जासं, चाईबासा : कोकचो में ईचा खरकई बांध विरोधी संघ, मानकी मुंडा, रैयत एवं बुद्धिजीवियों की बैठक साधो पुरती की अध्यक्षता में हुई। बैठक को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के उपाध्यक्ष मुकेश बिरुवा ने कहा कि रघुवर सरकार की विधानसभा चुनाव स्तरीय मानकी मुंडा कार्यशाला संपन्न हुई। यह कार्यशाला विशुद्ध रूप से कोल्हान को विधानसभा चुनाव में भेदने के लिए आयोजित की गई थी। सभी सरकारी पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मानकी और मुंडा सरकार के अभिन्न अंग हैं। सरकार का आदेश मानकी-मुंडा का आदेश है। सरकार की योजनाएं मानकी-मुंडा की योजनाएं हैं। सरकार का भूमि अधिग्रहण अधिनियम मानकी मुंडा का भूमि अधिग्रहण अधिनियम है, सरकार का लैंड बैंक मानकी मुंडा का लैंड बैंक है। कोल्हान के हो समाज को अभी जागने की जरूरत है, जिस तरह रघुवर सरकार काम कर रही है उससे मानकी-मुंडा हो समाज से दूर होते जा रहे हैं और सरकारी पदाधिकारी बनते जा रहे हैं। मानकी मुंडाओं से भी अपील है कि समाज का अगुवा बनें, ना कि सरकार का। पदाधिकारियों ने मानकी-मुंडा व्यवस्था को विलकिसन की देन कहा, जो सरासर गलत है। हो समाज की सामाजिक व्यवस्था आदि काल से चली आ रही है, जिसे विलकिसन ने भी स्वीकार किया और दस्तावेजों में लिख दिया। दस्तावेज से पहले भी हो समाज समाज में सामाजिक व्यवस्था मानकी मुंडा व्यवस्था ही थी। इसी सामाजिक व्यवस्था को सरकारी बनाने का प्रयास लगातार चल रहा है, जो अत्यंत दुखद है। जबकि मानकी मुंडा हो समाज के कस्टम या दस्तूर से गाइड होते हैं, न कि सरकार के। और सरकार तो आदिवासी भी नहीं, ऐसे में जबरन हो समाज के कस्टम में घुसने की कोशिश घातक होगी। कोल्हान का विकास करना ही है तो कोल्हान फंड क्यों रोक कर रखा गया है इसका जवाब रघुवर सरकार को देना चाहिए। ईचा डैम को पुन: बनाने के लिए रघुवर सरकार टेंडर जारी कर दिया है, सैकड़ों गांव डूब जाएंगे तो वहां के मानकी मुंडा समाप्त हो जाएंगे, ये कैसा हक मानकी मुंडा को दे रहे हैं कि उनका अस्तित्व ही खत्म हो रहा है। सभा को दासकन कुदादा, साधो पुरती, डोगर तियु, सुरेंद्र बिरुली ने भी संबोधित किया।

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