जागरण संवाददाता, चक्रधरपुर : ऑल इंडिया लोको रनिग स्टॉफ एसोसिएशन के बैनर तले चक्रधरपुर रेल मंडल में कार्यरत लोको पायलट व सहायक लोको पायलटों ने 17 सूत्री मांगों को लेकर डीआरएम कार्यालय के समीप 12 घंटे का उपवास कर धरना-प्रदर्शन कर रेल प्रशासन के खिलाफ जम कर नारेबाजी किया। लोको रनिग एसोसिएशन के आरएन सिंह ने कहा कहा कि उनकी कई सारी लंबित मांगें हैं जिसपर सरकार ने आजतक कोई फैसला नहीं लिया हैं जिससे उनको निराशा हाथ लगी हैं । रनिग स्टाफ ने कोरोना काल जैसे विषम परिस्थिति में भी ईमानदारी और निष्ठा से काम किया, लेकिन उनकी समस्याओं को दूर करने के बजाये उन्हें परेशानी में धकेलने का काम रेलवे कर रही हैं। लोको रनिग एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा रेल प्रशासन नियम कानून को ताक पर रखकर सुरक्षा से खिलवाड़ कर ट्रेनें चला रही है। जिसमें लोको पायलट और रेल यात्रियों की भी जान खतरे में झोंका जा रहा हैं।आज हाई स्पीड ट्रेन चलाई जा रही है लेकिन रेलवे के द्वारा सुरक्षा का बिलकुल ख्याल नहीं रखा जा रहा हैं। चक्रधरपुर रेल मंडल में हालात बद से बदतर हैं। कोई कर्मचारी इसके खिलाफ आवा•ा भी उठाता है तो उस पर प्रशासनिक कार्रवाई कर उसे दबाने की कोशिश की जाती हैं। चक्रधरपुर रेल मंडल में अफसरशाही चरम पर है और ट्रेनों का परिचालन खतरे मोल कर किया जा रहा हैं।रेलवे लोको रनिग स्टाफ ने रेलवे से रात्री ड्यूटी भत्ता में किये गए कटौती को वापस लेने की मुख्य रूप से मांग की है। इन मांगों को लेकर किया गया उपवास व धरना प्रदर्शन :

रनिग स्टॉफ का महंगाई भत्ता रिलीज की जाए, न्यू पेंशन स्कीम को रद्द कर ओल्ड पेंशन स्कीम को चालू करने, रेलवे में चल रहे निजीकरण को बंद करने, चालक दल को 5 से 6 घंटे में राहत देने, 35 प्रतिशत अतिरिक्त एलपीजी पोस्ट स्वीकृत करने, सभी रिक्तियों को भरने, एएलपी प्रशिक्षण में तेजी लाने, रनिग स्टाफ के ड्यूटी को 8 घंटे करने, रनिग रूम की सुविधाओं में सुधार करने, कोविड-19 से होने वाले मृत्यु में 50 लाख रुपये का मुआवजा रेलकर्मी के आश्रित को देने, कोरोना वायरस की तीसरी लहर से लड़ने के लिए कोविड अस्पताल स्थापित करने, बिना गार्ड, बिना ब्रेकवेन, बिना बीपीसी के असुरक्षित ट्रेन परिचालन को बंद करने जैसी आदि मागें लोको रनिग स्टाफ ने सरकार व रेल प्रशासन से की हैं।

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