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ट्रेन हादसों पर लगेगा ब्रेक: खड़गपुर इलेक्ट्रिक लोको शेड ने 10 इंजनों को 'कवच' सिस्टम से किया लैस

Published: Wed, 07 Oct 2026 07:31 PM (GMT+05:30)

भारतीय रेलवे ट्रेन दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अपने इंजनों को 'कवच' प्रणाली से लैस कर रहा है। खड़गपुर ...और पढ़ें

दक्षिण पूर्व रेलवे के खड़गपुर स्थित इलेक्ट्रिक लोको शेड ने एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।

दक्षिण पूर्व रेलवे के खड़गपुर स्थित इलेक्ट्रिक लोको शेड ने एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।

HighLights

  1. खड़गपुर लोको शेड ने 10 इंजनों में 'कवच' प्रणाली लगाई।

  2. यह लोको शेड RFID टैग लगाने वाला पहला बना।

  3. 'कवच' स्वचालित ब्रेकिंग, SPAD रोकथाम, ओवर-स्पीड नियंत्रण सुनिश्चित करता है।

जागरण संवाददाता, चक्रधरपुर। ट्रेन दुर्घटनाओं पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए भारतीय रेलवे अपने इंजनों को ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 'कवच' से लैस कर रहा है। 
 
इसी कड़ी में दक्षिण पूर्व रेलवे के खड़गपुर स्थित इलेक्ट्रिक लोको शेड ने एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 
 
इस लोको शेड ने 25 जुलाई से 01 अक्टूबर के बीच रिकॉर्ड समय में 10 लोकोमोटिव (ट्रेन इंजनों) में 'कवच' प्रणाली स्थापित करने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
 

दो अन्य इंजनों में काम जारी, 2 टेस्टिंग फेज में 

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, 10 इंजनों में कवच इंस्टॉलेशन के अलावा दो और लोकोमोटिव में यह प्रणाली स्थापित की जा चुकी है, जिन्हें जल्द ही चालू किया जाएगा। वहीं, दो अन्य इंजनों में स्थापना का कार्य तेजी से चल रहा है।
 

RFID टैग लगाने वाला बना पहला लोको शेड 

खड़गपुर इलेक्ट्रिक लोको शेड दक्षिण पूर्व रेलवे का ऐसा पहला शेड बन गया है, जिसने पारंपरिक इलेक्ट्रिक मालगाड़ी इंजनों में आरएफआईडी (RFID) टैग लगाए हैं। 
 
आरएफआईडी तकनीक से स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों की स्वचालित पहचान और डिजिटल ट्रैकिंग संभव होगी, जिससे रेल परिचालन की दक्षता और पारदर्शिता में बड़ा सुधार आएगा। 
 

कैसे काम करता है 'कवच' सिस्टम? 

अब तक दो इंजनों में आरएफआईडी टैग लगाए जा चुके हैं और तीन अन्य में कार्य प्रगति पर है। कवच एक बेहद आधुनिक सुरक्षा प्रणाली है, जो निम्नलिखित मुख्य फीचर्स को एकीकृत करती है: 
  • स्वचालित ब्रेकिंग: खतरे की स्थिति में ट्रेन में अपने आप ब्रेक लग जाते हैं।
  • SPAD रोकथाम: चालक द्वारा रेड सिग्नल ओवरशूट (पार) करने की गलती को रोकता है।
  • ओवर-स्पीड कंट्रोल: निर्धारित गति सीमा से अधिक होने पर स्पीड को खुद नियंत्रित करता है।
  • कैब सिग्नलिंग: ड्राइवर मशीन इंटरफेस (DMI) के माध्यम से लोको पायलट को लगातार सिग्नल की जानकारी मिलती रहती है।
 
इस तकनीक के लागू होने से रेल परिचालन में सुरक्षा के मानकों में अभूतपूर्व सुधार होगा और यात्रियों का सफर अधिक सुगम और सुरक्षित बनेगा।