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बेटियां शिक्षित होंगी तो पीढ़ियां संवरेंगी - कोल्हान विवि के 7वें दीक्षांत समारोह में बोले राज्यपाल संतोष गंगवार

By Md TaquiEdited By: Sanjeev Kumar
Published: Tue, 29 Sep 2026 04:00 PM (IST)

राज्यपाल संतोष गंगवार ने कोल्हान विश्वविद्यालय के 7वें दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्रों को गोल्ड मेडल और शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की।

कोल्हान विश्वविद्यालय परिसर स्थित वीर शहीद पोटो हो सभागार में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल एवं कुलाधिपति संतोष गंगवार शामिल हुए।

कोल्हान विश्वविद्यालय परिसर स्थित वीर शहीद पोटो हो सभागार में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल एवं कुलाधिपति संतोष गंगवार शामिल हुए।

HighLights

  1. राज्यपाल ने 26 गोल्ड मेडल और 39 पीएचडी उपाधियां प्रदान कीं।

  2. बेटियों की शिक्षा से आने वाली पीढ़ियां सुदृढ़ होती हैं: राज्यपाल।

  3. स्थानीय जनजातीय ज्ञान और संसाधनों पर शोध की आवश्यकता पर बल।

जासं, चाईबासा। कोल्हान विश्वविद्यालय परिसर स्थित वीर शहीद पोटो हो सभागार में 7वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि झारखंड के राज्यपाल एवं कुलाधिपति संतोष गंगवार शामिल हुए। 
 
उन्‍होंने मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल तथा शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की। अपने संबोधन में राज्यपाल ने शिक्षा, सामाजिक सरोकार, शोध, नवाचार और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से निरंतर जुड़े रहने की प्रेरणा दी।
 

बेटियों की शिक्षा से सुदृढ़ होती हैं आने वाली पीढ़ियां 

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि बेटियों की शिक्षा केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखती है। 
 
देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा में छात्राओं की बढ़ती संख्या और उन्हें मिलने वाले पदक बदलते भारत की सकारात्मक तस्वीर को दर्शाते हैं।
 
उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों की छात्राओं के लिए छात्रावास, कौशल विकास और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
 

जनजातीय संस्कृति, स्थानीय जीवन और संसाधनों पर केंद्रित हो शोध 

कोल्हान क्षेत्र की ऐतिहासिक और सामाजिक विरासत का जिक्र करते हुए कुलाधिपति ने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय जनजातीय ज्ञान, परंपराओं, भाषाओं, खनिज और वन संपदा पर व्यापक शोध होना चाहिए। 
 
विश्वविद्यालय को ऐसा केंद्र बनना चाहिए जहाँ स्थानीय समस्याओं की पहचान कर उनके व्यावहारिक और तकनीकी समाधान खोजे जा सकें।
 

नियमित सत्र, पारदर्शी व्यवस्था और अनुशासन सर्वोपरि 

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समारोह के उपरांत मीडिया से बातचीत में राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों में सत्र नियमित करना, समय पर परीक्षाएं कराना और परीक्षा परिणाम जारी करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। 
 
इससे युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार की तैयारियों के लिए पर्याप्त अवसर मिल सकेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को विद्यार्थियों के साथ मैत्रीपूर्ण व पारदर्शी संवाद कायम करने की सलाह दी, ताकि छात्र बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक के दौर में युवाओं की भूमिका 

उभरते तकनीकी क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज का दौर एआई (AI), जैव प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 
 
युवाओं को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर नवाचार को अपनाना चाहिए। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में युवाओं का ज्ञान और कौशल सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।
 

26 गोल्ड मेडल और 39 शोधार्थियों को मिली पीएचडी की उपाधि 

दीक्षांत समारोह में कुल 224 विद्यार्थियों को विभिन्न शैक्षणिक उपाधियां प्रदान की गईं: 
  • स्वर्ण पदक: राज्यपाल ने 26 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए, जिनमें 15 छात्राएं और 11 छात्र शामिल हैं। (पीजी सत्र 2023-25 के 23, एमएड के 1, बीएड के 1 और एमबीए सत्र 2022-24 के 1 विद्यार्थी)। 
  • पीएचडी उपाधि: 39 शोधार्थियों (20 छात्राएं और 19 छात्र) को पीएचडी की उपाधि से नवाजा गया। 
  • अन्य उपाधियां: राज्यपाल के प्रस्थान के बाद विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता एवं अन्य अधिकारियों ने 132 पीजी, 10 एमएड और 17 पीजी मेडिकल डिप्लोमा धारकों को डिग्रियां प्रदान कीं।
 

निर्धारित ड्रेस कोड और कड़े सुरक्षा इंतजाम 

समारोह में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष परिधान तय किया गया था। छात्रों ने सफेद कुर्ता-पायजामा तथा छात्राओं ने क्रीम/ऑफ-व्हाइट रंग की लाल या सुनहरे बॉर्डर वाली साड़ी धारण की थी।
 
सुरक्षा के दृष्टिकोण से सभागार के भीतर मोबाइल, बैग, छाते अथवा अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहा। काले रंग के वस्त्र या सामान के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई थी।
 
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता, चाईबासा के उपायुक्त मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अमित रेनू, डीन अकादमिक अफेयर्स डॉ. संजय यादव, परीक्षा नियंत्रक रिंकी दोराई तथा मीडिया प्रवक्ता डॉ. मीनाक्षी मुंडा सहित अनेक गणमान्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।