मो. तकी, चाईबासा : सारंडा-पोड़ाहाट के बीहड़ में नक्सलियों का आतंक एक समय इतना था कि स्कूलों के ब्लैक बोर्ड में ए फोर एके-47 व बी फोर बंदूक की पढ़ाई होती थी। लेकिन अब उसी सारंडा-पोड़ाहट के बीहड़ क्षेत्र में सैकड़ों स्कूली बच्चे लाइब्रेरी में पहुंच कर स्कूली व प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। इन्हीं गण के तंत्र की वजह से विपरीत परिस्थिति में भी भारत देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्कूली शिक्षा के अतिरिक्त बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए नई सोच प्रकाश लागुरी ने शुरु किया है। जिससे सैकड़ों बच्चे जुड़ कर अपने ज्ञान को बढ़ाने में लगे हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए प्रकाश लागुरी ने कहा कि पश्चिम सिंहभूम काफी पिछड़ा आदिवासी बहुल क्षेत्र है। शिक्षा में भी उतने बेहतर नहीं है। इसलिए ख्याल आया कि क्यों ना बच्चों को स्कूली शिक्षा के अतिरिक्त शिक्षा से जोड़ा जाये। इसके बाद सुदुर क्षेत्रों में लाइब्रेरी खोलने की तैयारी किये। गोइलकेरा प्रखंड अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। वहां पर बच्चों को स्कूली शिक्षा तो मिल जाता है लेकिन इसके अलावा कोई व्यवस्था नहीं थी। इसलिए गोइलकेरा प्रखंड मुख्यालय सीआरपीएफ के बगल में एक कमरा का व्यवस्था कर वहां पर लाइब्रेरी खोला गया। इसकी जिम्मेदारी 2 स्थानीय युवकों को दी गई। लाइब्रेरी से लगभग 150 स्कूली बच्चे जुड़ चुके हैं। अब वहां पर लाइब्रेरी के साथ मैट्रिक, इंटर व नवोदय परीक्षा की तैयारी भी कराई जायेगी। इसके लिए स्थानीय शिक्षक भी तैयार हैं, जो शिफ्ट के आधार पर अपना समय बच्चों को देंगे। उन्होंने कहा कि यह अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र हैं इसमें हम थोड़ा भी बदलाव कर सकें तो बहुत बड़ी बात होगी। बच्चे पढ़ेंगे तो गलत रास्ते में भी नहीं जायेंगे और अपने जीवन को भी नई दिशा में लेकर जायेंगे। प्रकाश ने कहा कि इसके अलावा बंदगांव, सदर प्रखंड के बादुड़ी, सुरजाबासा, तांबो चौक, खुंटी जिला के भगवान बिरसा मुंडा के जन्मस्थली उलीहातु, खरसावां जिला में भी पुस्तकालय खोला गया है। इसमें हमारे टीम के सदस्यों का भी बहुत योगदान है। तांबो चौक में खुले लाइब्रेरी में पढ़ाई कर 15 युवक नौकरी प्राप्त कर चुके हैं। हमारा मकसद है कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को स्कूली शिक्षा के अलावा प्रतियोगिता परीक्षा में भी लाइब्रेरी के मदद से बेहतर कर सके।

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