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15 महीने से बंद टाटा स्टील की विजया-टू आयरन ओर माइंस जल्द होगी चालू, एमडीओ मॉडल से बढ़ेगा रोजगार

Published: Thu, 29 Oct 2026 08:45 PM (IST)

पश्चिमी सिंहभूम में टाटा स्टील की 15 महीने से बंद विजया-टू आयरन ओर खदान फिर से शुरू हो रही है। ...और पढ़ें

टाटा स्‍टील की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

टाटा स्‍टील की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. 15 महीने से बंद विजया-टू खदान फिर से शुरू।

  2. टाटा स्टील पहली बार एमडीओ मॉडल लागू करेगी।

  3. खदान संचालन से पश्चिमी सिंहभूम में रोजगार बढ़ेगा।

सुधीर पांडेय, चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के घाटकुड़ी रक्षित वन क्षेत्र में पिछले 15 महीनों से बंद पड़ी टाटा स्टील की विजया-टू आयरन ओर माइंस को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 
 
कंपनी इस खदान के संचालन के लिए पहली बार एमडीओ (माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर) की व्यवस्था लागू करने जा रही है। 
 
दीपावली के बाद एमडीओ का चयन होने की पूरी उम्मीद है, जिससे क्षेत्र के खनन, रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों को नया impulso (बढ़ावा) मिलेगा।
 

चार से पांच कंपनियों ने दिखाई रुचि 

विजया-टू माइंस के संचालन के लिए आमंत्रित की गई निविदा (टेंडर) में देश की 4 से 5 प्रतिष्ठित कंपनियों ने रुचि दिखाई है और आवेदन किया है। 
 
कंपनी सूत्रों के अनुसार, दीपावली के बाद एमडीओ का अंतिम रूप से चयन कर लिया जाएगा, जिसके बाद खनन कार्य को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी।
 

एक ही छत के नीचे होंगी सभी गतिविधियां 

नई व्यवस्था के तहत खदान से जुड़े तमाम कार्य अब एक ही एमडीओ एजेंसी के माध्यम से संचालित किए जाएंगे। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं: 
  • खनन और परिवहन
  • क्रशिंग और स्क्रीनिंग
  • वाटर स्प्रिंकलिंग और सड़क की ग्राइंडिंग
  • रखरखाव, फीडिंग और रैक लोडिंग
 
गौर करने वाली बात यह है कि पहले इन कार्यों के लिए अलग-अलग लगभग डेढ़ दर्जन कंपनियां (जैसे- बीएस माइनिंग, बीटी ट्रांसपोर्ट, आईएसएस, मधु ट्रांसपोर्ट, गिलुवा इंटरप्राइजेज, पुरती ट्रांसपोर्ट, विक्रम इंटरप्राइजेज, नवीन रोडलाइन, मेमको इंटरप्राइजेज, बड़ाजामदा लोडिंग सिंडिकेट और टिलू दत्ता आदि) तैनात थीं। नई व्यवस्था से प्रबंधन अधिक सुगम और पारदर्शी होगा।
 

अगस्त में हुआ था अहम समझौता 

खदान को दोबारा शुरू करने की दिशा में 31 अगस्त 2026 को जिला प्रशासन और टाटा स्टील लिमिटेड के बीच एक महत्वपूर्ण औपचारिक समझौता हुआ था। 
 
जिला प्रशासन की ओर से उपायुक्त मनीष कुमार तथा टाटा स्टील की ओर से महाप्रबंधक देवाशीष जेना, माइनिंग प्लान एवं प्रोजेक्ट चीफ अवनीष कुमार और विजया-टू माइंस के चीफ सह माइंस एजेंट राजीव कुमार ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।
 

383.20 एकड़ में फैली है खदान 

यह खदान घाटकुड़ी रक्षित वन क्षेत्र में कुल 383.20 एकड़ (155.078 हेक्टेयर) क्षेत्र में फैली हुई है। मूल रूप से यह खनन पट्टा मेसर्स उषा मार्टिन लिमिटेड को 18 अगस्त 2005 से 17 अगस्त 2025 तक (20 वर्षों के लिए) स्वीकृत किया गया था।
 
बाद में सरकारी अनुमति से यह टाटा स्पंज आयरन लिमिटेड को हस्तांतरित हुआ, जो आगे चलकर टाटा स्टील लांग प्रोडक्ट लिमिटेड बनी और अंततः इसका विलय टाटा स्टील लिमिटेड में हो गया।
 
खान एवं खनिज संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत टाटा स्टील ने इस पट्टे को 50 वर्षों के लिए विस्तारित करने का अनुरोध किया था, जिसे राज्य मंत्रिपरिषद ने 28 दिसंबर 2016 को मंजूरी दी थी।
 

रोजगार और कारोबार को मिलेगी गति 

खदान के पुनः संचालन से पश्चिमी सिंहभूम जिले की अर्थव्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। 
 
साथ ही परिवहन, लोडिंग, वाहन रखरखाव और अन्य सहायक व्यावसायिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी, जिससे स्थानीय कारोबारियों और युवाओं को सीधा लाभ पहुंचेगा।