलिटी चेक की जाती है।

ऑल इंडिया रेडियो में एंट्री

ऑल इंडिया रेडियो में न्यूज रीडर, रिपोर्टर, ट्रांसलेटर, प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव, ट्रांसमिशन एग्जीक्यूटिव, इंजीनियर्स आदि पदों पर भर्ती के लिए प्रसार भारती नोटिफिकेशन निकालती है। इनकी सूचना आप http://prasarbharati.gov.in/Opportunities/Employment/Pages/default.aspx के जरिए हासिल कर सकते हैं। ये भर्तियां आम तौर पर कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर होती हैं। कभी-कभार एसएससी या यूपीएससी भी इनके लिए एग्जाम कंडक्ट कराते हैं। सलेक्शन रिटेन टेस्ट, ऑडिशन और इंटरव्यू के बाद बने ऑल इंडिया मेरिट के बेस पर किया जाता है।

हाजिरजवाबी से सफलता

रेडियो जॉकी यानी आरजे बनने के लिए सबसे जरूरी है पैशन। अगर आपकी आवाज बहुत दमदार नहीं भी है, तो उसे प्रैक्टिस से तराशा जा सकता है। लेकिन आपको हाजिरजवाब और आत्मविश्वास से भरपूर होना होगा। आरजे जितना प्रजेंटेबल होगा और लोगों के इमोशंस को भांप कर अपनी बात रखेगा, वह उतना ही पसंद किया जाएगा। जो यंगस्टर्स इसमें करियर बनाना चाहते हैं, उन्हें समझना होगा कि यह एक सेल्फ ड्रिवन फील्ड है, जिसमें इंटर्नशिप से शुरुआत कर आप इंडस्ट्री के शीर्ष पर पहुंच सकते हैं। शुरुआत 30 से 35 हजार रुपये से होती है, जो अनुभव के साथ लाखों में तब्दील हो जाती है।

अनुज वशिष्ठ, एक्टर एवं वॉयस ब्रॉडकास्टर

(दिल्ली के पहले लव गुरु, रेडियो मंत्रा)

प्रजेंटेशन दिलाता है सक्सेस

पापा चाहते थे कि मैं टेनिस प्लेयर बनूं। 12 साल तक टेनिस खेली भी, लेकिन मजा नहीं आया। फ्रेंड्स और मां ने ऑल इंडिया रेडियो में अप्लाई करने को कहा। मेरी आवाज उतनी अच्छी नहीं थी। फिर सोचा कि अमिताभ बच्चन को भी पहले ऑडिशन में यही कहकर रिजेक्ट किया गया था कि उनकी आवाज अच्छी नहीं है। आज वे मिलेनियम स्टार हैं। कॉन्फिडेंस के साथ ऑडिशन दिया। सलेक्शन हो गया। फिर रेडियो वन में आया। मुझे समझ में आ गया कि रेडियो जॉकी बनने के लिए आवाज से कहीं ज्यादा प्रजेंटेशन अच्छा होना चाहिए।

एम जे पृथ्वी, रेडियो वन, बेंगलुरु

प्रोग्रामिंग की है डिमांड

रेडियो इंडस्ट्री इस समय अपने शिखर पर है। डिजिटल स्पेस में यह सबसे तेजी से उभरता हुआ माध्यम है। अब जब प्राइवेट एफएम रेडियो चैनल्स के फेज-3 के ऑक्शन को हरी झंडी मिल चुकी है, तो यहां ट्रेंड रेडियो प्रोफेशनल्स की डिमांड भी बढ़ेगी, खासकर आरजे की, जो स्थानीय सेंटिमेंट्स को समझ कर उनसे जुडऩे का हुनर रखते हों। वैसे, इस समय रेडियो प्रोग्रामिंग सबसे एक्साइटिंग, चैलेंजिंग और रिवॉर्डिंग करियर है। अच्छी बात यह है कि इंडस्ट्री का माहौल बहुत उत्साहवर्धक और दोस्ताना है।

अपूर्वा पुरोहित, सीईओ, रेडियो सिटी

इंस्टीट्यूट वॉच

-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, नई दिल्ली, www.iimc.nic.in

-मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, अहमदाबाद, www.micaindia.net

-एजेके एमसीआरसी, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली, http://ajkmcrc.org

-माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल और नोएडा www.mcu.ac.in

-वाईएमसीए, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली

www.newdelhiymca.org

इनपुट: अंशु सिंह, मिथिलेश श्रीवास्तव और प्रसन्न प्रांजल

Posted By: Babita kashyap