चाईबासा के पहल राठौर का कमाल: AI स्मार्ट चश्मा बनाया, अंग्रेजी को तुरंत करेगा हिंदी में ट्रांसलेट
चाईबासा के पहल राठौर ने एक AI स्मार्ट चश्मा विकसित किया है जो कैमरे और भाषा अनुवाद की सुविधा देता ...और पढ़ें

पहल राठौर
HighLights
पहल राठौर ने AI आधारित स्मार्ट चश्मा बनाया।
यह अंग्रेजी बातचीत को तुरंत हिंदी में अनुवाद करता है।
अक्टूबर से व्यावसायिक डिलीवरी, कीमत 10 हजार।
सुधीर पांडेय, चाईबासा। बड़े शहरों में मिलने वाली सुविधाओं और संसाधनों के बीच तकनीकी प्रयोग करने वाले युवाओं की कमी नहीं है, लेकिन अब छोटे शहर भी ऐसे नवाचार की जमीन बन रहे हैं। चाईबासा के पहल राठौर ने ऐसा स्मार्ट चश्मा तैयार किया है, जिसमें कैमरे के साथ भाषा को समझने और उसका अनुवाद करने की सुविधा दी गई है।
पहल के अनुसार, चश्मे की मदद से यदि कोई व्यक्ति अंग्रेजी में बात करता है तो उसकी बात हिंदी में सुनने में मदद मिलेगी। इसमें लगा कैमरा आसपास की गतिविधियों और किसी महत्वपूर्ण घटना को रिकार्ड करने के काम भी आ सकता है। उनका दावा है कि दोनों सुविधाओं को एक ही डिवाइस में जोड़ने का प्रयास किया गया है।
2012 एआई आधारित स्मार्ट चश्मे पर काम शुरू
पहल बताते हैं कि इस तरह का चश्मा बनाने का विचार उनके मन में वर्ष 2012 में आया था। उस समय गूगल के स्मार्ट ग्लास से जुड़े पेटेंट ने उनका ध्यान इस तकनीक की ओर खींचा। हालांकि उस समय इसे लेकर आगे बढ़ना संभव नहीं हुआ।

बाद में बड़े भाषा मॉडल और आवाज आधारित तकनीक के तेजी से विकास के बाद उन्हें लगा कि आने वाले समय में स्मार्टफोन के साथ पहनकर इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों की भूमिका भी बढ़ेगी। इसी सोच के साथ उन्होंने एआई आधारित स्मार्ट चश्मे पर काम शुरू किया।
रियल टाइम स्पीच-टू-टेक्स्ट और ट्रांसलेशन तकनीक
पहल के अनुसार, वर्किंग प्रोटोटाइप तैयार करने में करीब एक वर्ष का समय लगा। इसके बाद करीब छह महीने उत्पाद को बाजार में उतारने की तैयारी और व्यावसायिक रणनीति तैयार करने में लगे। चश्मे में आवाज को समझने, उसे टेक्स्ट में बदलने और दूसरी भाषा में अनुवाद करने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

इसके लिए बड़े भाषा मॉडल, रियल टाइम स्पीच-टू-टेक्स्ट और ट्रांसलेशन तकनीक को भारतीय उपयोग के अनुरूप तैयार किया गया है। कनेक्टिविटी के लिए ब्लूटूथ लो एनर्जी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। पहल के मुताबिक, इसमें सोनी का कैमरा सेंसर, ताइवान का हाई परफॉर्मेंस चिपसेट और भारत में तैयार ड्यूरेबल फ्रेम लगाया गया है।
पेटेंट आवेदन प्रक्रियाधीन
अभी यह चश्मा प्रूफ ऑफ कासेप्ट और यूजर वैलिडेशन के चरण में है। पहल के अनुसार, इसके लिए प्री-बुकिंग शुरू की जा चुकी है। उनकी योजना इसी वर्ष अक्टूबर से इसकी व्यावसायिक डिलीवरी शुरू करने की है। डिवाइस के आर्किटेक्चर और तकनीकी नवाचार के लिए पेटेंट आवेदन प्रक्रियाधीन है।
इसे आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने आइआइटी बांबे के एसआइएनई और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के आइ-वी जैसे इनक्यूबेशन सेंटरों में भी आवेदन किया है।
बाजार में चश्मे की कीमत हो सकती है 10 हजार रुपये
प्रोटोटाइप तैयार करने और हार्डवेयर-सॉफ़्टवेयर आरएंडडी पर अब तक करीब आठ लाख रुपये खर्च होने की जानकारी पहल ने दी है। उनके अनुसार, इस प्रोजेक्ट पर पूर्णकालिक काम करने की अवसर लागत को जोड़ने पर कुल खर्च करीब 10 लाख रुपये है। आम लोगों और छात्रों को ध्यान में रखते हुए उनका लक्ष्य बाजार में इसकी कीमत करीब 10 हजार रुपये रखने का है।
डेटा एवं एनालिटिक्स से स्नातक, इंडियन स्कूल आफ बिजनेस से पीजी
25 वर्षीय पहल की शुरुआती पढ़ाई चाईबासा के सेंट जेवियर्स इंग्लिश स्कूल और डीएवी पब्लिक स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने मुंबई की क्राइस्ट यूनिवर्सिटी से डेटा एवं एनालिटिक्स में स्नातक और इंडियन स्कूल आफ बिजनेस से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। एक्सा ग्लोबल और डेलोयट जैसी कंपनियों में काम करने के बाद उन्होंने कोरपोरेट करियर छोड़कर पूर्णकालिक उद्यमिता का रास्ता चुना।
पहल का कहना है कि आज तकनीक और इंटरनेट ने छोटे शहरों के युवाओं के लिए भी संभावनाओं के दरवाजे खोल दिए हैं। उनके अनुसार, किसी बड़े शहर में रहना ही तकनीकी नवाचार की शर्त नहीं है। चाईबासा जैसे शहर से भी नई सोच के साथ ऐसा उत्पाद विकसित किया जा सकता है, जिसे आगे बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सके।
