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10 मीटर दूर भी देखना नामुमकिन! घने कोहरे की चादर में लिपटा किरीबुरू, दिन में जलानी पड़ रही वाहनों की लाइटें

Published: Mon, 31 Aug 2026 05:30 PM (IST)

नोवामुंडी, किरीबुरू और मेघाहातुबुरू में लगातार बारिश और घने कोहरे से जनजीवन अस्त-व्यस्त है, जिससे दृश्यता कम हो गई है।

पहाड़ी इलाका होने के कारण किरीबुरू और मेघाहातुबुरु 24 घंटे घने कोहरे की सफेद चादर में ढका हुआ है।

पहाड़ी इलाका होने के कारण किरीबुरू और मेघाहातुबुरु 24 घंटे घने कोहरे की सफेद चादर में ढका हुआ है।

HighLights

  1. किरीबुरू में लगातार बारिश और घने कोहरे से दृश्यता घटी।

  2. निचले इलाकों में जलजमाव, धान की फसल को नुकसान की आशंका।

  3. पहाड़ी पर कोहरा, नीचे धूप का अनोखा मौसम दिख रहा।

संसू, नोवामुंडी। नोवामुंडी, किरीबुरू और मेघाहातुबुरु क्षेत्र में पिछले कई दिनों से हो रही लगातार मूसलाधार बारिश से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। 
 
पहाड़ी इलाका होने के कारण किरीबुरू और मेघाहातुबुरु 24 घंटे घने कोहरे की सफेद चादर में ढका हुआ है, जिससे मुख्य सड़कों पर दृश्यता (विजिबिलिटी) घटकर महज 10 मीटर रह गई है।
 

दिन में भी जलानी पड़ रही वाहनों की हेडलाइट 

घने कोहरे के कारण सड़कों पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। चालकों को दिन के उजाले में भी वाहनों की हेडलाइट जलाकर बेहद धीमी गति से गाड़ियां चलानी पड़ रही हैं। कई दिनों की निरंतर बारिश के बावजूद कोहरा छंटने का नाम नहीं ले रहा है।

मौसम का अनोखा मिजाज: ऊपर कोहरा, नीचे धूप

क्षेत्र में मौसम का एक अनोखा और लुभावना रूप भी देखने को मिल रहा है। किरीबुरू पहाड़ी से महज पांच किलोमीटर नीचे उतरते ही मौसम पूरी तरह बदल जाता है। 
 
पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में जहां घना कोहरा और बादल छाए हैं, वहीं निचले हिस्से में धूप खिली नजर आ रही है। बारिश, घने बादलों और सारंडा के जंगलों के इस अनूठे संगम ने किरीबुरू को बादलों के शहर में तब्दील कर दिया है, जहां धूप और बादलों के बीच आंख-मिचौली का खेल जारी है।
 

निचले इलाकों में जलजमाव, फसलों पर मंडराया संकट 

लगातार बारिश के कारण नोवामुंडी, बड़ाजामदा और आसपास के मैदानी व निचले इलाकों में जलजमाव की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई स्थानों पर सड़कों पर घुटने भर पानी भर जाने से आवाजाही बाधित है। 
 
बाजारों में सन्नाटा पसरा है और व्यापार मंदा पड़ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों में पानी घुसने से ग्रामीणों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। 
 
इसके अलावा, खेतों में अत्यधिक पानी भर जाने से किसानों की धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।