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पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में माओवादी IED विस्फोट, पत्ता तोड़ने गए दो ग्रामीण गंभीर घायल

By Sudhir PandeyEdited By: Shashank Baranwal
Published: Tue, 10 Feb 2026 10:17 PM (IST)

पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में माओवादियों द्वारा बिछाए गए आईईडी विस्फोट में पत्ता तोड़ने गए दो ग्रामीण गंभीर रूप ...और पढ़ें

सारंडा जंगल में आइईडी विस्फोट। सांकेतिक तस्वीर

सारंडा जंगल में आइईडी विस्फोट। सांकेतिक तस्वीर

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संवाद सूत्र, मनोहरपुर। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में माओवादियों द्वारा सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के लिए बिछाए गए लैंड माइंस निर्दोष ग्रामीणों और बेजुबान वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

ताजा मामले में मंगलवार की शाम जराइकेला थाना क्षेत्र अंतर्गत सारंडा के तिरिलपोसी जंगल में पत्ता तोड़ने गए दो ग्रामीण आइईडी विस्फोट की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। घटना मंगलवार शाम करीब चार बजे की बताई जा रही है। घायल ग्रामीणों की पहचान तिरिलपोसी निवासी जयसिंह चेरवा और सालाई चेरवा के रूप में हुई है।

जानकारी के अनुसार मंगलवार की सुबह छह से सात ग्रामीण पत्ता तोड़ने जंगल गए थे। शाम को लौटने के क्रम में जयसिंह का पैर जमीन में दबे आइईडी पर पड़ गया, जिससे जोरदार विस्फोट हो गया। विस्फोट की चपेट में आकर जयसिंह और उसके साथ चल रहे सालाई गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद देर शाम तक सुरक्षाबल घायलों को जंगल से बाहर निकालने में जुटे रहे। अंधेरा, घना जंगल और इलाके में अन्य आइईडी होने की आशंका के कारण राहत एवं बचाव कार्य में काफी कठिनाई आ रही है।

वहीं विस्फोट के बाद जयसिंह और सालाई के साथ गए अन्य ग्रामीण भी डर के कारण जंगल से बाहर नहीं निकल सके हैं। बताते चलें कि सारंडा में आइईडी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

बीते महीनों में आईईडी विस्फोट की चपेट में आकर कई सुरक्षाकर्मियों की जान जा चुकी है, जबकि कई घायल हुए हैं। इसके अलावा अब तक तीन जंगली हाथियों की मौत आइईडी की चपेट में आने से हो चुकी है और एक घायल हाथी जंगल में भटक रहा है।

पूर्व में कोलबोंगा और दीघा जंगल क्षेत्र में हुए आइईडी विस्फोट में दो किशोरियों की मौत तथा दो महिलाओं के गंभीर रूप से घायल होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।

लगातार हो रही इन घटनाओं से सारंडा के जंगलों में रहने और आजीविका के लिए निर्भर ग्रामीणों में भय व्याप्त है। ग्रामीणों ने जंगल क्षेत्र को आइईडी मुक्त कराने और सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था करने की मांग की है।

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