Kolhan University की डिग्री होगी हाईटेक: 11 सिक्योरिटी फीचर्स से फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम, सत्यापन होगा आसान
कोल्हान विश्वविद्यालय अब डिजिटल सुरक्षा कवच के साथ डिग्री प्रमाणपत्र जारी करेगा, जिसमें फर्जीवाड़े को रोकने के लिए 11 उच्चस्तरीय सुरक्षा विशेषताएं होंगी।

चाईबासा स्थित कोल्हान विवि परिसर में अकादमिक काउंसिल की बैठक में डिग्री प्रमाणपत्र के नए प्रारूप को मंजूरी दी गई।
HighLights
डिग्री प्रमाणपत्रों में 11 उच्चस्तरीय डिजिटल सुरक्षा सुविधाएं होंगी।
क्यूआर कोड और बारकोड से सत्यापन प्रक्रिया सरल बनेगी।
फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा, छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ेगी।
जागरण संवाददाता, चाईबासा। कोल्हान विश्वविद्यालय (KU) की डिग्री अब मजबूत डिजिटल सुरक्षा कवच से लैस होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने डिग्री प्रमाणपत्र को नए और आधुनिक स्वरूप में जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है।
कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित 45वीं अकादमिक काउंसिल की बैठक में डिग्री प्रमाणपत्र के इस नए प्रारूप को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई।
झारखंड स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट, 2026 के प्रावधानों के तहत पुनर्गठित अकादमिक काउंसिल की यह पहली बैठक शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित की गई थी।
A4 फॉर्मेट में मिलेंगे प्रमाणपत्र, सुरक्षा के 11 फीचर्स
नए निर्णय के तहत विश्वविद्यालय अब डिग्री प्रमाणपत्र ए4 (A4) फॉर्मेट में जारी करेगा। इस नए प्रमाणपत्र में क्यूआर कोड (QR Code) और बारकोड सहित कुल 11 उच्चस्तरीय सुरक्षा विशेषताएं (Security Features) शामिल होंगी।
इससे प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता की जांच तथा डिजिटल सत्यापन (Digital Verification) बेहद आसान और सटीक हो जाएगा, जिससे फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगेगा।
नौकरी और उच्च शिक्षा में सत्यापन होगा आसान
नए फॉर्मेट से विद्यार्थियों को नौकरी, उच्च शिक्षा या अन्य संस्थानों में दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
नियोक्ता या संस्थान क्यूआर कोड को स्कैन करके सीधे विद्यार्थी के शैक्षणिक विवरण का डिजिटल सत्यापन कर सकेंगे। इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रमाणपत्र अपलोड करने और उसे सत्यापित करने की प्रक्रिया भी सुगम हो जाएगी।
रोजगारपरक शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर जोर
अकादमिक काउंसिल की इस बैठक में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और छात्रों की रोजगार क्षमता (Employability) बढ़ाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
बैठक में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि पाठ्यक्रम को उद्योगों की वर्तमान मांग के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए। छात्रों को स्थानीय व राष्ट्रीय स्तर के अवसरों के योग्य बनाने के लिए उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया गया।
1-वर्षीय पीजी, पीएचडी और शैक्षणिक कैलेंडर 2026-27 स्वीकृत
सत्र को नियमित और समयबद्ध करने के उद्देश्य से शैक्षणिक कैलेंडर 2026-27 को भी स्वीकृति दी गई। इसके अलावा एक वर्षीय पीजी (Post Graduation) कार्यक्रम, शोध एवं पीएचडी (PhD) पाठ्यक्रमों को नियमित करने तथा उनके संचालन पर विस्तार से मंथन किया गया।
देश के शीर्ष IIT और NIT के साथ MoU की तैयारी
छात्रों को उत्कृष्ट शोध, प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करने के लिए आईआईटी (IIT), एनआईटी (NIT) और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू (MoU) करने की योजना बनाई गई है।
बैठक में आईआईटी खड़गपुर के प्रो. संजीव श्रीवास्तव, सीयूजे के प्रो. भगवान सिंह, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एमपी सिन्हा तथा (ऑनलाइन माध्यम से) ट्रिपल आईटी रांची के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव और एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
बैठक का कुशल संचालन कुलसचिव डॉ. अमर कुमार ने किया, जबकि डीन अकादमिक्स डॉ. संजय यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
