यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 24, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
झारखंड की इस सीट पर बिगड़ा कांग्रेस का समीकरण! पहले गीता कोड़ा ने दिया झटका; अब JMM ने बढ़ाया सिरदर्द
Lok Sabha Election 2024 लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। पहले फेज का चुनाव 19 अप्रैल को ...और पढ़ें

HighLights
- होली के बाद JMM कर सकता है प्रत्याशी की घोषणा
- भाजपा की गीता कोड़ा भी `हो`समुदाय से
- आज तक हो आदिवासी ही बने हैं सिंहभूम से सांसद
जागरण संवाददाता, चाईबासा। लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। सिंहभूम संसदीय सीट पर चौथे चरण में 13 मई को चुनाव होगा। भाजपा इस सीट पर गीता कोड़ा को अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। वहीं, आइएनडीआइए गठबंधन ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हां, इतना जरूर तय कर दिया है कि सिंहभूम सीट से इस बार कांग्रेस की जगह झामुमो चुनाव लड़ेगी।
हालांकि, सीटों के बंटवारे की भी अभी तक अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि होली के आसपास झामुमो प्रत्याशियों की सूची जारी कर देगा।
झामुमो से जुड़े सूत्रों की मानें तो चक्रधरपुर के विधायक सुखराम उरांव और खरसावां के विधायक दशरथ गगराई में से ही किसी एक पर पार्टी दांव लगाएगी। चूंकि सिंहभूम में आदिवासी हो जनजाति चुनाव में बड़ा फैक्टर रहता है। इसलिए, दशरथ गगराई ही ज्यादा भरोसेमंद प्रत्याशी नजर आ रहे हैं।
सिंहभूम सीट पर हो जनजाति का प्रभाव
भाजपा की प्रत्याशी गीता कोड़ा में हो जनजाति से ही आती हैं। अगर सिंहभूम का जनजातीय समीकरण देखें तो हो जनजाति का इस सीट पर काफी प्रभाव रहा है। यहां से अधिकतर सांसद हो जनजाति से ही बने हैं।
सिंहभूम के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो कृष्णा मार्डी को छोड़कर अभी तक सारे हो प्रत्याशी ही यहां से सांसद बने हैं। कृष्णा मार्डी संथाल समुदाय से आते हैं। ऐसे में झामुमो टिकट को लेकर कोई उलटफेर करने के मूड में नहीं है और दशरथ गागराई को ही चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रहा है।
इधर, कांग्रेस ने भी अभी तक सिंहभूम सीट पर अपनी दावेदारी नहीं छोड़ी है। कांग्रेस से डा. प्रदीप बलमुचू सिंहभूम सीट से चुनाव लड़ने की प्रबल इच्छा लेकर दिल्ली गए हुए हैं। फिलहाल सिंहभूम की जनता गीता कोड़ा के विरोध में खड़े होने वाले प्रत्याशी के इंतजार में है।
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