पूर्वज नहीं बदल सकते, तो धर्म क्यों? धर्मांतरण करने वालों पर शंकराचार्य सदानंद सरस्वती का तीखा प्रहार
जगद्गुरु शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने धर्मांतरण, राजनीति और न्याय व्यवस्था पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि प्रलोभन के कारण ...और पढ़ें

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज
HighLights
धर्मांतरण रोकने के लिए सरकारी दस्तावेजों से नाम हटाने की मांग।
न्याय में अत्यधिक विलंब अन्याय है, न्यायिक सुधारों की आवश्यकता।
राजा को धार्मिक होना चाहिए, सनातन धर्म शाश्वत और अनादि।
जागरण संस, मनोहरपुर। द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने रविवार को विश्व कल्याण आश्रम (पारलीपोस) में पत्रकारों से वार्ता के दौरान धर्मांतरण, राजनीति और न्याय व्यवस्था पर बेबाक राय रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिन्हें अपनी परंपरा और धर्म का ज्ञान नहीं होता, वही लोग प्रलोभन में आकर धर्म परिवर्तन करते हैं।
धर्मांतरण रोकने के लिए कड़े कदम की मांग
शंकराचार्य जी ने कहा कि सुविधा और प्रलोभन की वजह से लोग मिशनरियों के चंगुल में फंस रहे हैं। उन्होंने इसके लिए सरकारी नीतियों में व्याप्त भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया।
- प्रमुख मांग: उन्होंने जोर देकर कहा कि धर्म परिवर्तन करने वालों का नाम आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों से तुरंत काटा जाना चाहिए।
- अटूट आस्था: उन्होंने कहा कि जब आप अपने पूर्वजों और माता-पिता को नहीं बदल सकते, तो धर्म को कैसे बदल सकते हैं? मुगल और अंग्रेज भी सनातन को खत्म नहीं कर सके, हम धर्मांतरण रोकने में जरूर सफल होंगे।
न्यायिक व्यवस्था और संविधान पर विचार
देश की न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जगद्गुरु ने कहा कि भारत में न्याय मिलने में अत्यधिक विलंब होता है, जो स्वयं में एक अन्याय है। उन्होंने कहा कि संविधान में संशोधन कर न्यायिक व्यवस्था बदलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जजों की भारी संख्या में नियुक्ति हो और अनावश्यक कानूनों को हटाया जाए। साथ ही, देश के संविधान से हिंदू कोड बिल भी हटना चाहिए।
राजा और धर्म का संबंध
शंकराचार्य ने धर्म और शासक के अंतर्संबंधों की व्याख्या करते हुए कहा कि देश के राजा को अनिवार्य रूप से धार्मिक होना चाहिए। यदि राजा धार्मिक होगा, तो प्रजा भी धर्म का मार्ग अपनाएगी।
उन्होंने सुझाव दिया कि राजा को हमेशा लोक भावना का आदर करते हुए ही कानूनों का निर्माण करना चाहिए। सनातन और हिंदू की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों एक ही हैं। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि ईसाई और मुस्लिम धर्मों की आयु सीमित है, जबकि सनातन धर्म शाश्वत और अनादि है।
